🔴 मधेपुरा। फरक्का जल संधि को बिहार के हितों के प्रतिकूल बताते हुए जनता दल (यू) ने इसके नवीनीकरण का विरोध किया है। शुक्रवार को जिला मुख्यालय स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में जिलाध्यक्ष मंजू कुमारी उर्फ गुड्डी देवी ने कहा कि बिहार के हक और बिहारवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए फरक्का जल संधि की वर्तमान व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार की जल व्यवस्था तय करते समय बिहार की दीर्घकालिक जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि को लेकर बिहार लंबे समय से अपनी चिंताएं जताता रहा है। पार्टी का मानना है कि इस संधि के कारण बिहार के जल प्रबंधन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। एक तरफ राज्य को हर वर्ष बाढ़ की समस्या से जूझना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर शुष्क मौसम में कई क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता चुनौती बन जाती है। ऐसे में बिहार की जल आवश्यकताओं को नजरअंदाज करना राज्य के हित में नहीं है।
उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि बिहार की कृषि, अर्थव्यवस्था और लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ी जीवनरेखा है। गंगा के जल प्रवाह, गाद और जल प्रबंधन का सीधा प्रभाव राज्य के किसानों, सिंचाई व्यवस्था, पेयजल और बाढ़ की स्थिति पर पड़ता है। इसलिए गंगा से जुड़े किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में बिहार के हितों को प्रमुखता मिलनी चाहिए।
प्रेस वार्ता में बताया गया कि जदयू की ओर से फरक्का जल संधि को लेकर लोगों के बीच जनजागरूकता पैदा करने के लिए ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम चलाया जा रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों में लोगों से संवाद किया जा रहा है।
इन जिलों में बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार शामिल हैं। अभियान की शुरुआत पांच सितंबर को बक्सर से की गई है, जबकि इसका समापन कटिहार में होगा। जदयू नेताओं के अनुसार, बिहार में गंगा बक्सर से प्रवेश करती है और कटिहार से आगे निकलती है। इसी कारण गंगा के पूरे बिहार क्षेत्र में इस विषय को लेकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।
बिहार की जल जरूरतों को प्राथमिकता देने की मांग
मंजू कुमारी ने कहा कि बिहार की आबादी, कृषि क्षेत्र और औद्योगिक जरूरतों को देखते हुए आने वाले वर्षों में पानी की मांग और बढ़ेगी। ऐसी स्थिति में राज्य के जल संसाधनों की सुरक्षा और उचित प्रबंधन बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि बिहार को एक ओर बाढ़ से होने वाली तबाही झेलनी पड़ती है तो दूसरी ओर गर्मी और शुष्क मौसम में कई इलाकों में पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। इस दोहरी समस्या के स्थायी समाधान के लिए गंगा के जल प्रवाह और जल प्रबंधन पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि किसानों की सिंचाई, लोगों के पेयजल, उद्योगों की पानी की जरूरत और आम लोगों की आजीविका सीधे तौर पर जल संसाधनों से जुड़ी हुई है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले किसी भी जल समझौते में इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
जदयू नेताओं ने कहा कि फरक्का जल संधि का मुद्दा किसी राजनीतिक लाभ या दलगत राजनीति तक सीमित नहीं है। यह बिहार के अधिकार और जनहित से जुड़ा विषय है। पार्टी का उद्देश्य लोगों को इस विषय की जानकारी देना और बिहार की आवाज को केंद्र सरकार तक मजबूती से पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि गंगा और बिहार के जल संसाधनों से जुड़े सवालों पर व्यापक राष्ट्रीय चर्चा होनी चाहिए। पार्टी चाहती है कि फरक्का जल संधि की समीक्षा हो और भविष्य की किसी भी व्यवस्था में बिहार की वर्तमान एवं आगामी जल जरूरतों का स्पष्ट ध्यान रखा जाए।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि जदयू इस अभियान के माध्यम से गांव-गांव और आम लोगों तक यह संदेश पहुंचाना चाहती है कि बिहार के जल संसाधनों से जुड़े विषय केवल सरकार या राजनीतिक दलों के नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के हित से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि बिहार के हक की आवाज को मजबूती से उठाना समय की मांग है।
प्रेस वार्ता में व्यावसायिक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष अशोक चौधरी, जिला प्रवक्ता नरेश पासवान, नगर अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार पासवान, जिला उपाध्यक्ष आशीष कुमार सिंह, डॉ. धर्मेंद्र कुमार राम, युगल पटेल सहित पार्टी के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
📹 Murari Singh मधेपुरा टाइम्स Madhepura Times
Ghailarh, Madhepura | Sep 11, 2026