बेनीगंज में सड़क हादसे के बाद एफआईआर पर बवाल: "आरोपी को बचाने के लिए पुलिस ने खेला खेल", परिजनों का गंभीर आरोप
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#हरदोई: live बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र में सड़क हादसे में एक अधेड़ की मौत के बाद अब एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मृतक के परिजनों ने बेनीगंज पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि नामजद आरोपी को बचाने के उद्देश्य से पुलिस ने उनकी तहरीर लेने से पहले ही अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया। मामले को लेकर परिजनों में भारी आक्रोश है और उन्होंने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
घटना 25 जुलाई 2026 की शाम लगभग 5:30 बजे की है। जानकारी के अनुसार कोतवाली क्षेत्र के कोथावां अंतर्गत इकरी मजरा नगवा निवासी 55 वर्षीय विश्वनाथ पुत्र शिवराम साइकिल से कोथावां बाजार से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान संडीला की ओर से आ रही एक तेज रफ्तार मोटरसाइकिल (चेसिस नंबर MBLHAW331THE42609) ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में गंभीर रूप से घायल विश्वनाथ को राहगीरों और पुलिस की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
मृतक की पत्नी विश्व मोहिनी और बड़े भाई जयपाल का आरोप है कि जिस मोटरसाइकिल चालक ने विश्वनाथ को टक्कर मारी थी, उसे पुलिस ने घटनास्थल से ही पकड़ लिया था। उनका कहना है कि आरोपी गोल्डी पुत्र गुड्डू खान, निवासी कल्याणमल है, जिसे कुछ देर कोतवाली में बैठाने के बाद बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया गया।
परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार के बाद 26 जुलाई की रात करीब 8 बजे वे नामजद आरोपी के खिलाफ लिखित तहरीर लेकर कोतवाली पहुंचे। वहां पुलिस ने यह कहकर तहरीर दर्ज नहीं की कि "प्रिंटर खराब है, कल रिपोर्ट दर्ज कर एफआईआर की प्रति दे दी जाएगी।"
लेकिन अगले दिन 27 जुलाई की सुबह जब मृतक का 20 वर्षीय पुत्र प्रशांत कुमार एफआईआर की प्रति लेने कोतवाली पहुंचा तो पुलिस की बात सुनकर परिवार हैरान रह गया। पुलिस ने बताया कि मुकदमा तो 26 जुलाई को ही दर्ज हो चुका है। जब एफआईआर की प्रति देखी गई तो उसमें आरोपी को अज्ञात दर्शाया गया था।
यही नहीं, परिजनों का आरोप है कि जिस तहरीर में स्पष्ट रूप से आरोपी का नाम और पता लिखा गया था तथा जो मृतक के पुत्र प्रशांत कुमार के नाम से दी जानी थी, उसकी जगह किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
मृतक पक्ष का आरोप है कि इकरी गांव निवासी हेमनाथ पुत्र रामप्रसाद ने पुलिस की मिलीभगत से मृतक की पत्नी विश्व मोहिनी के नाम से लिखित तहरीर का उपयोग कर उनके कोतवाली पहुंचने से पहले ही अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी, ताकि नामजद आरोपी को बचाया जा सके।
परिजनों ने यह भी सवाल उठाया कि जब उन्होंने रात करीब 8 बजे तहरीर दी थी, तो फिर एफआईआर उसी दिन दोपहर लगभग 3 बजे कैसे दर्ज हो गई? उनका कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम कई गंभीर सवाल खड़े करता है और पुलिस की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है।
आरोप है कि बाद में पुलिस ने सफाई देते हुए कहा कि मुकदमा दर्ज हो चुका है और जांच के दौरान आरोपी का नाम एफआईआर में सम्मिलित कर दिया जाएगा। लेकिन इस जवाब से मृतक परिवार संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि यदि शुरू से ही नामजद आरोपी का उल्लेख कर मुकदमा दर्ज किया जाता तो मामले की दिशा ही अलग होती।
मृतक की पत्नी विश्व मोहिनी ने उच्च पुलिस अधिकारियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, वास्तविक आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने तथा एफआईआर दर्ज करने में हुई कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है।
इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी के बेनीगंज मंडल अध्यक्ष रोहित वैश्य ने भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और उसे दूसरा मोड़ देने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो पीड़ित परिवार को न्याय मिलना मुश्किल हो जाएगा।
फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उच्चाधिकारी पीड़ित परिवार के आरोपों की किस प्रकार जांच कराते हैं और क्या सड़क हादसे के साथ-साथ एफआईआर दर्ज करने में हुई कथित अनियमितताओं पर भी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होती है।
#रिपोर्ट: पुनीत मिश्रा/बेनीगंज
Hardoi, Hardoi | Jul 27, 2026