बिहार के मधुरेन्द्र ने 3 सेंटीमीटर के पीपल के पत्ते पर उकेरी मां दुर्गा, छेड़छाड़ के खिलाफ दिया नारी शक्ति का संदेश
पटना।शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर जहां पूरा देश मां दुर्गा की आराधना में लीन है, वहीं बिहार के विश्वविख्यात रेत कलाकार मधुरेन्द्र कुमार ने अपनी सूक्ष्म पत्ती कला से ऐसा संदेश दिया है, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है।
देश में लड़कियों के साथ होने वाली छेड़छाड़ की घटनाओं से आहत होकर मधुरेन्द्र ने महज 3 सेंटीमीटर के हरे पीपल के पत्ते पर मां दुर्गा की तस्वीर उकेरी है। करीब 3 घंटे के कठिन परिश्रम से तैयार इस कलाकृति में मां दुर्गा के साथ लिखा गया है - लड़कियों की छेड़छाड़ बंद करो और सभी महिलाओं का सम्मान करो
नन्हे पत्ते पर मां दुर्गा का विराट स्वरूप
इस कलाकृति का केंद्र सिंह पर सवार मां दुर्गा का सूक्ष्म चित्र है। मां के अनेक हाथों में त्रिशूल, तलवार, धनुष-बाण सहित विभिन्न अस्त्र-शस्त्र दर्शाए गए हैं। कलाकृति में शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की भावना को प्रमुखता दी गई है।
आकार में भले ही यह कलाकृति बेहद छोटी हो, लेकिन इसका सामाजिक संदेश बहुत बड़ा है। कलाकार ने नवरात्र की धार्मिक आस्था को महिला सम्मान और सुरक्षा जैसे गंभीर सामाजिक विषय से जोड़ने का प्रयास किया है।
डॉक्टर से अंतरिक्ष यात्री तक, नारी शक्ति के विविध रूप
इस कलाकृति की खासियत सिर्फ मां दुर्गा की तस्वीर नहीं है। इसमें महिला वकील, चिकित्सक, स्नातक, रसोइया, पुलिस अधिकारी, कामकाजी महिला, अग्निशामक, शिक्षिका और अंतरिक्ष यात्री के प्रतीक भी शामिल हैं।
इसके माध्यम से दिखाया गया है कि महिलाएं न्याय व्यवस्था, चिकित्सा, शिक्षा, प्रशासन, व्यवसाय, सुरक्षा, विज्ञान और अंतरिक्ष जैसे हर क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
कलाकार का संदेश
मधुरेन्द्र कुमार ने कहा -मां दुर्गा शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की प्रतीक हैं। नवरात्र में हम देवी की पूजा करते हैं, लेकिन हमारा कर्तव्य है कि हम हर बेटी और महिला को भी सम्मान और सुरक्षा दें। लड़कियों के साथ छेड़छाड़ केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज की समस्या है। मैंने 3 सेंटीमीटर के पीपल के पत्ते पर यह कलाकृति बनाकर संदेश देने की कोशिश की है कि हर महिला को भयमुक्त जीवन जीने का अधिकार है।
रेत से पत्तों तक का सफर
मधुरेन्द्र कुमार की कला की विशेषता विभिन्न माध्यमों का प्रयोग है। वह रेत पर आकृतियां बनाने के साथ-साथ हरे पत्तों, फलों, सब्जियों और अन्य प्राकृतिक वस्तुओं को भी कला का माध्यम बनाते रहे हैं।
उनकी उपलब्धियों में वर्ष 2020 में ओडिशा के अंतरराष्ट्रीय रेत कला महोत्सव में भागीदारी, लंदन विश्व कीर्तिमान पुस्तक से जुड़ा सम्मान, सोनपुर मेले में भगवान विष्णु और गज-ग्राह प्रसंग पर आधारित 50 रेत कलाकृतियों का प्रदर्शन और एशियाई विश्व कीर्तिमान पुस्तक में दर्ज उपलब्धि शामिल है।
कला छोटी, संदेश बड़ा
नवरात्र के अवसर पर तैयार यह कलाकृति सिर्फ मां दुर्गा का चित्रण नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की सामूहिक जिम्मेदारी की याद दिलाने वाला प्रयास है।
कलाकार की अपील साफ है - देवी की आराधना करें, हर महिला का सम्मान करें और लड़कियों के साथ होने वाली छेड़छाड़ के खिलाफ आवाज उठाएं।
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