भिण्ड जिले में तीन दिवसीय भूकंपरोधी निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन
अभियंताओं को भूकंपरोधी निर्माण, संरचनात्मक सुरक्षा एवं रेट्रोफिटिंग की तकनीकों पर दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण
भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जन-धन की क्षति को कम करने तथा अभियंताओं की तकनीकी एवं आपदा प्रबंधन क्षमता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आपदा प्रबंध संस्थान गृह विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा एवं जिला प्रशासन के समन्वय से भिण्ड जिले के ज़िला पंचायत के सभागार में आयोजित तीन दिवसीय भूकंप रोधी संरचना निर्माण विषयक प्रशिक्षण का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ।
प्रशिक्षण कार्यक्रम डॉ जॉर्ज व्ही जोसेफ, संयुक्त संचालक, आपदा प्रबंध संस्थान के मार्गदर्शन में दिनांक 19 से 21 अगस्त 2026 तक आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पीडब्ल्यूडी, पीआईयू, एमपीबीडीसी, डब्ल्यूआरडी, पीएचई, आरईएस सहित विभिन्न शासकीय विभागों तथा निजी क्षेत्र में कार्यरत अभियंताओं ने भाग लिया। कुल 53 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कर श्री अभिषेक मिश्रा एवं श्री विपिन सोनकर, कार्यपालन यंत्री भवन द्वारा प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदाय किये गए।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य अभियंताओं को भूकंप के दौरान संरचनाओं के व्यवहार, भूकंपरोधी डिजाइन एवं निर्माण की मूलभूत अवधारणाओं, आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा मौजूदा संरचनाओं की सुरक्षा से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिला कि किसी संरचना को सामान्य भारों के लिए डिजाइन करने और भूकंपीय भारों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन करने में क्या अंतर होता है तथा भूकंप के दौरान संरचना के व्यवहार को समझना एक संरचनात्मक अभियंता के लिए क्यों आवश्यक है।
प्रशिक्षण के अंतिम दिवस श्री तुषार गोलाईत तकनीकी विशेषज्ञ ने प्रतिभागियों को एक स्ट्रक्चरल इंजीनियर भूकंपरोधी संरचना के डिजाइन एवं विश्लेषण के दौरान किस प्रकार सोचता है के बारे में जानकारी प्रदान की।
उन्होंने अपने प्रस्तुतीकरण में बताया कि सामान्य भारों के लिए संरचना का डिजाइन करने की प्रक्रिया और भूकंपीय भारों के लिए डिजाइन करने की सोच में महत्वपूर्ण अंतर होता है। भूकंपरोधी डिजाइन में केवल संरचना की मजबूती ही नहीं, बल्कि उसकी डक्टिलिटी, लोड पथ, स्टीफनेस, स्ट्रेंथ, स्टेबिलिटी और ऊर्जा अवशोषण क्षमता को भी ध्यान में रखना आवश्यक होता है।
सत्र में प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि भूकंप के प्रभाव से संरचना को सुरक्षित रखने के लिए डिजाइन के प्रारंभिक चरण से ही संरचनात्मक व्यवहार और संभावित भूकंपीय मांग को ध्यान में रखना आवश्यक है।
*पुरानी संरचनाओं के रेट्रोफिटिंग पर विस्तृत चर्चा*
श्री तुषार गोलाईत ने प्रशिक्षण के दौरान पुरानी एवं मौजूदा संरचनाओं की भूकंपीय सुरक्षा और रेट्रोफिटिंग पर भी विस्तृत जानकारी दी।
प्रतिभागियों को बताया गया कि किसी पुराने भवन में सीधे रेट्रोफिटिंग तकनीक लागू करने के बजाय पहले उसकी मौजूदा स्थिति, संरचनात्मक क्षमता, क्षति, सामग्री की गुणवत्ता, भार-वहन प्रणाली तथा संभावित भूकंपीय कमजोरी का विस्तृत आकलन किया जाना चाहिए।
उन्होंने रेट्रोफिटिंग से पहले किए जाने वाले स्ट्रक्चरल असेसमेंट एवं एनालिसिस, आवश्यक जांचों तथा उपयुक्त रेट्रोफिटिंग तकनीक के चयन से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की। प्रतिभागियों को यह भी समझाया गया कि रेट्रोफिटिंग का उद्देश्य केवल किसी सदस्य को मजबूत करना नहीं, बल्कि पूरी संरचना के भूकंपीय व्यवहार को बेहतर बनाना होना चाहिए।
समापन एवं वेलेडिक्टरी सेरेमनी में डीएमआई, भोपाल के कार्यक्रम समन्वयक श्री अभिषेक मिश्रा ने प्रतिभागियों को संबोधित किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “आपदा कभी छुट्टी पर नहीं होती।” इसलिए हमें उन सभी खतरों के प्रति हमेशा सजग और सतर्क रहना चाहिए, जो हमारे जीवन, संपत्ति और समाज को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि केवल आपदा आने के बाद प्रतिक्रिया देना पर्याप्त नहीं है। क्षमता निर्माण और अपनी क्षमताओं में निरंतर वृद्धि के माध्यम से ही व्यक्ति, संस्था और समाज आपदाओं के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकते हैं तथा आपदा जोखिम को कम किया जा सकता है।
उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त तकनीकी एवं व्यावहारिक ज्ञान को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में लागू करने तथा सुरक्षित एवं आपदा-रोधी निर्माण को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित
प्रशिक्षण के सफल समापन के अवसर पर श्री अभिषेक मिश्रा द्वारा प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले 53 प्रतिभागियों को
प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
प्रमाण-पत्र प्राप्त करते हुए प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त तकनीकी जानकारी और व्यावहारिक अनुभव को अपने कार्यक्षेत्र में उपयोगी बताया।
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Bhind, Madhya Pradesh | Aug 21, 2026