मां के दूध का कोई विकल्प नहीं! एक छोटी सी गलती ने नवजात की जिंदगी को खतरे में डाल दिया...
चमोली के जोशीमठ क्षेत्र का एक मात्र 1 माह का मासूम बोतल से दूध पिलाने के कारण गंभीर संक्रमण, पेचिश और डिहाइड्रेशन का शिकार हो गया। हालत इतनी बिगड़ गई कि उसकी किडनी ने काम करना कम कर दिया, आंतों की कार्यप्रणाली रुक गई और दिमाग में सूजन तक आ गई।
11 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ने के बाद बेस चिकित्सालय श्रीनगर के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की अथक मेहनत ने इस नन्हीं जान को नया जीवन दिया।
डॉ. अशोक शर्मा ने बताया कि नवजात के लिए मां का दूध ही सबसे सुरक्षित, पौष्टिक और संपूर्ण आहार है। गलत जानकारी या बिना चिकित्सकीय सलाह के बोतल से दूध पिलाना कई बार जानलेवा साबित हो सकता है।
सलाम उन डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को, जिन्होंने दिन-रात मेहनत कर इस मासूम को बचाया।
हर माता-पिता के लिए जरूरी संदेश:
✅ जन्म के बाद बच्चे को केवल मां का दूध दें।
✅ स्तनपान में समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
✅ सोशल मीडिया या सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा न करें।
✅ नवजात की सेहत में लापरवाही भारी पड़ सकती है।
स्वस्थ होकर घर लौटे मासूम के माता-पिता ने बेस अस्पताल श्रीनगर की पूरी टीम का आभार जताया और कहा— "डॉक्टरों ने हमारे बच्चे को नया जीवन दिया है, हम जीवनभर उनके ऋणी रहेंगे।"
👉 इस महत्वपूर्ण संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं, ताकि कोई और परिवार ऐसी पीड़ा न झेले।
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