दुल्हन बनी शर्मिला, लेकिन ससुराल तक नहीं पहुंची सड़क! ढाई घंटे पैदल चलकर तय किया विवाह का सफर,,
जौनसार-बावर में सड़क के अभाव ने उजागर की विकास की हकीकत, नवविवाहिता ने सीएम धामी से लगाई उदावा गांव तक मोटर मार्ग बनाने की गुहार,,
चकराता। एक ओर शादी की खुशियां, दूसरी ओर दुर्गम पहाड़ी रास्ता और करीब ढाई घंटे का पैदल सफर। आधुनिक दौर में भी सड़क सुविधा से वंचित चकराता तहसील के उदावा गांव की यह तस्वीर पहाड़ में बुनियादी सुविधाओं की हकीकत बयां करती है। बुल्हाड़ गांव से विवाह कर उदावा पहुंची नवविवाहिता शर्मिला को अपने ससुराल तक पहुंचने के लिए लंबा पैदल रास्ता तय करना पड़ा। सड़क के अभाव में दुल्हन के साथ आए परिजनों और ग्रामीणों को भी पैदल सफर करना पड़ा। अब शर्मिला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उदावा गांव तक मोटर मार्ग निर्माण कराने की मांग उठाई है।
शादी की खुशियों के बीच सड़क की कसक
बुल्हाड़ गांव निवासी शर्मिला का विवाह मंगलवार को उदावा गांव निवासी अनिल के साथ संपन्न हुआ। विवाह की रस्में पूरी होने के बाद जब शर्मिला की विदाई हुई, तो ससुराल तक पहुंचने का रास्ता किसी आसान सफर से कम नहीं था। सड़क सुविधा नहीं होने के कारण नवविवाहिता को करीब ढाई घंटे पैदल चलना पड़ा। उसके साथ आए ग्रामीणों को भी इसी कठिन रास्ते से गुजरना पड़ा।
यह महज एक दुल्हन के पैदल ससुराल पहुंचने की कहानी नहीं, बल्कि उन दुश्वारियों की तस्वीर है, जिनसे सड़क संपर्क से वंचित पहाड़ी गांवों के लोग रोजाना जूझते हैं। शादी जैसे खुशी के मौके पर भी बुनियादी सुविधा की कमी ने ग्रामीणों की परेशानी उजागर कर दी।
सदियों पुरानी परंपरा, लेकिन आज भी विकास की राह पैदल,,
जौनसार-बावर अपनी विशिष्ट संस्कृति, लोक परंपराओं और रीति-रिवाजों के लिए जाना जाता है। यहां की पारंपरिक विवाह पद्धतियों में जोजोड़ा भी शामिल है, जिसमें दुल्हन अपने मायके से ससुराल जाती है। क्षेत्र की यह परंपरा सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है, लेकिन उदावा गांव का मामला एक अलग सवाल खड़ा करता है—जब सड़क ही नहीं, तो ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी कितनी कठिन होगी?
आज जब गांव-गांव तक सड़क पहुंचाने और दुर्गम क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने की बात होती है, तब उदावा गांव तक पहुंचने के लिए ढाई घंटे पैदल चलने की मजबूरी विकास के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं की जरूरत को रेखांकित करती है।
बीमारी हो या शादी, हर जरूरत पर पैदल रास्ते की मजबूरी
सड़क का अभाव केवल विवाह समारोहों तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों को दैनिक जरूरतों, आवागमन और अन्य जरूरी कार्यों के लिए भी कठिन रास्तों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। सबसे गंभीर स्थिति तब पैदा होती है, जब किसी बीमार व्यक्ति को तत्काल अस्पताल पहुंचाना हो या आपातकालीन सहायता की जरूरत पड़े। ऐसे में मोटर मार्ग की अनुपलब्धता ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
सीएम धामी से शर्मिला की गुहार—उदावा तक पहुंचे सड़क
अपने विवाह के दौरान सड़क के अभाव की परेशानी झेलने वाली शर्मिला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उदावा गांव तक मोटर मार्ग निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क बनने से गांव के लोगों को आवागमन में राहत मिलेगी और शादी-विवाह सहित जरूरी कार्यों के लिए होने वाली परेशानियां कम होंगी।
सवाल बरकरार, कब बदलेगी उदावा की तस्वीर?
सड़क संपर्क किसी भी गांव के विकास की बुनियादी जरूरत है। इससे न केवल आवागमन सुगम होता है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय विकास के अवसर भी बेहतर होते हैं। ऐसे में उदावा गांव तक मोटर मार्ग निर्माण की मांग को केवल एक परिवार की परेशानी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अब निगाहें शासन-प्रशासन पर हैं कि
नवविवाहिता शर्मिला की गुहार पर कब कार्रवाई होती है और उदावा गांव के लोगों को सड़क सुविधा के लिए कब तक इंतजार करना पड़ता है। सवाल सीधा है—क्या उदावा के ग्रामीणों को बुनियादी सुविधा के लिए यूं ही पैदल रास्ते नापने पड़ेंगे, या उनकी राह तक भी विकास की सड़क पहुंचेगी?