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जम्मू-कश्मीर में कब थमेगी आफत की बारिश? चार दिन में 31 की मौत, पांचवें दिन भी रुकी अमरनाथ और वैष्णो देवी यात्रा। दैनिक वीरधरा राजस्थान। जम्मू। जम्मू-कश्मीर में चार दिन से हो रही वर्षा से अधिकतर जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। चिनाब नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और तवी समेत अन्य नदी-नाले भी उफान पर हैं। नदियों के किनारे बसे गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। इस बीच, भूस्खलन व पत्थर गिरने से परेशानी बढ़ गई है। रामबन जिले में यात्री टेंपो वाहन पर विशाल चट्टान गिरने से दंपती की मौत हो गई व पांच अन्य घायल हो गए। सुंदरबनी में अग्रिम चौकी पर तैनात पंजाब निवासी जवान भी मलबे में दब गया। वहीं बांडीपोरा में बाढ़ में बहे एक बच्चे का शव बरामद हुआ। इसके साथ ही चार दिन में मरने वालों की संख्या 31 हो गई है।

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हरियालो राजस्थान के तहत केविके फार्म पर पौधारोपण कार्यकम आयोजित।

दैनिक वीरधरा राजस्थान।

चित्तौड़गढ़।कृषि विज्ञान केन्द्र चित्तौडगढ द्वारा 23 जुलाई को हरियालो राजस्थान एक पेड़ माँ के नाम के तहत पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केन्द्र के बोजुन्दा फार्म पर किया गया। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के कुलगुरू के निर्देशानुसार बायो फेसिंग को बढ़ावा देने एवं जंगली जानवरो से फसल की सुरक्षा हेतु फार्म की दीवार के किनारे 500 बास एवं 100 करौदे के पौधे लगाये गये। यह पहल हरियालो राजस्थान अभियान के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र के कर्मचारियों और कृषि महाविद्यालय गोगुंदा एवं बस्सी के रावे के 35 छात्रों के सहयोग से वृहत स्तर पर पौधारोपण किया गया।    केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. रतन लाल सोलकी ने अपने उद‌बोधन में कहा कि पेड हमारे परम मित्र है और हमारे जीवन के लिए अति आवश्यक है क्योकि हमे शुद्ध हवा देते है मिटटी के कटाव एवं प्रदूषण को रोकते है। उन्होंने बताया कि कुलाधिपति के मार्गदर्शन में पर्यावरण संरक्षण के तहत प्रदेशभर में पौधे लगाए जा रहे हैं। 
    दीपा इन्दौरिया कार्यक्रम सहायक ने कहा कि अधाधुंध पेड़ पौधों की कटाई के कारण ऑक्सीजन की कमी हो रही है। प्रकृति को सरक्षित रखने, ऑक्सीजन की जरूरत को पूरा करने के लिए पेड़ पौधों की कटाई बंद करे एवं अधिक से अधिक पौधारोपण करने के लिए प्रेरित किया।

हरियालो राजस्थान के तहत केविके फार्म पर पौधारोपण कार्यकम आयोजित। दैनिक वीरधरा राजस्थान। चित्तौड़गढ़।कृषि विज्ञान केन्द्र चित्तौडगढ द्वारा 23 जुलाई को हरियालो राजस्थान एक पेड़ माँ के नाम के तहत पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केन्द्र के बोजुन्दा फार्म पर किया गया। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के कुलगुरू के निर्देशानुसार बायो फेसिंग को बढ़ावा देने एवं जंगली जानवरो से फसल की सुरक्षा हेतु फार्म की दीवार के किनारे 500 बास एवं 100 करौदे के पौधे लगाये गये। यह पहल हरियालो राजस्थान अभियान के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र के कर्मचारियों और कृषि महाविद्यालय गोगुंदा एवं बस्सी के रावे के 35 छात्रों के सहयोग से वृहत स्तर पर पौधारोपण किया गया। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. रतन लाल सोलकी ने अपने उद‌बोधन में कहा कि पेड हमारे परम मित्र है और हमारे जीवन के लिए अति आवश्यक है क्योकि हमे शुद्ध हवा देते है मिटटी के कटाव एवं प्रदूषण को रोकते है। उन्होंने बताया कि कुलाधिपति के मार्गदर्शन में पर्यावरण संरक्षण के तहत प्रदेशभर में पौधे लगाए जा रहे हैं। दीपा इन्दौरिया कार्यक्रम सहायक ने कहा कि अधाधुंध पेड़ पौधों की कटाई के कारण ऑक्सीजन की कमी हो रही है। प्रकृति को सरक्षित रखने, ऑक्सीजन की जरूरत को पूरा करने के लिए पेड़ पौधों की कटाई बंद करे एवं अधिक से अधिक पौधारोपण करने के लिए प्रेरित किया।

Chittaurgarh, Chittorgarh | Jul 23, 2026

कपासन की सियासत में नई हलचल, भाजपा विधायक जीनगर की एक कहावत से छिड़ी राजनीतिक बहस, अर्थ तलाशने में जुटे लोग।

दैनिक वीरधरा राजस्थान।

कपासन। कपासन में आयोजित तीन दिवसीय 85वें उर्स मेले के शुभारंभ समारोह के दौरान हुए कव्वाली कार्यक्रम में भाजपा विधायक अर्जुनलाल जीनगर की ओर से मंच से कही गई एक कहावत ने क्षेत्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में इस कहावत के अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं और इसे लेकर चर्चाओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा।
   कार्यक्रम के दौरान विधायक ने कहा कि "तुर्कियों के बीच में आंधी झाड़ा आ जाता है।" इस कहावत का सामान्य अर्थ यह माना जाता है कि "जब साधारण या छोटे लोगों के बीच अचानक कोई बहुत प्रभावशाली, ताकतवर या बड़े कद का व्यक्ति आ जाए, तो उसका प्रभाव सब पर भारी पड़ता है और बाकी लोग उसके सामने गौण हो जाते हैं।" हालांकि, विधायक ने यह कहावत कहने के तुरंत बाद यह भी जोड़ा कि "ऐसा भी नहीं होना चाहिए।" इसके बावजूद अब लोग इस टिप्पणी का राजनीतिक संदर्भ तलाशने में जुट गए हैं।
   सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर विधायक का इशारा किस ओर था? क्या यह केवल एक सामान्य कहावत थी या फिर इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश छिपा था? यदि यह राजनीतिक संदर्भ में कही गई थी, तो विधायक के अनुसार "छोटे" कौन थे और "बड़ा" किसे माना गया? यही प्रश्न अब कपासन की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।
    चाय की थड़ियों से लेकर राजनीतिक बैठकों और सोशल मीडिया तक इस बयान की खूब चर्चा हो रही है। कोई इसे मंच पर मौजूद नेताओं से जोड़कर देख रहा है तो कोई इसे स्थानीय राजनीतिक समीकरणों से जोड़ रहा है। हालांकि अभी तक विधायक की ओर से इस कहावत के आशय को लेकर कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
   राजनीतिक में सार्वजनिक मंचों से कही गई कहावतें और संकेतात्मक टिप्पणियां अक्सर चर्चा का विषय बन जाती हैं। ऐसे बयानों के कई अर्थ निकाले जाते हैं, विशेषकर तब जब उनका संदर्भ स्पष्ट न हो। यही कारण है कि विधायक की इस टिप्पणी को लेकर भी अलग-अलग तरह की राजनीतिक व्याख्याएं सामने आ रही हैं।
   उधर विपक्षी खेमे में भी इस बयान को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहीं विधायक समर्थकों का कहना है कि एक सामान्य कहावत को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है और विधायक की मंशा जाने बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।
   फिलहाल विधायक अर्जुनलाल जीनगर की इस एक कहावत ने कपासन की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। यह कहावत सामान्य संदर्भ में कही गई थी या इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश छिपा था, इसका स्पष्ट उत्तर अभी सामने नहीं आया है। लेकिन इतना जरूर है कि एक मंच से निकले कुछ शब्द अब पूरे क्षेत्र में राजनीतिक चर्चा और अटकलों का केंद्र बन चुके हैं। आने वाले दिनों में यदि विधायक इस पर कोई स्पष्टीकरण देते हैं, तो संभव है कि इस बहस की दिशा भी बदल जाए।

कपासन की सियासत में नई हलचल, भाजपा विधायक जीनगर की एक कहावत से छिड़ी राजनीतिक बहस, अर्थ तलाशने में जुटे लोग। दैनिक वीरधरा राजस्थान। कपासन। कपासन में आयोजित तीन दिवसीय 85वें उर्स मेले के शुभारंभ समारोह के दौरान हुए कव्वाली कार्यक्रम में भाजपा विधायक अर्जुनलाल जीनगर की ओर से मंच से कही गई एक कहावत ने क्षेत्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में इस कहावत के अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं और इसे लेकर चर्चाओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा। कार्यक्रम के दौरान विधायक ने कहा कि "तुर्कियों के बीच में आंधी झाड़ा आ जाता है।" इस कहावत का सामान्य अर्थ यह माना जाता है कि "जब साधारण या छोटे लोगों के बीच अचानक कोई बहुत प्रभावशाली, ताकतवर या बड़े कद का व्यक्ति आ जाए, तो उसका प्रभाव सब पर भारी पड़ता है और बाकी लोग उसके सामने गौण हो जाते हैं।" हालांकि, विधायक ने यह कहावत कहने के तुरंत बाद यह भी जोड़ा कि "ऐसा भी नहीं होना चाहिए।" इसके बावजूद अब लोग इस टिप्पणी का राजनीतिक संदर्भ तलाशने में जुट गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर विधायक का इशारा किस ओर था? क्या यह केवल एक सामान्य कहावत थी या फिर इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश छिपा था? यदि यह राजनीतिक संदर्भ में कही गई थी, तो विधायक के अनुसार "छोटे" कौन थे और "बड़ा" किसे माना गया? यही प्रश्न अब कपासन की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। चाय की थड़ियों से लेकर राजनीतिक बैठकों और सोशल मीडिया तक इस बयान की खूब चर्चा हो रही है। कोई इसे मंच पर मौजूद नेताओं से जोड़कर देख रहा है तो कोई इसे स्थानीय राजनीतिक समीकरणों से जोड़ रहा है। हालांकि अभी तक विधायक की ओर से इस कहावत के आशय को लेकर कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। राजनीतिक में सार्वजनिक मंचों से कही गई कहावतें और संकेतात्मक टिप्पणियां अक्सर चर्चा का विषय बन जाती हैं। ऐसे बयानों के कई अर्थ निकाले जाते हैं, विशेषकर तब जब उनका संदर्भ स्पष्ट न हो। यही कारण है कि विधायक की इस टिप्पणी को लेकर भी अलग-अलग तरह की राजनीतिक व्याख्याएं सामने आ रही हैं। उधर विपक्षी खेमे में भी इस बयान को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहीं विधायक समर्थकों का कहना है कि एक सामान्य कहावत को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है और विधायक की मंशा जाने बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। फिलहाल विधायक अर्जुनलाल जीनगर की इस एक कहावत ने कपासन की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। यह कहावत सामान्य संदर्भ में कही गई थी या इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश छिपा था, इसका स्पष्ट उत्तर अभी सामने नहीं आया है। लेकिन इतना जरूर है कि एक मंच से निकले कुछ शब्द अब पूरे क्षेत्र में राजनीतिक चर्चा और अटकलों का केंद्र बन चुके हैं। आने वाले दिनों में यदि विधायक इस पर कोई स्पष्टीकरण देते हैं, तो संभव है कि इस बहस की दिशा भी बदल जाए।

Chittaurgarh, Chittorgarh | Jul 23, 2026

Chittorgarh, Rajasthan | Jul 23, 2026