मयाड़ घाटी में बाढ़ का कहर: करपट गांव के 150 लोग घर छोड़ने को मजबूर, तीन लोग फंसे
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। मयाड़ घाटी के करपट गांव में मंगलवार दोपहर करीब 3:30 बजे करपट नाले में अचानक आई तेज बाढ़ ने ग्रामीणों में दहशत पैदा कर दी। बाढ़ के कारण नाले का बहाव बाधित होने से क्षेत्र में झील जैसी स्थिति बन गई है। करपट गांव को जोड़ने वाला वाहनों की आवाजाही का पुल पूरी तरह पानी में डूब गया है, जिससे गांव का संपर्क प्रभावित हो गया है।
ग्रामीणों के अनुसार, बाढ़ की स्थिति को देखते हुए 150 से अधिक ग्रामीण अपने घर छोड़कर मयाड़ नाले के दूसरी ओर बनाए गए राहत शिविरों और टेंटों में शरण लेने को मजबूर हुए हैं। हालांकि, गांव में अभी भी दो प्रवासी मजदूर और एक महिला फंसे हुए बताए जा रहे हैं।
32 परिवारों के मवेशी गांव में फंसे
पुल के पानी में डूब जाने से करपट गांव के 32 परिवारों के मवेशी भी गांव की तरफ फंसे हुए हैं। मवेशियों की देखभाल के लिए कुछ ग्रामीणों को नाले के दूसरी ओर जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन के पहुंचने से पहले ही पुराने रस्सी वाले पुल की मरम्मत कर अपने स्तर पर आवागमन का रास्ता तैयार किया।
19 घंटे बाद प्रशासन के पहुंचने पर ग्रामीणों में नाराजगी
ग्रामीणों में प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर भी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विधायक अनुराधा राणा की ओर से अधिकारियों को निर्देश दिए जाने और कथित फटकार के करीब 19 घंटे बाद प्रशासनिक अधिकारी करपट गांव पहुंचे।
प्रशासन की ओर से राहत सामग्री के रूप में चावल, आटा और प्याज की कुछ बोरियां उपलब्ध करवाई गईं। ग्रामीणों ने हालांकि शिकायत की कि राहत सामग्री में खाना पकाने के तेल और गैस जैसी आवश्यक वस्तुएं शामिल नहीं थीं।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन के पहुंचने से पहले ही उन्होंने पुराने रस्सी वाले पुल को अपने स्तर पर ठीक कर लिया था। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से मौके पर केवल रस्सी खींचने की कार्रवाई की गई और तस्वीरें ली गईं, जबकि वास्तविक समस्या अभी भी जस की तस बनी हुई है।
झील जैसी स्थिति से बढ़ी चिंता
ग्रामीणों ने नायब तहसीलदार विनय राशपा, जो वर्तमान में सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट का कार्यभार भी देख रहे हैं, से मांग की है कि मयाड़ नाले के जिस हिस्से में पानी का बहाव रुक गया है, उसे जल्द से जल्द खोला जाए। ग्रामीणों का कहना है कि पानी का स्तर लगातार चिंता का विषय बना हुआ है और समय रहते जल निकासी नहीं की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
मशीनें भेजी गईं, जल्द खोला जाएगा बहाव
पीडब्ल्यूडी चिनाब डिवीजन उदयपुर के कार्यकारी अभियंता अश्वनी गुलेरिया ने बताया कि मयाड़ नाले का बहाव जिस स्थान पर रुका है, उस जगह को खोलने के लिए मशीनें भेज दी गई हैं। विभाग की ओर से जल प्रवाह को सामान्य करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
विधायक ने दिए तत्काल मदद के निर्देश
लाहौल-स्पीति की विधायक अनुराधा राणा ने कहा कि उन्होंने स्थानीय प्रशासन को करपट गांव के लोगों से तुरंत मिलने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों को उनकी जरूरत के अनुसार हरसंभव सहायता उपलब्ध करवाई जानी चाहिए।
विधायक ने यह भी कहा कि आपदा की इस घड़ी में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
फिलहाल करपट गांव में बाढ़ के कारण पैदा हुई झील जैसी स्थिति और पुल के डूबने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। सबसे बड़ी चुनौती गांव में फंसे लोगों और मवेशियों की सुरक्षा के साथ-साथ पानी के बहाव को जल्द सामान्य करना है। ग्रामीणों ने प्रशासन से राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने और प्रभावित परिवारों को पर्याप्त आवश्यक सामग्री उपलब्ध करवाने की मांग की है।
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Saach, Chamba | Aug 19, 2026