छोटी सी कोशिश, बड़ा बदलाव: 11 साल बाद फिर जीवंत हुआ उफल्डा का पौराणिक धारा, महापौर आरती भंडारी की पहल रंग लाई
प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण की दिशा में नगर निगम का कदम, तीन वार्डों के लोगों को मिलेगा लाभ
श्रीनगर। प्राकृतिक जलस्रोतों और पौराणिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में नगर निगम श्रीनगर ने एक और सकारात्मक पहल की है। महापौर आरती भंडारी के प्रयासों से वार्ड संख्या 39 उफल्डा में करीब 11-12 वर्षों से बंद पड़ा पौराणिक धारा अब फिर से जीवंत हो गया है। वर्षों से बंद पड़े धारे के पुनर्जीवित होने से स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है।
यह पौराणिक धारा वार्ड संख्या 37, 38 और 39 के लोगों के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण प्राकृतिक जलस्रोत रहा है। धारे के दोबारा उपयोगी होने से आसपास के लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। नगर निगम की इस पहल को क्षेत्र की पारंपरिक जलधरोहरों को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
महापौर आरती भंडारी ने कहा कि प्राकृतिक जलस्रोत केवल पानी के स्रोत नहीं, बल्कि हमारी पौराणिक विरासत और पहाड़ की पहचान हैं। इनका संरक्षण वर्तमान के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि नगर निगम क्षेत्र में ऐसे प्राकृतिक एवं पौराणिक जलस्रोतों को चिह्नित कर उनके संरक्षण की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।
धारे को पुनर्जीवित करने में वार्ड संख्या 38 के पार्षद नरेंद्र रावत और वार्ड संख्या 39 के पार्षद सुरेंद्र कुमार के विशेष प्रयास भी रहे। स्थानीय लोगों ने महापौर आरती भंडारी समेत नगर निगम और दोनों पार्षदों का आभार जताया।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वर्षों से बंद पड़े इस धारे के फिर से जीवंत होने से न केवल पानी का प्राकृतिक स्रोत बचा है, बल्कि क्षेत्र की पुरानी परंपरा और धरोहर को भी नई जिंदगी मिली है। उन्होंने कहा कि पहाड़ की जड़ें उसके प्राकृतिक जलस्रोतों से जुड़ी हैं और इनके संरक्षण के प्रयास लगातार जारी रहने चाहिए।