46 साल बाद मां को साधु के रूप में मिला बिछड़ा बेटा, आवाज सुनकर पहचान गई मां
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग से एक ऐसी भावुक कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं।
महज 15 वर्ष की उम्र में घर छोड़कर चला गया बुद्धि बल्लभ उपाध्याय 46 साल बाद साधु के वेश में अपने घर पहुंचा। "बुद्धनाथ" नाम से देशभर में भ्रमण कर रहे इस साधु ने जब अपने घर के आंगन में भिक्षा मांगी, तो 85 वर्षीय मां नंदी देवी ने उसकी आवाज सुनते ही उसे पहचान लिया।
पलभर में मां-बेटे की आंखों से आंसुओं का सैलाब बह निकला। 46 वर्षों का इंतजार, दर्द और बिछड़न एक गले मिलने में सिमट गई। इस भावुक मिलन को देखकर पूरा गांव भावुक हो उठा।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि समय कितना भी बीत जाए, मां का प्यार और उसकी पहचान कभी कमजोर नहीं पड़ती। चेहरे बदल सकते हैं, उम्र ढल सकती है, लेकिन मां अपने बच्चे को हमेशा पहचान लेती है।
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