*"‘एक बार भी नहीं, कभी भी नहीं’—नशे के खिलाफ युवाओं को डीसीपी धारणा यादव ने दिया सशक्त संदेश"*
*संस्कार यूनिवर्सिटी पाटौदा में नशा मुक्ति अभियान के तहत विद्यार्थियों को किया जागरूक, सिंथेटिक ड्रग्स के बढ़ते खतरे, अपराध, पारिवारिक विघटन और सामाजिक दुष्प्रभावों पर किया विस्तार से संवाद।*
झज्जर
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी एवं पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल के दिशा-निर्देशन तथा पुलिस कमिश्नर डॉ. राजश्री सिंह के कुशल नेतृत्व में चलाए जा रहे "नशा मुक्ति हरियाणा" अभियान के तहत सोमवार को झज्जर पुलिस द्वारा संस्कार यूनिवर्सिटी, पाटौदा में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पुलिस उपायुक्त (झज्जर) धारणा यादव ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद करते हुए नशे के दुष्परिणामों के प्रति सचेत रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय पहुंचने पर चेयरमैन महिपाल यादव एवं वाइस चांसलर अजीत सिंह ने पुलिस उपायुक्त धारणा यादव का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया और अपने संबोधन में डीसीपी धरणा यादव ने कहा कि "नशे के प्रति आपका जवाब हमेशा 'नहीं' होना चाहिए—एक बार भी नहीं, कभी भी नहीं। यह आपके जीवन का सवाल है।" उन्होंने कहा कि नशे की शुरुआत अक्सर जिज्ञासा या दोस्तों के दबाव में होती है, लेकिन धीरे-धीरे यही आदत व्यक्ति को अपराध, बीमारी और बर्बादी की ओर ले जाती है।उन्होंने कहा कि नशे की लत व्यक्ति को चोरी, सेंधमारी, लूटपाट और कई बार हत्या जैसे गंभीर अपराधों तक पहुंचा देती है। नशा केवल व्यक्ति का भविष्य ही नहीं छीनता, बल्कि उसके परिवार की खुशियां, सामाजिक सम्मान और आर्थिक स्थिति भी बर्बाद कर देता है।डीसीपी झज्जर ने विद्यार्थियों को बताया कि कोई भी ऐसा पदार्थ जो मस्तिष्क एवं तंत्रिका तंत्र को अस्वाभाविक रूप से प्रभावित करे, स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। यदि किसी पदार्थ के सेवन से अत्यधिक उत्तेजना, चक्कर, अधिक नींद, भावनाओं पर नियंत्रण खत्म होना या कृत्रिम नशे का एहसास हो, तो उससे तुरंत दूरी बना लेनी चाहिए।उन्होंने विशेष रूप से सिंथेटिक ड्रग्स के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पहले अधिकांश नशीले पदार्थ अफीम (पोस्ता) से बनाए जाते थे, लेकिन आज पूरी तरह रासायनिक तत्वों से तैयार सिंथेटिक ड्रग्स समाज के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं। कई मामलों में इनकी केवल एक खुराक ही व्यक्ति को नशे का आदी बना सकती है। कुछ सिंथेटिक ड्रग्स स्वादहीन होती हैं, जिससे इनकी पहचान करना मुश्किल होता है और ये जानलेवा भी साबित हो सकती हैं।उन्होंने कहा कि नशे से बाहर निकलना संभव है, लेकिन इसके लिए दृढ़ इच्छाशक्ति, परिवार का सहयोग और पुनर्वास केंद्रों की सहायता आवश्यक होती है। कई ऐसे युवा हैं जिन्होंने उपचार के बाद नशे को छोड़कर नया जीवन शुरू किया और आज वे दूसरों को भी प्रेरित कर रहे हैं।डीसीपी धारणा यादव ने कहा कि पुलिस के पास ऐसे अनेक मामले आते हैं, जहां नशे के कारण घरेलू हिंसा, वैवाहिक विवाद और तलाक जैसी दुखद परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं। नशे के आदी माता-पिता के बच्चों पर भी इसका गहरा मानसिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है। इसलिए नशा केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि यदि उनके आसपास कोई व्यक्ति नशे की गिरफ्त में है तो उसे तिरस्कार नहीं, बल्कि सही परामर्श और उपचार के लिए प्रेरित करें। युवा वर्ग अपनी ऊर्जा शिक्षा, खेल, कौशल विकास और राष्ट्र निर्माण में लगाए, क्योंकि यही उनके उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है।कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने नशे से दूर रहने तथा समाज को नशा मुक्त बनाने में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प लिया।
Uklana, Hissar | Jul 20, 2026