जोशीमठ हेलीकॉप्टर हादसा: रेस्क्यू ऑपरेशन हुआ पूरा सभी छह शव एम्स ऋषिकेश भेजे
दुर्गम पहाड़ियों और खतरनाक रास्तों को पार कर जवानों ने पूरा किया चुनौतीपूर्ण अभियान, सड़क मार्ग तक शव पहुंचाने के बाद हेलीकॉप्टर से भेजा गया ऋषिकेश
चमोली/जोशीमठ। बदरीनाथ धाम से देहरादून जा रहे हेलीकॉप्टर के हाथी पर्वत की पहाड़ियों में दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद चलाया गया सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन आखिरकार रविवार तड़के पूरा हो गया। हादसे में जान गंवाने वाले पायलट समेत सभी छह लोगों के शवों को कड़ी मशक्कत के बाद दुर्गम घटनास्थल से निकालकर सड़क मार्ग तक पहुंचाया गया। इसके बाद सभी शवों को हेलीकॉप्टर के माध्यम से एम्स ऋषिकेश भेज दिया गया है। यहां पोस्टमार्टम और अन्य आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे।
शुक्रवार दोपहर हेलीकॉप्टर हादसे की सूचना मिलते ही आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारतीय सेना, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुट गई थीं। हालांकि, घटनास्थल की भौगोलिक परिस्थितियां रेस्क्यू टीमों के लिए बड़ी चुनौती बनी रहीं। हादसे वाली जगह तक पहुंचने के लिए जवानों को खतरनाक रास्तों और दुर्गम पहाड़ी चढ़ाइयों को पार करना पड़ा। इसके बाद वहां से छह शवों को सुरक्षित नीचे सड़क मार्ग तक लाना भी किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था।
पहले घटनास्थल तक पहुंचना, फिर शवों को नीचे लाना बना चुनौती : हादसे का घटनास्थल बेहद दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में स्थित था। यहां तक पहुंचने के लिए रेस्क्यू टीमों को कठिन चढ़ाई और जोखिम भरे रास्तों से गुजरना पड़ा। घटनास्थल तक पहुंचने के बाद जवानों के सामने छह शवों को सुरक्षित नीचे लाने की चुनौती थी। विषम भौगोलिक परिस्थितियों और खतरनाक रास्तों के चलते अभियान में काफी समय लगा। आखिरकार जवानों की कड़ी मेहनत और समन्वित प्रयासों से सभी छह शवों को बाहर निकाल लिया गया।
एम्स ऋषिकेश में होगी आगे की कार्रवाई :
प्रशासन के अनुसार, सभी छह शवों को सड़क मार्ग तक पहुंचाने के बाद हेलीकॉप्टर के माध्यम से एम्स ऋषिकेश भेज दिया गया है। यहां पोस्टमार्टम समेत अन्य आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद मृतकों के शव उनके परिजनों को सौंपे जाएंगे।
हेलीकॉप्टर हादसे के बाद शुरू हुआ यह रेस्क्यू ऑपरेशन दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में आपदा बचाव दलों के सामने आने वाली चुनौतियों का उदाहरण रहा। कई एजेंसियों के जवानों ने समन्वय के साथ अभियान चलाकर आखिरकार सभी छह मृतकों के शवों को बाहर निकालने में सफलता हासिल की।