🚨 आधुनिकता की चकाचौंध में गुम हो रहे मिट्टी के दीये, कुम्हारों की रोजी-रोटी पर संकट!
🪔 दूसरों के घर रोशन करने वाले कुम्हारों की अपनी दीपावली पड़ सकती है फीकी!
महराजगंज। दीपावली पर बाजारों में चाइनीज झालरों, रंग-बिरंगी लाइटों और इलेक्ट्रॉनिक सजावटी सामानों की चमक बढ़ रही है, लेकिन पारंपरिक मिट्टी के दीये बनाने वाले कुम्हारों की मेहनत को अपेक्षित बाजार नहीं मिल पा रहा है।
सदर ब्लॉक के पिपरा रसूलपुर, चेहरी, सिसवा अमहवां, जंगल फरजंद अली और अहमदपुर समेत कई गांवों में कुम्हार दिन-रात मेहनत कर मिट्टी के दीये तैयार कर रहे हैं। मिट्टी गूंथने से लेकर दीये बनाने, पकाने और गांव-गांव जाकर बेचने तक वे पूरी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं हो रही है।
क्षेत्र के रामचरन, राजाराम, विजय, सुनील, गंगाराम, अखिलेश, श्यामसुंदर, अवधेश, संतराम पाल और गिरिजेश सहित अन्य कुम्हारों ने लोगों से अपील की है कि इस दीपावली पर अधिक से अधिक मिट्टी के दीये खरीदें।
उनका कहना है कि सरकार लोकल फॉर वोकल को बढ़ावा दे रही है, लेकिन यदि लोग स्वदेशी और पारंपरिक उत्पादों को नहीं अपनाएंगे तो कुम्हार परिवारों की आजीविका पर संकट बना रहेगा।
🙏 इस दीपावली एक संकल्प जरूर लें—अपने घर को मिट्टी के दीयों से रोशन करें और किसी कुम्हार के घर भी खुशियों का दीप जलाएं।
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Maharajganj, Maharajganj | Nov 5, 2026