सरकार में रहते हुए नहीं उठी बुंदेलखंड की आवाज, अब अलग राज्य की मांग क्यों? — ए. एस. नोमानी
बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी ने पूर्व सांसद गंगा चरण राजपूत के अलग बुंदेलखंड राज्य संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब वे सांसद थे, तब यदि वे वास्तव में अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर गंभीर थे, तो उन्हें संसद के भीतर और बाहर लगातार इस मुद्दे को मजबूती से उठाना चाहिए था।
नोमानी ने कहा कि आज जब वे सांसद नहीं हैं, तब जगह-जगह कार्यक्रम कर सरकार से "बुंदेलखंड राज्य दो, फिर वोट लो" की बात कर रहे हैं। उनका सवाल है कि सांसद रहते हुए उन्होंने इस मुद्दे पर प्रभावी आंदोलन, धरना-प्रदर्शन या संसद में लगातार आवाज क्यों नहीं उठाई?
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में रहते हुए अधिकांश सांसद और विधायक न तो अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर संघर्ष करते हैं और न ही किसानों, बेरोजगार युवाओं तथा क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में पद छोड़ने के बाद इस मुद्दे पर सक्रिय होना जनता के मन में कई सवाल खड़े करता है।
ए. एस. नोमानी ने कहा कि बुंदेलखंड के विकास, किसानों की समस्याओं, रोजगार, शिक्षा और क्षेत्रीय हितों के लिए जनप्रतिनिधियों को अपने कार्यकाल के दौरान ही प्रभावी पहल करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बुंदेलखंड की वर्षों पुरानी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए केंद्र और राज्य सरकार को शीघ्र अलग बुंदेलखंड राज्य के गठन पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
अंत में उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड इंसाफ सेना ऐसे नेताओं का विरोध करती है जो सत्ता में रहते हुए क्षेत्रीय मुद्दों पर मौन रहते हैं और पद छोड़ने के बाद जनता के बीच इन्हीं मुद्दों को लेकर राजनीति करते हैं।
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Banda, Banda | Jul 6, 2026