जगाधरी, हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया जिसके दौरान परम पूजनीय दिव्य गुरु आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री सिद्धेश्वरी भारती जी ने मानवीय मन की भावनाओं का महत्व बताते हुए कहा कि प्रकृति ने मनुष्य को मनन करने की शक्ति दी है। यह मनन शक्ति यदि सकारात्मक विषयों से जुड़े तो सृजनात्मक सिद्ध होती है परन्तु नकारात्मक विषयों से एकत्व स्थापित कर ले तो कदाचित यह सम्पूर्ण मानव समाज के लिए विध्वंसक और भयावह सिद्ध हो सकती है। रस, रूप, गंध, शब्द, स्पर्श के द्वारा हम कुछ भी ग्रहण करते हैं तो हमारे भीतर मनन की प्रक्रिया चलती है, जो उस ग्रहण किए हुए विषय को कई गुणा अधिक प्रभावशाली एवं क्रियान्वित करने के लिए तैयार करती है। आगे साध्वी जी ने विस्तार पूर्वक समझाते हुए कहा कि हमारा मन भावनाओं को मनन के द्वारा विस्तृत करता है और कदाचित हमें सदैव इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि हम अपनी इंद्रियों से द्वारा क्या ग्रहण कर रहे हैं क्योंकि जो हम जाने अनजाने ग्रहण करते हैं वो हमारी मनन शक्ति के द्वारा इतना प्रभावशाली एवं विस्तृत हो जाता है जिसका सीधा प्रभाव हमारे आचरण, व्यक्तित्व एवं व्यवहार पर पड़ता है और यह प्रभाव केवल व्यक्तिगत नहीं अपितु पारिवारिक सामाजिक एवं वैश्विक स्तर पर भी हमें प्रभावित कर सकता है। परम पूजनीय आशुतोष महाराज जी सदैव कहते हैं कि ब्रह्मज्ञान में वह शक्ति है जो हमारे भीतर गहरे बैठे नकारात्मक विचारों को सकारात्मक रूप में परिवर्तित कर सकती है क्योंकि हमारे संत महापुरुष ब्रह्म ज्ञान के द्वारा प्रत्येक मानव को अपने मन पर कार्य करना सिखाते हैं और इसमें उनका कोई निजी स्वार्थ नहीं अपितु सम्पूर्ण मानव जाति के कल्याण और विश्व शांति की भावना होती है। वे स्वयं ब्रह्म का साक्षात्कार करने के पश्चात सम्पूर्ण मानव समाज का आत्म साक्षात्कार के लिए आवाहन् करते हैं। ब्रह्मज्ञान की निरंतर ध्यान साधना एक ऐसा यंत्र है जो हमें चारों ओर बिखरी नकारात्मकता में से भी सकारात्मक तरंगों को ग्रहण करने के लिए सामर्थ्य देती है।जब तक आत्म चक्षु नहीं खुले और मन जागृत नहीं हुआ तब तक मनुष्य नकारात्मक और सकारात्मक में भेद ही नहीं कर पाता। यदि भेद कर भी ले तो वह कुछ पारिवारिक, सामाजिक अथवा निजी कारण वश सकारात्मक का चुनाव नहीं कर पाता और आजीवन उस नकारात्मकता को ढोते हुए ही संसार से विदा हो जाता है। ब्रह्म ज्ञान हमें वह आत्मबल प्रदान करता है जिससे हम सकारात्मकता को ग्रहण करके अपने साथ औरों का भी कल्याण कर सकते हैं। अतः जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने हेतु सर्वप्रथम विचारों में सकारात्मकता लाना अति आवश्यक है। यह अत्यधिक महत्वपूर्ण है कि अधिक समय तक हम किन विषयों का चिंतन अथवा संग करते हैं क्योंकि जैसा हमारा मनन होगा वैसा ही जीवन होगा। इसलिए हम जीवन रहते सकारात्मक दिशा की और कदम बढ़ाये और इस दुर्लभ मानव जीवन को सार्थक करें। विश्व शांति की प्रार्थना एवं सामूहिक साधना के साथ सत्संग कार्यक्रम का समापन किया गया।
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Ambala, Ambala | Jun 14, 2026