नालंदा विश्वविद्यालय प्रेस विज्ञप्ति
प्रधानमंत्री: एआई युग की चुनौतियों के बीच भारतीय ज्ञान परंपरा को नई दिशा दे रही है नालंदा विश्वविद्यालय की शास्त्रार्थ पहल
नालंदा विश्वविद्यालय द्वारा प्राचीन शास्त्रार्थ परंपरा को आज के समय से जोड़ने के प्रयास को प्रधानमंत्री ने बताया महत्वपूर्ण
प्रधानमंत्री ने देशभर के अन्य विश्वविद्यालयों से भी आह्वान किया कि वे नालंदा विश्वविद्यालय की इस पहल पर विचार करें।
नई दिल्ली/राजगीर, बिहार | 28 जून, 2026: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में आज, नालंदा विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि आज जब विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), नई तकनीकों और तीव्र नवाचारों के युग से गुजर रहा है, तब यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि मानव की रचनात्मकता सुरक्षित रहे तथा समाज अपनी सांस्कृतिक और बौद्धिक जड़ों से जुड़ा रहे। उन्होंने कहा कि इन महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर खोजने का सार्थक प्रयास नालंदा विश्वविद्यालय कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हजारों वर्षों पुरानी नालंदा की ज्ञान परंपरा आज नए स्वरूप में भारत के भविष्य को दिशा प्रदान कर रही है। उन्होंने स्मरण किया कि दो वर्ष पूर्व उन्हें नालंदा विश्वविद्यालय के नवीन परिसर के लोकार्पण का अवसर प्राप्त हुआ था।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से विश्वविद्यालय द्वारा पुनर्जीवित की गई शास्त्रार्थ परंपरा की प्रशंसा करते हुए कहा कि शास्त्रार्थ केवल अपने विचार प्रस्तुत करने का माध्यम नहीं है। ये वाद, संवाद और मंथन की एक अनुशासित प्रक्रिया है। इसमें तर्क के साथ, तथ्य के साथ अपनी बात कहना बहुत ज़रूरी होता है और उसमें आपकी महारत होनी चाहिए। दूसरों के विचारों को धैर्य से सुनने और समझने की सीख भी इस शास्त्रार्थ की प्रक्रिया से मिलती है।
उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि नालंदा विश्वविद्यालय ने इस प्राचीन भारतीय बौद्धिक परंपरा को अपने दीक्षांत समारोह का एक महत्वपूर्ण अंग बनाया है। इस अवसर पर पारिस्थितिकी, सतत विकास और प्रौद्योगिकी सहित 25 विभिन्न विषयों पर गहन शास्त्रार्थ एवं विचार-विमर्श आयोजित किए गए, जिनमें 200 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। इनमें लगभग आधे से अधिक प्रतिभागी यहाॅ अध्ययनरत विभिन्न देशों से आए हुए छात्र थे, जो नालंदा विश्वविद्यालय की वैश्विक प्रतिष्ठा और उसके अंतरराष्ट्रीय स्वरूप को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "मुझे ख़ुशी है कि नालंदा विश्वविद्यालय ने इसे अपने दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनाया। इसमें भाग लेने वाले करीब आधे स्टूडेंट्स अन्य देशों से आए थे। एक प्राचीन परंपरा को आज के समय से जोड़ने का ये प्रयास बहुत सराहनीय है। मैं इसके लिए नालंदा विश्वविद्यालय को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।" प्रधानमंत्री ने देशभर के अन्य विश्वविद्यालयों से भी आह्वान किया कि वे नालंदा विश्वविद्यालय की इस पहल पर विचार करें।
नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री द्वारा व्यक्त विचारों के लिए उनका आभार व्यक्त करते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा नालंदा विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना हमारे लिए प्रेरणादायक एवं गौरव का विषय है। उनके निरंतर मार्गदर्शन और समर्थन ने नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुत्थान तथा उसके वैश्विक स्वरूप को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शास्त्रार्थ जैसी भारतीय बौद्धिक परंपराओं को अपने पाठ्यक्रम में सम्मिलित कर हम नालंदा के ज्ञान, संवाद और सह-अस्तित्व की उस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, जिसने सदियों तक समस्त एशिया को दिशा दी। हम माननीय प्रधानमंत्री के निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन के लिए उनके प्रति हृदय से कृतज्ञ हैं तथा प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपराओं को समकालीन वैश्विक विमर्शों से जोड़ने के अपने प्रयासों को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
Information & Public Relations Department, Government of Bihar
Nalanda University, Rajgir
Nalanda, Bihar | Jun 28, 2026