यमुनानगर, 24 सितंबर-कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी के अतंर्गत फसल अवशेष प्रबंधन जागरूकता हेतु जिला स्तरीय किसान कार्यशाला का आयोजन श्याम रिर्सोट में किया गया। इस कार्यशाला में हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण, मत्स्य व पशुपालन मंत्री श्याम सिंह राणा ने किसानों को संबोधन में प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि विश्व के अन्य देशों की अपेक्षा हमारे देश की भूमि सबसे समतल भूमि है और इस पर प्राकृतिक खेती करना बहुत ही सरल है। प्राकृतिक खेती अपनाने से लागत कम व उत्पादन अधिक मिलता है और खर्च भी कम होता है। इसलिए किसानों को प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने धान की सीधी बिजाई द्वारा किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचाने व भूजल स्तर के संरक्षण में सहयोगी होने वाली सिफारिशों का विस्तार पूर्वक संज्ञान दिया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष किसानों के खेतों पर धान की सीधी बिजाई के ट्रायल लगाए गए जो अत्याधिक सफल हुए, इससे प्रेरणा लेते हुए अन्य किसानों को भी इस पद्धति को अपनाने की सलाह दी और बताया कि हरियाणा सरकार इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए अनुदान राशि भी प्रदान कर रही है। उन्होंने धान की सीधी बिजाई में विभिन्न प्रकार की आने वाली समस्याओं तथा उनके निवारण हेतु निदान भी साझा किए।
उन्होंने बताया कि धान की सीधी बिजाई में कम लागत व अधिक मुनाफे की जागरूकता जितनी ज्यादा किसानों में बढ़ रही है। धान की बिजाई प्रणाली का किसी भी प्रकार का कोई नुकसान न होकर यह सभी प्रकार से फायदेमंद जैसे किसान की आमदनी, मृदा की उर्वरा शक्ति, भूजल स्तर, वातावरण व पारिस्थितिकी तंत्र सभी को फायदा पहुंचाने में सहायक होती है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री की यही सोच है कि देश का हर वर्ग समृद्ध व आत्मनिर्भर बने। देश को विकसित भारत बनाने के लिए हमें अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत करनी होगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री की सोच है कि किसान की आमदनी कैसे बढ़े इस पर गंभीरता से विचार विमर्श किया गया है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में किसानों की सबसे अधिक फसलें एमएसपी खरीद की जा रही है तथा भावांतर योजना के तहत भी किसानों को लाभ दिया जा रहा है।
इस अवसर पर कृषि उप निदेशक डॉ. आदित्य प्रताप डबास ने किसानों को सरकार की विभिन्न योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसानों को फसल अवशेष नहीं जलाने चाहिए और फसल अवशेषों को मशीनों के माध्यम से खेत की मिट्टी में मिलाना चाहिए। जिससे कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति बढऩे के साथ-साथ हमारी पैदावार भी बढ़ती है। उन्होंने जिले के किसानों से अपील की है कि वे सरकार की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और खरीफ फसलों की उन्नत तकनीकों, नई किस्मों तथा आधुनिक कृषि यंत्रों के बारे में जानकारी प्राप्त करें और अपने खेतों में इन तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाएं। कार्यक्रम के अंत में किसानों से कृषि व कृषि यंत्रों से संबंधित प्रश्र भी पूछे गए। प्रश्नों का सही उत्तर देने वाले महिला एवं पुरुष किसानों को सम्मानित भी किया गया। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों ने उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित भी किया
Jagadhri, Yamuna Nagar | Sep 24, 2026