राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल के 'हिम रंग षष्ठी' ग्रीष्मकालीन नाट्योत्सव का शिमला में 'अक्स तमाशा' के प्रभावशाली मंचन के साथ हुआ भव्य समापन*
*अक्स तमाशा ने लोककथा, रहस्य और मानवीय संवेदनाओं को सशक्त रंगभाषा में किया साकार*
*शिमला : राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल द्वारा आयोजित 'हिम रंग षष्ठी' ग्रीष्मकालीन नाट्योत्सव 2026 का भव्य समापन आज ऐतिहासिक गेयटी थिएटर, शिमला में रंगमंडल की बहुचर्चित प्रस्तुति 'अक्स तमाशा' के प्रभावशाली मंचन के साथ हुआ। दर्शकों से खचाखच भरे सभागार में प्रस्तुत इस नाटक को उत्साहपूर्ण सराहना मिली और इसके साथ ही कुल्लू, धर्मशाला तथा शिमला में आयोजित इस विशेष रंगयात्रा का सफल समापन हुआ।
प्रख्यात रंगनिर्देशक भानू भारती द्वारा निर्देशित 'अक्स तमाशा', ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित नाटककार चंद्रशेखर बी. कम्बार के प्रसिद्ध कन्नड़ नाटक 'सीरी सिम्पिगे' का हिंदी रूपांतरण है, जिसका अनुवाद वरिष्ठ रंगकर्मी प्रो. राम गोपाल बजाज ने किया है। लोककथा, रहस्य और मानवीय संवेदनाओं के ताने-बाने से बुनी गई यह बहुचर्चित रंगकृति एक राजकुमार और साँप से जुड़े रहस्यमय प्रसंगों के माध्यम से मनुष्य के भीतर छिपे भय, लालच, असुरक्षा, छल और मानसिक द्वंद्व की गहन पड़ताल करती है।
राजमहल की पृष्ठभूमि में विकसित होती कथा धीरे-धीरे अनेक रहस्यों से पर्दा उठाती है। राजकुमार अपने जीवन की परिस्थितियों, संबंधों और अनजाने भय से जूझता दिखाई देता है, जबकि विभिन्न पात्रों के संवाद और टकराव सत्ता, विश्वास, प्रेम, सामाजिक मर्यादाओं और मानवीय संबंधों की जटिल परतों को उद्घाटित करते हैं। नाटक की विशेषता यह है कि हास्य और व्यंग्य से भरपूर दृश्य अचानक रहस्य और तनाव में परिवर्तित हो जाते हैं, जिससे दर्शक आरंभ से अंत तक कथा के साथ गहराई से जुड़े रहते हैं।
इस प्रस्तुति में लोकनाट्य शैली, संगीत, प्रतीकात्मक रंग-संरचना और प्रभावशाली अभिनय का सशक्त समन्वय देखने को मिलता है। नाटक में साँप केवल एक जीव या भय का प्रतीक नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर व्याप्त अंधकार, भ्रम और अनिश्चितता का रूपक बनकर उभरता है। लोक तत्वों और समकालीन रंगभाषा के माध्यम से यह प्रस्तुति मनोरंजन के साथ-साथ दर्शकों को मानवीय स्वभाव, सामाजिक संरचनाओं, विश्वास और भय की मनोवैज्ञानिक प्रकृति पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित करती है।
नाटक मंचन समाप्त होने के उपरांत राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमण्डल के सभी रंगकर्मियों को हिमाचली टोपी और मफलर भेंट कर सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल द्वारा 18 से 27 जून 2026 तक हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, धर्मशाला और शिमला में आयोजित इस विशेष ग्रीष्मकालीन नाट्योत्सव के अंतर्गत 'माई री मैं का से कहूँ', 'बाबूजी', 'ताजमहल का टेंडर' तथा 'अक्स तमाशा' जैसी चर्चित प्रस्तुतियाँ मंचित की गईं। तीनों नगरों में रंगप्रेमियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने इस रंगोत्सव को उल्लेखनीय सफलता प्रदान की तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल के प्रति दर्शकों के स्नेह और विश्वास को और अधिक सुदृढ़ किया।
शिमला में आयोजित इस अंतिम प्रस्तुति के साथ राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल का 'हिम रंग षष्ठी' ग्रीष्मकालीन नाट्योत्सव 2026 सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कुल्लू, धर्मशाला और शिमला में आयोजित सभी प्रस्तुतियों को दर्शकों का भरपूर स्नेह, उत्साह और सराहना प्राप्त हुई। दस दिवसीय इस रंगयात्रा ने हिमाचल प्रदेश में रंगमंच के प्रति बढ़ती रुचि को नई ऊर्जा प्रदान की तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल के उत्कृष्ट नाट्य प्रदर्शनों को अधिकाधिक दर्शकों तक पहुँचाने के उद्देश्य को सार्थक रूप से आगे बढ़ाया।
इस अवसर पर निदेशक राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय चिरंजन त्रिपाठी,अतिरिक्त निदेशक भाषा एवं संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश चन्दन कपूर, उपनिदेशक बिहारी लाल शर्मा, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमण्डल प्रमुख राजेश सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार एवं माननीय सदस्य हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी डॉ मस्त राम शर्मा, सहायक निदेशक भाषा एवं संस्कृति विभाग अनिल हारटा,वरिष्ठ रंगकर्मी संजय सूद जिला भाषा अधिकारी शिमला सरोजना नरवाल, मंच प्रबंधक राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमण्डल अभिषेक मोदगिल स्वतंत्र कौशल , प्रबंधक गेयटी थियेटर दलीप कुमारशिवम ठाकुर सहित सैकड़ों रंगमंच प्रेमी उपस्थित रहे।