मौत के आगे सब बेबस और लाचार हैं : आचार्य डॉ. मुक्तिसागर सूरीश्वर महाराज
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उदयपुर, 13 अगस्त। फांसी की सजा प्राप्त कैदी या गुनहगार यदि राष्ट्रपति के समक्ष दया की अर्जी करता है, तो शायद उसे जीवनदान मिल सकता है, मगर जब यमराज के दूत प्राण लेने आ जाएं, तब लाख प्रयास करने पर भी कोई नहीं बच सकता। मौत के आगे सब बेबस और लाचार हैं। ये मार्मिक एवं मननीय प्रवचन मालव मार्तंड आचार्य डॉ. श्री मुक्तिसागरसूरीश्वरजी महाराज ने उदयपुर के आयड़ तीर्थ में चातुर्मास के दौरान व्यक्त किए। आचार्यश्री के सान्निध्य में शांतसुधारस ग्रंथ पर तात्विक एवं वैराग्यमय प्रवचन श्रृंखला चल रही है।
अनित्य भावना के बाद अशरण भावना का विवेचन करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि संसार में जो भी अनित्य है, वह अशरणभूत है। वे हमारे स्थायी संरक्षक कभी नहीं बन सकते। जीवन के अंतिम समय में पैसा बैंक में, गहने तिजोरी में, गाड़ी गैरेज में, पत्नी घर में, स्वजन-संबंधी श्मशान में, शरीर चिता पर और आत्मा इन सभी को छोड़कर अनंत यात्रा पर निकल जाती है।
महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि धर्मसभा में आचार्यश्री ने कहा कि मनुष्य के पीछे तीन महाभयंकर शत्रु निरंतर पड़े हुए हैं— बीमारी, बुढ़ापा और मृत्यु। बीमारी किसी को न भी आए तो बुढ़ापा निश्चित रूप से आता है और यदि किसी दुर्लभ परिस्थिति में बुढ़ापा भी टल जाए, तो इन दोनों को ओवरटेक करते हुए मृत्यु निश्चित रूप से आती है।
नाहर ने बताया कि 14 अगस्त से नौ दिवसीय नवकार आराधना प्रारंभ होने जा रही है। भव्य नवकार साधना मंदिर में इसकी सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। इससे संबंधित चढ़ावे भी आज बोली द्वारा करवाए गए। नौ दिवसीय नवकार साधना के दौरान अखंड नवकार जाप भी आयोजित किया जाएगा।
Girwa, Udaipur | Aug 13, 2026