#सीधी जिले के #कमर्जी #थाना अंतर्गत कोलूडीह में रविवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, ग्रामीणों ने सड़क पर लगाया जाम
ग्रामीणों की मांग—#अतिक्रमण हटे तो सभी का हटे, पात्र हितग्राहियों का पहले हो निष्पक्ष निरीक्षण; कार्रवाई को लेकर प्रशासन पर उठे सवाल,
#चुरहट। चुरहट क्षेत्र अंतर्गत कोलूडीह में रविवार को वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए सड़क पर जाम लगा दिया। ग्रामीणों की मुख्य मांग रही कि यदि शासकीय एवं वन भूमि से अतिक्रमण हटाया जा रहा है तो कार्रवाई सभी अतिक्रमणकारियों पर समान रूप से की जाए।
पात्र हितग्राहियों के निरीक्षण को लेकर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि शासन की गाइडलाइन के अनुसार जिन लोगों के पात्र हितग्राही होने का दावा है, उनके मामलों का तहसीलदार एवं एसडीएम स्तर से विधिवत निरीक्षण और सत्यापन किया जाना चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई से पहले सभी पात्र दावेदारों की स्थिति का पर्याप्त निरीक्षण नहीं किया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर शासन स्तर पर पात्र लोगों को नियमानुसार पट्टा अथवा अधिकार दिए जाने की प्रक्रिया की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी की जा रही है। ऐसे में पात्र और अपात्र लोगों की पहचान स्पष्ट करने के लिए प्रशासन को मौके पर रिकॉर्ड और दस्तावेजों का परीक्षण करना चाहिए।
ग्रामीणों का आरोप—पुराने अतिक्रमण पर भी हो कार्रवाई
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग लंबे समय से जंगल अथवा शासकीय भूमि पर कब्जा किए हुए हैं। उनका कहना है कि यदि प्रशासन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रहा है तो पहले से मौजूद सभी अवैध कब्जों को भी जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए।
ग्रामीणों की मांग है कि कार्रवाई किसी व्यक्ति की जाति, पहचान या अन्य आधार पर नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड और नियमानुसार पात्रता के आधार पर की जाए।
सड़क पर उतरे ग्रामीण
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों में असंतोष बढ़ने के बाद उन्होंने सड़क पर जाम लगा दिया। ग्रामीणों की एक प्रमुख मांग रही कि “अतिक्रमण हटे तो सभी का हटे।” उनका कहना है कि कार्रवाई में समानता और पारदर्शिता होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासनिक अमले को कार्रवाई के लिए बुलाए जाने के पीछे कुछ लोगों का प्रभाव रहा है। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
ग्राउंड जीरो से बड़ा सवाल
अतिक्रमण शासकीय भूमि पर हो या वन भूमि पर, नियमानुसार कार्रवाई प्रशासन का अधिकार है। वहीं यदि किसी व्यक्ति के पास पात्रता संबंधी वैध दस्तावेज या शासन की किसी योजना के तहत अधिकार का दावा है, तो उसका परीक्षण भी नियमानुसार किया जाना आवश्यक है।
ऐसे में कोलूडीह की कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सभी संबंधित जमीनों और दावेदारों का रिकॉर्ड के आधार पर समान रूप से सत्यापन किया गया है? प्रशासन की जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
नोट: ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है। प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद उसे भी प्रमुखता से साझा किया जाएगा 👍🏻