पूनम राठौर ने बढ़ाया कलाकारों का उत्साह, विजय शर्मा की ‘औलाद वालों फूलो-फलो’ प्रस्तुति को मिली खूब सराहना
रिपोर्ट अवधेश शर्मा
लता मंगेशकर के सदाबहार गीतों से सजी सुरों की महफिल, हमारा सुर संसार ने बांधा समां
#बरेली। सुरों की मिठास, सदाबहार गीतों की गूंज और संगीत प्रेमियों की तालियों के बीच हमारा सुर संसार ग्रुप के तत्वावधान में जिला पंचायत रोड स्थित रॉयल पटियाला में संगीतमय कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। गीतों की एक शाम लता के नाम शीर्षक से आयोजित इस कार्यक्रम में कलाकारों ने हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर के गीतों को अपनी आवाज में प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों ने महफिल में चार चांद लगा दिए। कार्यक्रम में शहर के संगीत प्रेमियों, कलाकारों और गणमान्य लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि नगर निगम की उपसभापति श्रीमती पूनम राठौर रहीं, जबकि विशिष्ट अतिथि चंद्रपाल राठौर उपस्थित रहे। आयोजक मंडल की ओर से अतिथियों का शाल और पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य संगीत के प्रति लोगों के प्रेम को बढ़ावा देना और हिंदी फिल्म संगीत के सदाबहार गीतों के माध्यम से पुरानी यादों को ताजा करना रहा।
सदाबहार गीतों ने बांधा समां
कार्यक्रम में कलाकारों ने अपनी गायकी के माध्यम से अलग-अलग रंग बिखेरे। राज चावला ने जाने क्यों लोग मोहब्बत किया करते हैं, अजय अरोड़ा ने एक चेहरे पर कई चेहरे लगा लेते हैं लोग , मनोज उपाध्याय ने झूम बराबर झूम शराबी, हरीश गोस्वामी ने मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया होता और प्रतीक शर्मा ने पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। बेबी शर्मा ने दिल-विल प्यार-व्यार मैं क्या जानूं गीत से महफिल में रोमांटिक रंग भरा, वहीं विजय शर्मा ने औलाद वालों फूलो-फलो की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भावुक कर दिया।
राकेश श्रीवास्तव ने वादियां मेरा दामन, भींडर ने आपकी आंखों में कुछ महके हुए से राज हैं और नरेश कौशिक ने जिंदगी प्यार का गीत है प्रस्तुत कर संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया। विजय श्रीवास्तव ने मेरा परदेसी ना आया, विपिन मेहरा ने रहे ना रहे हम गीत सुनाकर श्रोताओं को पुराने दौर की यादों में पहुंचा दिया।
महिला कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को खास बना दिया। सरिता ने बिंदिया चमकेगी, किरण वर्मा ने फूल तुम्हें भेजा है खत में, मीना अरोड़ा ने कांची ओ कांची रे और डॉ. अंजू उपाध्याय ने कहे तोसे सजना ये तोरी सजनिया प्रस्तुत किया। शकुन सक्सेना ने तुमको पिया दिल दिया बड़े नाज से गीत सुनाया, जबकि संगीता ने यह दिल और उनकी निगाहों के साए से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
हर प्रस्तुति पर बजी तालियां
कार्यक्रम में अवधेश वर्मा ने छू लेने दो नाजुक होठों कोराजेश सक्सेना ने मैं तेरे लिए ही सात रंग के सपने, हरप्रीत गिल ने चिट्ठी ना कोई संदेश और सत्येंद्र ने रस्मे उल्फत को निभाएं तो निभाएं कैसे गीत प्रस्तुत किया। अनिल कुमार गुप्ता ने छलकाए जाम, जितेंद्र कुमार सक्सेना ने रात कली एक ख्वाब में आई और दिनेश शर्मा ने मैं तेरे लिए जग छोड़ दूं, तू मुझको छोड़ चली गीत सुनाकर खूब सराहना बटोरी।
सुधीर मोहन ने हमें और जीने की चाहत न होती अगर तुम न होते, विजय विक्टर ने अगर मुझसे मोहब्बत है, सुरेंद्र गुप्ता ने चांद सी महबूबा हो और मुकेश कुमार सक्सेना ने दीवानों से यह मत पूछो प्रस्तुत किया। जसपाल सिंह ने कई बार यूं ही देखा है, बीना चंद्रा ने यशोमती मैया से बोले नंदलाला, हरलीन कौर ने जब दीप जले आना, सुरेश रस्तोगी ने यारी है ईमान मेरा, यार मेरी जिंदगी और विशन सक्सेना ने दिल है कि मानता नहीं गीत से समां बांधा।
किरण वर्मा, सरिता, शकुन सक्सेना सहित अन्य कलाकारों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में विविधता और मधुरता का रंग भरा। मुकेश और अन्य महान गायकों के लोकप्रिय गीतों के साथ लता मंगेशकर के नाम समर्पित इस संगीतमय शाम ने संगीत की विरासत को याद करने का अवसर दिया।
संगीत से जुड़ाव बढ़ाने का संदेश
मुख्य अतिथि पूनम राठौर ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि संगीत लोगों को जोड़ने और मन को आनंदित करने का सशक्त माध्यम है। ऐसे आयोजन शहर की सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करते हैं। विशिष्ट अतिथि चंद्रपाल राठौर ने कहा कि सदाबहार गीत आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं और संगीत की कोई उम्र नहीं होती।
हमारा सुर संसार के संस्थापक राज चावला ने कहा कि ग्रुप का उद्देश्य संगीत प्रेमियों को एक मंच उपलब्ध कराना और पुराने हिंदी फिल्मी गीतों की मिठास को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। अजय अरोड़ा ने कहा कि ऐसे आयोजन कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देते हैं और आपसी प्रेम तथा सौहार्द को मजबूत बनाते हैं।
देर शाम तक चली इस संगीतमय महफिल में हर प्रस्तुति पर तालियों की गूंज सुनाई देती रही। कार्यक्रम ने एक बार फिर साबित किया कि सदाबहार गीत समय के साथ पुराने नहीं होते, बल्कि हर पीढ़ी के दिल में अपनी खास जगह बनाए रखते हैं।
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