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भोपाल कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जनसुनवाई जारी कलेक्टर श्री प्रियंक जी के निर्देशन में एडीएम श्री सुमित पांडेय, श्री प्रकाश नायक सहित अन्य अधिकारी मंगलवार को जिले से जनसुनवाई में आए नागरिकों की समस्याएं सुन रहे हैं। अभी तक 115 आवेदनों पर सुनवाई की जा चुकी है। #Bhopal

21 views | Bhopal, Madhya Pradesh | Jun 23, 2026

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सफलता की कहानी

सफलता की कहानी: जैविक खेती के प्रेरणास्रोत कृषक मजीद खान

    भोपाल जिले के इमलिया नरेन्द्र गांव के प्रगतिशील कृषक श्री मजीद खान ने अपनी मेहनत, दृढ़ संकल्प और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण से जैविक खेती के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने स्वेच्छा से जैविक खेती को अपनाया और पिछले एक दशक से अनेक चुनौतियों के बावजूद निरंतर इस पद्धति पर कार्य कर रहे हैं। उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए उन्हें उत्तम कृषक पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

     जब बड़े शहरों में भी जैविक उत्पादों की स्वीकार्यता को लेकर संदेह बना हुआ था, तब श्री मजीद खान ने अपनी मेहनत और विश्वास के बल पर एक अलग पहचान बनाई। वर्ष 2019 में उन्होंने मध्यप्रदेश जैविक प्रमाणीकरण संस्था से अपने फल एवं सब्जियों का पंजीकरण कराया। आज वे भोपाल के नागरिकों को जैविक रूप से उत्पादित ताजी सब्जियां, फल और फूल उपलब्ध करा रहे हैं।

   श्री मजीद खान लगभग 8 एकड़ भूमि पर जैविक खेती करते हैं। प्रारंभिक वर्षों में उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना भी करना पड़ा। कई लोगों ने उन्हें रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग करने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने अपने सिद्धांतों और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से कभी समझौता नहीं किया। उन्हें प्राकृतिक खेती की प्रेरणा कृषि विभाग के पूर्व संचालक एवं प्रकृतिविद डॉ. जी.एस. कौशल से प्राप्त हुई।

      वर्ष 2015 से उन्होंने गाय के गोबर, गोमूत्र से निर्मित जीवामृत, वर्मी कम्पोस्ट, नाडेप खाद तथा फसल अवशेषों से तैयार जैविक खाद का उपयोग शुरू किया। धीरे-धीरे उनके खेतों में रासायनिक खाद की आवश्यकता पूरी तरह समाप्त हो गई। इसके परिणामस्वरूप मिट्टी की उर्वरता बढ़ी, फसल की गुणवत्ता में सुधार हुआ तथा मल्चिंग और कम सिंचाई के कारण जल संरक्षण भी संभव हुआ।

   उनकी सफलता से प्रेरित होकर आसपास के अनेक किसानों ने भी जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाना शुरू किया। वर्तमान में जिले में 1200 से अधिक किसान प्राकृतिक एवं जैविक खेती कर रहे हैं। श्री मजीद खान स्वयं भी किसानों को प्रशिक्षण और प्रेरणा देकर इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। उनका मानना है कि खेती को पूरी तरह प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से किया जाना चाहिए।

   खेती में वे वर्मी कम्पोस्ट, गोबर खाद, फसल अवशेष, मल्चिंग तथा छाछ आधारित जैविक घोल का उपयोग करते हैं। इन उपायों से वे कीट एवं रोगों का प्रभावी नियंत्रण करते हैं और रासायनिक कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं पड़ती। विविधतापूर्ण खेती और नवाचारों के कारण उन्होंने एक सफल एवं अनुकरणीय मॉडल विकसित किया है। लगातार दस वर्षों से रासायनिक खाद का उपयोग न करने के कारण उन्हें जैविक खेती का आधिकारिक पंजीकरण भी प्राप्त हो चुका है, जो उन्हें प्रदेश के चुनिंदा जैविक किसानों में शामिल करता है।

  श्री मजीद खान ने मनरेगा योजना के अंतर्गत जल संरक्षण और पशुपालन को भी अपनी खेती से जोड़ा है। उन्होंने बलराम कूप का निर्माण कर वर्षा जल संग्रहण की व्यवस्था की तथा ड्रिप सिंचाई के माध्यम से कम पानी में अधिक उत्पादन सुनिश्चित किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने मनरेगा के तहत 30×12 मीटर का पशु शेड बनवाया और उद्यानिकी विभाग से प्राप्त 500 आम, मुनगा, अमरूद, नींबू और जामुन के पौधों का रोपण किया।

    श्री मजीद खान की यह यात्रा दर्शाती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, नवाचार और प्रकृति के प्रति समर्पण से खेती को लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण हितैषी बनाया जा सकता है। उनकी सफलता अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और जैविक खेती के बढ़ते महत्व को भी रेखांकित करती है।

CM Madhya Pradesh
Dr Mohan Yadav
Department of Agriculture, Madhya Pradesh
Department of Horticulture, Madhya Pradesh
Panchayat, Rural Development and Social Welfare Department of Madhya Pradesh
Jansampark Madhya Pradesh
#bhopal

सफलता की कहानी सफलता की कहानी: जैविक खेती के प्रेरणास्रोत कृषक मजीद खान भोपाल जिले के इमलिया नरेन्द्र गांव के प्रगतिशील कृषक श्री मजीद खान ने अपनी मेहनत, दृढ़ संकल्प और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण से जैविक खेती के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने स्वेच्छा से जैविक खेती को अपनाया और पिछले एक दशक से अनेक चुनौतियों के बावजूद निरंतर इस पद्धति पर कार्य कर रहे हैं। उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए उन्हें उत्तम कृषक पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। जब बड़े शहरों में भी जैविक उत्पादों की स्वीकार्यता को लेकर संदेह बना हुआ था, तब श्री मजीद खान ने अपनी मेहनत और विश्वास के बल पर एक अलग पहचान बनाई। वर्ष 2019 में उन्होंने मध्यप्रदेश जैविक प्रमाणीकरण संस्था से अपने फल एवं सब्जियों का पंजीकरण कराया। आज वे भोपाल के नागरिकों को जैविक रूप से उत्पादित ताजी सब्जियां, फल और फूल उपलब्ध करा रहे हैं। श्री मजीद खान लगभग 8 एकड़ भूमि पर जैविक खेती करते हैं। प्रारंभिक वर्षों में उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना भी करना पड़ा। कई लोगों ने उन्हें रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग करने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने अपने सिद्धांतों और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से कभी समझौता नहीं किया। उन्हें प्राकृतिक खेती की प्रेरणा कृषि विभाग के पूर्व संचालक एवं प्रकृतिविद डॉ. जी.एस. कौशल से प्राप्त हुई। वर्ष 2015 से उन्होंने गाय के गोबर, गोमूत्र से निर्मित जीवामृत, वर्मी कम्पोस्ट, नाडेप खाद तथा फसल अवशेषों से तैयार जैविक खाद का उपयोग शुरू किया। धीरे-धीरे उनके खेतों में रासायनिक खाद की आवश्यकता पूरी तरह समाप्त हो गई। इसके परिणामस्वरूप मिट्टी की उर्वरता बढ़ी, फसल की गुणवत्ता में सुधार हुआ तथा मल्चिंग और कम सिंचाई के कारण जल संरक्षण भी संभव हुआ। उनकी सफलता से प्रेरित होकर आसपास के अनेक किसानों ने भी जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाना शुरू किया। वर्तमान में जिले में 1200 से अधिक किसान प्राकृतिक एवं जैविक खेती कर रहे हैं। श्री मजीद खान स्वयं भी किसानों को प्रशिक्षण और प्रेरणा देकर इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। उनका मानना है कि खेती को पूरी तरह प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से किया जाना चाहिए। खेती में वे वर्मी कम्पोस्ट, गोबर खाद, फसल अवशेष, मल्चिंग तथा छाछ आधारित जैविक घोल का उपयोग करते हैं। इन उपायों से वे कीट एवं रोगों का प्रभावी नियंत्रण करते हैं और रासायनिक कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं पड़ती। विविधतापूर्ण खेती और नवाचारों के कारण उन्होंने एक सफल एवं अनुकरणीय मॉडल विकसित किया है। लगातार दस वर्षों से रासायनिक खाद का उपयोग न करने के कारण उन्हें जैविक खेती का आधिकारिक पंजीकरण भी प्राप्त हो चुका है, जो उन्हें प्रदेश के चुनिंदा जैविक किसानों में शामिल करता है। श्री मजीद खान ने मनरेगा योजना के अंतर्गत जल संरक्षण और पशुपालन को भी अपनी खेती से जोड़ा है। उन्होंने बलराम कूप का निर्माण कर वर्षा जल संग्रहण की व्यवस्था की तथा ड्रिप सिंचाई के माध्यम से कम पानी में अधिक उत्पादन सुनिश्चित किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने मनरेगा के तहत 30×12 मीटर का पशु शेड बनवाया और उद्यानिकी विभाग से प्राप्त 500 आम, मुनगा, अमरूद, नींबू और जामुन के पौधों का रोपण किया। श्री मजीद खान की यह यात्रा दर्शाती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, नवाचार और प्रकृति के प्रति समर्पण से खेती को लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण हितैषी बनाया जा सकता है। उनकी सफलता अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और जैविक खेती के बढ़ते महत्व को भी रेखांकित करती है। CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Department of Agriculture, Madhya Pradesh Department of Horticulture, Madhya Pradesh Panchayat, Rural Development and Social Welfare Department of Madhya Pradesh Jansampark Madhya Pradesh #bhopal

Bhopal, Madhya Pradesh | Jun 23, 2026

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में राष्ट्रीय डिजाईन संस्थान, अचारपुरा, भोपाल में आयोजित 'आदिरंग शिल्पकार महोत्सव 2026' का समापन समारोह 

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Bhopal, Madhya Pradesh | Jun 23, 2026

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के मुख्य आतिथ्य में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर में आयोजित '36वां दीक्षांत समारोह'

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