खरीफ सीजन में खाद का संकट: महंगी डीएपी-यूरिया से किसान बेहाल, सरकारी दावों पर उठे सवाल
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#हरदोई: खरीफ की फसल की बुवाई का समय चल रहा है, लेकिन किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खाद की उपलब्धता और उसकी बढ़ती कीमत बन गई है। सरकार जहां किसानों को समय पर और निर्धारित सरकारी दर पर डीएपी, यूरिया समेत अन्य उर्वरक उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। कोथावां क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि सरकारी और निजी खाद विक्रेता मनमाने ढंग से उर्वरकों की बिक्री कर रहे हैं, जिससे किसानों में भारी आक्रोश है।
कोथावां निवासी दीपक पांडे पुत्र सुरेंद्र पांडे तथा आदमपुर निवासी अनिल कुमार पुत्र कृष्ण कुमार सहित कई किसानों ने बताया कि खरीफ की फसल की तैयारी से लेकर बुवाई तक डीएपी, यूरिया और अन्य उर्वरकों की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। ऐसे समय में यदि खाद समय से न मिले या निर्धारित मूल्य के बजाय अधिक कीमत पर खरीदनी पड़े, तो खेती की पूरी लागत बढ़ जाती है और किसान आर्थिक संकट में फंस जाता है।
किसानों का कहना है कि सरकार ने सहकारी समितियों और अधिकृत खाद विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों को निर्धारित सरकारी मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए। इसके बावजूद कोथावां एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्थानों पर किसानों से निर्धारित मूल्य से कहीं अधिक कीमत वसूली जा रही है। किसानों का आरोप है कि कुछ विक्रेता खाद के साथ अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव भी बनाते हैं, जबकि कई जगह खाद की कृत्रिम कमी दिखाकर मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि जब खेती पहले से ही महंगे बीज, डीजल, बिजली और सिंचाई की लागत से जूझ रही है, तब खाद की कालाबाजारी और मनमानी कीमतों ने उनकी कमर तोड़ दी है। यदि समय पर खाद नहीं मिली तो धान समेत खरीफ की फसलों की बुवाई और उत्पादन दोनों प्रभावित होंगे, जिसका असर किसानों की आय पर पड़ेगा।
क्षेत्र के किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से मांग की है कि सरकारी एवं निजी खाद बिक्री केंद्रों पर तत्काल छापेमारी कर वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाए। निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने वाले विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए तथा सभी समितियों और बिक्री केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
किसानों ने कहा कि यदि जल्द ही खाद की उपलब्धता और मूल्य की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे मजबूर होने पर विवश होंगे। किसानों का कहना है कि अन्नदाता को उसकी सबसे बड़ी जरूरत के समय खाद के लिए भटकना पड़ रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और सरकार के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
#रिपोर्ट: पुनीत मिश्रा/बेनीगंज
Hardoi, Hardoi | Jul 24, 2026