"सत्ता और संस्थाएँ याद रखें कि वे जनता के विश्वास की अमानत हैं। यदि चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर आंच आई, तो यह केवल लोकतंत्र की हार नहीं, बल्कि जनता के भरोसे का कत्ल होगा।
"सत्ता और संस्थाएँ याद रखें कि वे जनता के विश्वास की अमानत हैं। यदि चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर आंच आई, तो यह केवल लोकतंत्र की हार नहीं, बल्कि जनता के भरोसे का कत्ल होगा। - Ujjain Urban News