प्रेस विज्ञप्ति
नालन्दा।
......................
आज दिनांक 3 जुलाई 2026 को श्रीमती उदिता सिंह , जिला पदाधिकारी, नालन्दा द्वारा भ्रमण कार्यक्रम के दौरान एकंगरसराय प्रखंड के ग्राम पंचायती राज तेलहाड़ा के तेलहाड़ा ग्राम में खुदाई में निकले पहली सदी के तिलाधक विश्वविद्यालय को देखने पहुंची।
नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 453 ई०वी० में गुप्त शासक कुमार गुप्त ने की थी। जबकि तिलाधक विश्वविद्यालय पहली सदी का था।
तेल्हारा भ्रमण के दरम्यान मंचीय कार्यक्रम में तत्कालीन मुखिया श्री अवधेश गुप्ता की मांग पर माननीय मुख्यमंत्री विकास पुरुष श्री नीतीश कुमार जी ने 26 दिसंबर 2009 को तेल्हारा स्थित टीले पर चढ़कर अपने हाथों से गाता चलाकर खुदाई के काम का शुभारंभ किया था। खुदाई में सबसे पहले पालकालीन मूर्तियां निकली । बीच में गुप्तकालीन पुरातात्विक अवशेष निकले । जब नीचे गए तो कुषाणकालीन मूर्तियां और अवशेष मिले। कार्बन डेटिंग में ईसा पूर्व का इसे बताया गया है। खुदाई में सैकड़ो मॉनास्ट्री सील, अभिलेख , भगवान बुद्ध अवलोकेतेश्वर, चामुंडा, हरितिका, मां तारा अपराजिता आदि टेराकोटा की मूर्तियों एवं बर्तन मिली। प्रसिद्ध चीनी यात्री हेनसांग 630 ईo में जब वह चीन से भारत आया था तो सर्वप्रथम वह नालंदा विश्वविद्यालय से पहले तिलाधक विश्वविद्यालय आया था। उसने तिलाधक संघाराम, महाविहार, सह विश्वविद्यालय का बहुत ही सुंदर चित्रण अपनी भारत यात्रा वृतांत में किया है। भगवान बुद्ध तेल्हारा में जब चौमासा बिताने आए थे तब बीमार पड़ गए थे तब तेल्हारा के तत्कालीन अध्यक्ष विष्णु तेली ने सफल इलाज करवाया था। पहले सदी का तिलाधक विश्वविद्यालय का वर्णन जेनिस लिबासको, मेजर कीटो ,बुकानन, हैमिल्टन ब्लॉक, बेगलर , सैमुअल बिल,पुरातत्व के पितामह लॉर्ड कनिंघम, आदि पाश्चात्य के पुरातत्व वेताओं ने किया है। नालंदा विश्वविद्यालय में ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई होती थी । उसके ऊपर PHD करने तिलाधक विश्वविद्यालय आते थे। यहां 1000 विद्यार्थी महायान की पढ़ाई करते थे जो विभिन्न देशों के थे। 1198 ई०सी० मे इख्तियारूद्दीन मोहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने तिलाधक विश्वविद्यालय में पढ़ रहे बौद्धों का कत्लेआम करने के बाद लूट कर आग लगा दिया, इस तरह विश्वविद्यालय नष्ट हो गया।मालूम हो कि यहां शब्द विद्या,शिल्प विद्या, तर्क शास्त्र, चिकित्सा शास्त्र,सांख्यिकी,बौद्ध साहित्य और दर्शन आदि विषयों की पढ़ाई होती थी। ब्रिटिश काल के समय यहां की मूर्तियों को कोलकाता संग्रहालय लंदन संग्रहालय एवं ज्यूरिक म्यूजियम स्विट्जरलैंड में रखी गई है। तेल्हारा उत्खनन परिसर में अवलोकेटटेश्वर की मूर्ति जो रेड सैंड स्टोन की थी वह निकली जिसे बिहार म्यूजियम, पटना में रखा गया है जिसे देखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आए और नीतीश कुमार के साथ जाकर उन मूर्तियों को देखा।
खुदाई में निकले पहले सदी के तिलाधक विश्वविद्यालय का कन्वर्जन किया जाना बाकी है । म्यूजियम के अंदर का कंपार्टमेंट बनाना होगा ताकि निकले अवशेष को प्रदर्शित किया जा सके । तेलहाड़ा को बुद्धिस्ट सर्किट से जोड़ना होगा ताकि देश और विदेशों से सैलानी यहां आ सके।
जिलाधिकारी महोदय ने संबंधित पदाधिकारी को निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि पुरातत्व विभाग के बेशकीमती अवशेष का बेहतरीन डॉक्यूमेंट्री तैयार करना सुनिश्चित करेंगे ।
इस अवसर पर प्रभारी उप विकास आयुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी सहित अन्य पदाधिकारी गण आदि उपस्थित थे ।
Samrat Choudhary
CMO Bihar
Nalanda University, Rajgir
Information & Public Relations Department, Government of Bihar
Panchayati Raj Department, Government of Bihar
15 views | Nalanda, Bihar | Jul 4, 2026