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जब #पुलिस ने नहीं लिखी है FIR तो #कोर्ट को बनाया अपना हथियार.. हमारे खिलाफ.156(3) मे फ़र्जी FIR एक और दर्ज कराने के लिये कोर्ट तक जा पहुंचे लकड़ी चोर और षड्यंत्रकारी.. मेरा स्पष्ट आरोप है कि 3 #जनवरी_को_हुए_लकड़ी कटान प्रकरण में जिन लोगों का नाम शिकायत और प्रार्थना पत्र मे हमनें दीया था, उन्हीं लोगों द्वारा आज सच को दबाने और आवाज उठाने वाले को डराने के लिए फर्जी मुकदमों और शिकायतों का सहारा लिया जा रहा है। जिस घटना की तारीख दिखाई जा रही है, हमारे ऊपर फर्जी हरिजन एक्ट लगवाने कि #वीरू नाम के शख्स के द्वारा मैं उस दिन उस घटनास्थल पर मौजूद नहीं था यह व्यक्ति 3 जनवरी वाले प्रकरण में भी मौजूद था और यह #शरद प्रधान प्रतिनिधि के साथ हमेशा मौजूद रहता है जबकि शरद प्रधान प्रतिनिधि हमारे खिलाफ 3 जनवरी के बाद फर्जी तीन मुकदमा लिखवा चुका है जैसे हमको पता चला हमारे खिलाफ वीरू ने फर्जी एप्लीकेशन दि हैं हरिजन एक्ट लगवाने के लिये! तत्काल हमने वीरू के पिता से बात की वीरू के पिता का स्पष्ट कहना था प्रधान ही सब कुछ करवा रहा है यानी कि प्रधान प्रतिनिधि शरद सिंह यह रिकॉर्डिंग में सार्वजनिक कर रहा हूं इसको आप लोग सुन सकते हैं.. । पुलिस जांच में भी कथित मारपीट की पुष्टि नहीं हुई। इसके बावजूद लगातार मेरे खिलाफ षड्यंत्र रचने का प्रयास किया जा रहा हैं मैं हरदोई प्रशासन से मांग करता हूं कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। यदि कोई दोषी है तो उस पर कार्रवाई हो, लेकिन यदि किसी निर्दोष को परेशान करने के लिए गलत शिकायतों का सहारा लिया जा रहा है, तो उसकी भी जांच होनी चाहिए। इतिहास गवाह है कि अन्याय ज्यादा दिन नहीं टिकता। सच को दबाने की हर कोशिश आखिरकार सच के सामने हार जाती है। मेरा विश्वास कानून, संविधान और न्याय व्यवस्था पर है। डरना हमारी फितरत नहीं, सच कहना हमारी आदत है। वक्त हर सवाल का जवाब देता है, बस इंतजार कीजिए। याद रखना व्यक्ति बलवान नहीं होता है वक्त बलवान होता है और वक्त बदलेगा ब्याज सहित लौटाऊंगा।।। #शरद संदीप पहलवान हरदोई

Hardoi, Hardoi | Jun 15, 2026

MORE NEWS

बंदरहा ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार और दबंगई के गंभीर आरोप, ग्रामीणों ने उच्च स्तरीय जांच की उठाई मांग

हरदोई जनपद के विकासखंड पिहानी अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बंदरहा इन दिनों कथित भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण कार्यों और दबंगई के आरोपों को लेकर चर्चा में है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है तथा शिकायत करने वालों को भय और दबाव के माहौल का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत में लगभग तीन वर्ष पूर्व स्वच्छता अभियान के अंतर्गत एक सार्वजनिक कूड़ेदान का निर्माण कराया गया था। सरकार द्वारा गांवों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के उद्देश्य से लाखों रुपये की योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन बंदरहा गांव में बने इस कूड़ेदान की स्थिति ने विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

निर्माण कार्य पर उठे सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि जिस कूड़ेदान का निर्माण कई वर्षों तक उपयोग में रहने के उद्देश्य से कराया गया था, वह निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही धराशायी हो गया। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप हुआ होता तो इतनी जल्दी यह संरचना क्षतिग्रस्त नहीं होती।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में मानक गुणवत्ता की सामग्री का प्रयोग नहीं किया गया। ग्रामीणों के अनुसार, कार्य में घटिया स्तर की ईंट, निम्न गुणवत्ता की बालू तथा सीमेंट का अनुपात कम रखा गया, जिसके कारण निर्माण कमजोर साबित हुआ और समय से पहले ढह गया।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अभिलेखों में निर्माण कार्य पूर्ण दिखाकर पूरा भुगतान निकाल लिया गया, जबकि धरातल पर उसकी गुणवत्ता और मजबूती नहीं दिखाई दी। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

*प्रधान और प्रधान प्रतिनिधि पर आरोप*

ग्राम पंचायत की वर्तमान प्रधान श्रीमती किरण सिंह हैं। ग्रामीणों ने प्रधान प्रतिनिधि राजीव सिंह पर भी विकास कार्यों में अनियमितता और मनमानी करने के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत के अधिकांश कार्यों का संचालन प्रधान प्रतिनिधि द्वारा किया जाता है।

हालांकि समाचार लिखे जाने तक प्रधान या उनके प्रतिनिधि का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

*भय के माहौल का आरोप*

गांव के कई लोगों का कहना है कि वे खुलकर शिकायत करने से डरते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान प्रतिनिधि राजीव सिंह एक गुंडा किस्म का इंसान है जिस पर बहुत सारे मुकदमा पंजीकृत हैंके प्रभाव और दबंगई के कारण लोग सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने से बचते हैं। कुछ ग्रामीणों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि यदि कोई व्यक्ति निर्माण कार्यों में हुई कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाता है तो उसे विभिन्न प्रकार के दबाव का सामना करना पड़ता है।

अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

ग्रामीणों ने ब्लॉक और तहसील स्तर के कुछ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यदि समय-समय पर विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच और गुणवत्ता परीक्षण किया जाता, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। ग्रामीणों का मानना है कि संबंधित विभागों द्वारा प्रभावी निगरानी की कमी के कारण ही कथित रूप से घटिया निर्माण कार्यों को बढ़ावा मिला।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी हरदोई, मुख्य विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए तथा यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

पारदर्शिता की आवश्यकता

ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्य सीधे तौर पर जनता के धन से संचालित होते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की अनियमितता न केवल सरकारी धन की हानि है, बल्कि ग्रामीण विकास की अवधारणा को भी प्रभावित करती है। यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर करता है।

बंदरहा ग्राम पंचायत का यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि होना शेष है। अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाता है या नहीं।

प्रधान सम्पादक अनन्तराम कुशवाहा

बंदरहा ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार और दबंगई के गंभीर आरोप, ग्रामीणों ने उच्च स्तरीय जांच की उठाई मांग हरदोई जनपद के विकासखंड पिहानी अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बंदरहा इन दिनों कथित भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण कार्यों और दबंगई के आरोपों को लेकर चर्चा में है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है तथा शिकायत करने वालों को भय और दबाव के माहौल का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत में लगभग तीन वर्ष पूर्व स्वच्छता अभियान के अंतर्गत एक सार्वजनिक कूड़ेदान का निर्माण कराया गया था। सरकार द्वारा गांवों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के उद्देश्य से लाखों रुपये की योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन बंदरहा गांव में बने इस कूड़ेदान की स्थिति ने विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। निर्माण कार्य पर उठे सवाल ग्रामीणों का आरोप है कि जिस कूड़ेदान का निर्माण कई वर्षों तक उपयोग में रहने के उद्देश्य से कराया गया था, वह निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही धराशायी हो गया। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप हुआ होता तो इतनी जल्दी यह संरचना क्षतिग्रस्त नहीं होती। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में मानक गुणवत्ता की सामग्री का प्रयोग नहीं किया गया। ग्रामीणों के अनुसार, कार्य में घटिया स्तर की ईंट, निम्न गुणवत्ता की बालू तथा सीमेंट का अनुपात कम रखा गया, जिसके कारण निर्माण कमजोर साबित हुआ और समय से पहले ढह गया। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अभिलेखों में निर्माण कार्य पूर्ण दिखाकर पूरा भुगतान निकाल लिया गया, जबकि धरातल पर उसकी गुणवत्ता और मजबूती नहीं दिखाई दी। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। *प्रधान और प्रधान प्रतिनिधि पर आरोप* ग्राम पंचायत की वर्तमान प्रधान श्रीमती किरण सिंह हैं। ग्रामीणों ने प्रधान प्रतिनिधि राजीव सिंह पर भी विकास कार्यों में अनियमितता और मनमानी करने के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत के अधिकांश कार्यों का संचालन प्रधान प्रतिनिधि द्वारा किया जाता है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक प्रधान या उनके प्रतिनिधि का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। *भय के माहौल का आरोप* गांव के कई लोगों का कहना है कि वे खुलकर शिकायत करने से डरते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान प्रतिनिधि राजीव सिंह एक गुंडा किस्म का इंसान है जिस पर बहुत सारे मुकदमा पंजीकृत हैंके प्रभाव और दबंगई के कारण लोग सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने से बचते हैं। कुछ ग्रामीणों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि यदि कोई व्यक्ति निर्माण कार्यों में हुई कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाता है तो उसे विभिन्न प्रकार के दबाव का सामना करना पड़ता है। अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल ग्रामीणों ने ब्लॉक और तहसील स्तर के कुछ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यदि समय-समय पर विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच और गुणवत्ता परीक्षण किया जाता, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। ग्रामीणों का मानना है कि संबंधित विभागों द्वारा प्रभावी निगरानी की कमी के कारण ही कथित रूप से घटिया निर्माण कार्यों को बढ़ावा मिला। ग्रामीणों की मांग ग्रामीणों ने जिलाधिकारी हरदोई, मुख्य विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए तथा यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। पारदर्शिता की आवश्यकता ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्य सीधे तौर पर जनता के धन से संचालित होते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की अनियमितता न केवल सरकारी धन की हानि है, बल्कि ग्रामीण विकास की अवधारणा को भी प्रभावित करती है। यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर करता है। बंदरहा ग्राम पंचायत का यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि होना शेष है। अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाता है या नहीं। प्रधान सम्पादक अनन्तराम कुशवाहा

Hardoi, Hardoi | Jun 15, 2026

KGMU में बड़ा हादसा

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में पानी की टंकी की सफाई के दौरान राहुल नामक सफाई कर्मचारी की करंट लगने से मौत हो गई।घटना के बाद साथी सफाई कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। कर्मचारी ट्रॉमा सेंटर के बाहर हंगामा कर रहे हैं और मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल मौके पर पुलिस और अस्पताल प्रशासन स्थिति को संभालने में जुटा है। मौत के कारणों और घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।

KGMU में बड़ा हादसा लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में पानी की टंकी की सफाई के दौरान राहुल नामक सफाई कर्मचारी की करंट लगने से मौत हो गई।घटना के बाद साथी सफाई कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। कर्मचारी ट्रॉमा सेंटर के बाहर हंगामा कर रहे हैं और मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। फिलहाल मौके पर पुलिस और अस्पताल प्रशासन स्थिति को संभालने में जुटा है। मौत के कारणों और घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।

Hardoi, Hardoi | Jun 14, 2026

गौ संरक्षण के दावों पर सवाल, प्रताप नगर चौराहे पर आवारा गौवंश बने दुर्घटना का कारण
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#हरदोई: गौ संरक्षण और गौवंशों की सुरक्षा को लेकर सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जब गौवंश सड़कों और चौराहों पर खुलेआम घूमते दिखाई देते हैं तो ये दावे सवालों के घेरे में आ जाते हैं। जनपद हरदोई के प्रताप नगर चौराहे पर स्थित गोल चक्कर के आसपास प्रतिदिन दर्जनों गौवंशों का जमावड़ा देखने को मिलता है।
प्रताप नगर चौराहा हरदोई, सीतापुर, माधवगंज एवं संडीला मार्गों को जोड़ने वाला प्रमुख यातायात केंद्र है, जहां दिनभर भारी वाहनों और राहगीरों का आवागमन बना रहता है। इसके बावजूद गौवंश चौराहे के आसपास खड़े और बैठे रहते हैं, जिससे वाहन चालकों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से बड़े वाहनों को मोड़ने और निकालने में परेशानी होती है, वहीं दुर्घटनाओं की आशंका भी लगातार बनी रहती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार गौवंश वाहन की चपेट में आकर चोटिल हो जाते हैं, जबकि मोटरसाइकिल सवार भी उन्हें बचाने के प्रयास में गिरकर घायल हो चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि चौराहे से लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में कई ग्राम पंचायतों के गौ आश्रय स्थल मौजूद हैं, फिर भी बड़ी संख्या में गौवंश सड़कों पर घूमते दिखाई देते हैं।
प्रताप नगर चौराहा निवासी एवं पेट्रोल पंप संचालक अमित शुक्ला ने बताया कि हाल ही में उनकी कार से एक गौवंश की हल्की टक्कर हो गई थी, जिससे वाहन को काफी नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि वह स्वयं बाल-बाल बच गए, लेकिन ऐसी घटनाएं कभी भी बड़े हादसे का रूप ले सकती हैं।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा गौवंशों को सुरक्षित रूप से गौ आश्रय स्थलों तक पहुंचाया जाए, ताकि गौवंशों की सुरक्षा के साथ-साथ राहगीरों और वाहन चालकों को भी दुर्घटनाओं से बचाया जा सके।
#रिपोर्ट: पुनीत मिश्रा/बेनीगंज

गौ संरक्षण के दावों पर सवाल, प्रताप नगर चौराहे पर आवारा गौवंश बने दुर्घटना का कारण . #हरदोई: गौ संरक्षण और गौवंशों की सुरक्षा को लेकर सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जब गौवंश सड़कों और चौराहों पर खुलेआम घूमते दिखाई देते हैं तो ये दावे सवालों के घेरे में आ जाते हैं। जनपद हरदोई के प्रताप नगर चौराहे पर स्थित गोल चक्कर के आसपास प्रतिदिन दर्जनों गौवंशों का जमावड़ा देखने को मिलता है। प्रताप नगर चौराहा हरदोई, सीतापुर, माधवगंज एवं संडीला मार्गों को जोड़ने वाला प्रमुख यातायात केंद्र है, जहां दिनभर भारी वाहनों और राहगीरों का आवागमन बना रहता है। इसके बावजूद गौवंश चौराहे के आसपास खड़े और बैठे रहते हैं, जिससे वाहन चालकों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से बड़े वाहनों को मोड़ने और निकालने में परेशानी होती है, वहीं दुर्घटनाओं की आशंका भी लगातार बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार गौवंश वाहन की चपेट में आकर चोटिल हो जाते हैं, जबकि मोटरसाइकिल सवार भी उन्हें बचाने के प्रयास में गिरकर घायल हो चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि चौराहे से लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में कई ग्राम पंचायतों के गौ आश्रय स्थल मौजूद हैं, फिर भी बड़ी संख्या में गौवंश सड़कों पर घूमते दिखाई देते हैं। प्रताप नगर चौराहा निवासी एवं पेट्रोल पंप संचालक अमित शुक्ला ने बताया कि हाल ही में उनकी कार से एक गौवंश की हल्की टक्कर हो गई थी, जिससे वाहन को काफी नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि वह स्वयं बाल-बाल बच गए, लेकिन ऐसी घटनाएं कभी भी बड़े हादसे का रूप ले सकती हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा गौवंशों को सुरक्षित रूप से गौ आश्रय स्थलों तक पहुंचाया जाए, ताकि गौवंशों की सुरक्षा के साथ-साथ राहगीरों और वाहन चालकों को भी दुर्घटनाओं से बचाया जा सके। #रिपोर्ट: पुनीत मिश्रा/बेनीगंज

Hardoi, Hardoi | Jun 14, 2026

“संघर्ष की कहानी”

ज़िंदगी में जो लोग कठिनाइयों से लड़ना सीख जाते हैं, वही इतिहास रचते हैं।
संघर्ष इंसान को मजबूत बनाता है, ठोकरें उसे अनुभव देती हैं और मुश्किलें उसे आगे बढ़ने की ताकत देती हैं।
हर बड़ी सफलता के पीछे एक लंबी संघर्ष की कहानी छिपी होती है।

गिरकर उठना, हारकर फिर कोशिश करना और हालातों से लड़ते रहना ही असली जीत की पहचान है।
याद रखिए —

“संघर्ष जितना बड़ा होगा,
सफलता उतनी ही शानदार होगी।”

या एक शायरी:

“राह कठिन थी, सफर अकेला था,
हर मोड़ पर दर्द का मेला था।
फिर भी चलते रहे हौसलों के दम पर,
क्योंकि संघर्ष ही जीत का पहला क़दम था।”

#UPPolitics 

#AzadSamajParty 

#citynews24live 

#ChandrashekharAzad 

#ASP_K_Mission2027 

#ReleaseChandraShekhaAzad

“संघर्ष की कहानी” ज़िंदगी में जो लोग कठिनाइयों से लड़ना सीख जाते हैं, वही इतिहास रचते हैं। संघर्ष इंसान को मजबूत बनाता है, ठोकरें उसे अनुभव देती हैं और मुश्किलें उसे आगे बढ़ने की ताकत देती हैं। हर बड़ी सफलता के पीछे एक लंबी संघर्ष की कहानी छिपी होती है। गिरकर उठना, हारकर फिर कोशिश करना और हालातों से लड़ते रहना ही असली जीत की पहचान है। याद रखिए — “संघर्ष जितना बड़ा होगा, सफलता उतनी ही शानदार होगी।” या एक शायरी: “राह कठिन थी, सफर अकेला था, हर मोड़ पर दर्द का मेला था। फिर भी चलते रहे हौसलों के दम पर, क्योंकि संघर्ष ही जीत का पहला क़दम था।” #UPPolitics #AzadSamajParty #citynews24live #ChandrashekharAzad #ASP_K_Mission2027 #ReleaseChandraShekhaAzad

Hardoi, Hardoi | Jun 14, 2026