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शिमला पुलिस का नशा तस्करों पर बड़ा प्रहार: यूपी, राजस्थान, पंजाब और चंडीगढ़ तक फैले अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़, दो मामलों में 5 सप्लायर गिरफ्तार शिमला पुलिस द्वारा नशा तस्करों के विरुद्ध चलाया जा रहा अभियान लगातार जारी है। पुलिस केवल मादक पदार्थों की बरामदगी तक सीमित न रहकर प्रत्येक मामले में बैकवर्ड लिंकज की जांच कर पूरे ड्रग सप्लाई नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में कार्य कर रही है। इसी क्रम में दो केस में पुलिस को बड़ी सफलता मिली: दिनांक 15.03.2026 को पुलिस थाना रोहड़ू की टीम ने गश्त के दौरान एक व्यक्ति को संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर रोका। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से 9 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामद हुआ। इस संबंध में थाना रोहड़ू में अभियोग संख्या 26/26 दर्ज कर सार्थक सूद (29 वर्ष), निवासी रोहड़ू, जिला शिमला को गिरफ्तार किया गया। मामले की वैज्ञानिक एवं तकनीकी जांच के दौरान मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), व्हाट्सएप चैट, बैंक खातों तथा UPI लेन-देन का विस्तृत विश्लेषण किया गया। जांच के दौरान अंतर्राज्यीय ड्रग सप्लाई नेटवर्क का खुलासा हुआ, जिसके आधार पर पुलिस टीम ने उत्तर प्रदेश में कार्रवाई कर अमित गुप्ता को गिरफ्तार किया। पूछताछ, डिजिटल साक्ष्यों एवं वित्तीय जांच से यह भी सामने आया कि वह वासु उर्फ हर्ष सिंघानिया, निवासी जिला चूरू (राजस्थान) के साथ मिलकर संगठित तरीके से चिट्टा तस्करी का नेटवर्क संचालित कर रहा था। लगातार बैकवर्ड लिंकज पर कार्यवाही करते हुए पुलिस ने 15 जुलाई 2026 को वासु उर्फ हर्ष सिंघानिया को चंडीगढ़ से गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक जांच एवं वित्तीय विश्लेषण में महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। जांच में पाया गया कि 15 मार्च 2026 को बरामद 9 ग्राम चिट्टा की आपूर्ति के बदले वासु उर्फ हर्ष सिंघानिया के बैंक खाते में ₹18,000 प्राप्त हुए थे। इसके अतिरिक्त वित्तीय लेन-देन के विश्लेषण से यह भी सामने आया कि सह-आरोपी अमित गुप्ता द्वारा वासु के खाते में लगभग ₹3.50 लाख स्थानांतरित किए गए। वहीं पिछले छह माह के दौरान वासु के बैंक खाते में ₹14 लाख से अधिक की राशि प्राप्त हुई, जबकि उसके पास आय का कोई वैध एवं ज्ञात स्रोत नहीं पाया गया। उपरोक्त डिजिटल एवं वित्तीय साक्ष्य स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि वासु उर्फ हर्ष सिंघानिया एवं अमित गुप्ता संगठित रूप से मादक पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क संचालित कर अवैध रूप से भारी आर्थिक लाभ अर्जित कर रहे थे। पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों, संपत्तियों एवं वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है तथा अवैध रूप से अर्जित संपत्ति के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जा रही है। अब तक इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस कार्रवाई के साथ पुलिस ने एक बड़े अंतर्राज्यीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान एवं चंडीगढ़ तक फैला हुआ था। दिनांक 03.07.2026 को पुलिस थाना कोटखाई की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर हुल्ली क्षेत्र में नाकाबंदी के दौरान एक वाहन की तलाशी ली। तलाशी के दौरान लगभग 64 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामद हुआ। इस संबंध में पुलिस थाना कोटखाई में अभियोग संख्या 60/2026 अधीन धारा 21 एवं 29 एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत मामला दर्ज कर रक्षित चौहान, राहुल शर्मा एवं लवली शर्मा को गिरफ्तार किया गया। मामले की वैज्ञानिक एवं तकनीकी जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), डिजिटल साक्ष्यों तथा अन्य उपलब्ध तथ्यों का गहन विश्लेषण किया गया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि बरामद चिट्टा आरोपी राहुल शर्मा द्वारा अमित महेव से खरीदा गया था, जो मोहाली (पंजाब) में रहकर मादक पदार्थों की आपूर्ति कर रहा था। बैकवर्ड लिंकज पर लगातार कार्रवाई करते हुए पुलिस थाना कोटखाई की विशेष टीम 17 जुलाई 2026 को आरोपी की तलाश में पंजाब रवाना हुई। आरोपी अमित महेव काफी समय से पुलिस गिरफ्त से बचने के लिए फरार चल रहा था। गिरफ्तारी से बचने के उद्देश्य से उसने अपना मोबाइल फोन बंद कर रखा था तथा लगातार अपने ठिकाने बदलकर पुलिस को गुमराह करने का प्रयास कर रहा था। इसके बावजूद शिमला पुलिस ने लगातार अथक प्रयासों, तकनीकी निगरानी, डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण तथा मानव आसूचना के प्रभावी समन्वय से आरोपी का सटीक ठिकाना स्थापित किया और 18 जुलाई 2026 को उसे मोहाली (पंजाब) से गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की। शिमला पुलिस का लक्ष्य केवल नशे की खेप पकड़ना नहीं, बल्कि संगठित अंतर्राज्यीय ड्रग सिंडिकेट को पूरी तरह ध्वस्त करना तथा नशा तस्करी से अर्जित अवैध आर्थिक तंत्र पर प्रभावी प्रहार करना है। वर्ष 2026 में अब तक बैकवर्ड लिंकेज के आधार पर 58 मुख सरगना गिरफ्तार किए जा चुके हैं तथा 48 प्रमुख अंतर-राजीय नेटवर्क ध्वस्त किए जा चुके हैं। यह अभियान भविष्य में भी इसी दृढ़ता एवं निरंतरता के साथ जारी रहेगा।

Shimla Urban, Shimla | Jul 18, 2026

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Shimla Urban, Shimla | Jul 18, 2026

हिमाचल प्रदेश सरकार ने आउटसोर्स भर्ती पर जारी किए संशोधित दिशा-निर्देश

हिमाचल प्रदेश सरकार के वित्त (विनियमन) विभाग ने 11 जून, 2026 को आउटसोर्स सेवाओं (Outsourcing of Services) के संबंध में संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत 13 अक्टूबर, 2022 के उस आदेश को निरस्त कर दिया गया है, जिसमें आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं को अगले आदेश तक जारी रखने की अनुमति दी गई थी।

मुख्य बिंदु

1. 2022 का आदेश रद्द

13 अक्टूबर, 2022 का आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।

अब आउटसोर्स सेवाओं के लिए नए दिशा-निर्देश लागू होंगे।

2. आउटसोर्सिंग स्थायी व्यवस्था नहीं

सरकार ने स्पष्ट किया है कि आउटसोर्सिंग केवल अस्थायी (Temporary), आवश्यकता आधारित (Need-based) और अंतरिम (Stop-gap) व्यवस्था है।

इसे सरकारी रोजगार का स्थायी या प्राथमिक माध्यम नहीं माना जाएगा।
L
3. नियमित भर्ती को प्राथमिकता

जिन पदों के लिए नियमित भर्ती एवं पदोन्नति नियम (R&P Rules) लागू हैं, उन रिक्तियों को नियमित भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से भरा जाएगा।

विभागों को नियमित भर्ती प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं।

4. स्वीकृत पदों से अधिक आउटसोर्स नियुक्तियों पर रोक

कई विभागों में स्वीकृत पदों से अधिक अथवा पहले से नियमित कर्मचारियों द्वारा भरे गए पदों पर आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति पर सरकार ने चिंता व्यक्त की है।

ऐसी व्यवस्थाओं को विभागीय आवश्यकता के अनुसार तर्कसंगत (Rationalise) किया जाएगा।

5. नई आउटसोर्स भर्ती पर वित्त विभाग की अनुमति अनिवार्य

किसी भी नई आउटसोर्स सेवा को नियुक्त करने, तैनात करने या जारी रखने के लिए वित्त विभाग की पूर्व लिखित अनुमति आवश्यक होगी।

बिना अनुमति की गई नियुक्तियों को अनधिकृत (Unauthorized) माना जाएगा और उन पर कार्रवाई की जा सकती है।

6. वर्तमान आउटसोर्स कर्मचारी

वर्तमान में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी अस्थायी और आवश्यकता आधारित व्यवस्था के तहत कार्य करते रह सकते हैं।

यह व्यवस्था नियमित भर्ती पूरी होने तक और समय-समय पर विभागीय समीक्षा के अधीन होगी।

7. केवल विशेष परिस्थितियों में आउटसोर्सिंग

आउटसोर्सिंग का उपयोग केवल अस्थायी, गैर-मुख्य (Non-core), मौसमी (Seasonal) अथवा विशेष तकनीकी सेवाओं के लिए किया जाएगा।

8. उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अनुपालन

उच्च शिक्षा निदेशालय ने यह पत्र सभी सरकारी डिग्री कॉलेजों एवं संस्कृत महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों को भेजकर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

निष्कर्ष

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आउटसोर्सिंग सरकारी सेवाओं में स्थायी रोजगार का विकल्प नहीं है। भविष्य में नियमित पदों पर नियमित भर्ती को प्राथमिकता दी जाएगी तथा आउटसोर्सिंग केवल सीमित एवं आवश्यक परिस्थितियों में ही की जा सकेगी। नई आउटसोर्स नियुक्तियों के लिए वित्त विभाग की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी और वर्तमान आउटसोर्स सेवाओं की भी समय-समय पर समीक्षा की जाएगी।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने आउटसोर्स भर्ती पर जारी किए संशोधित दिशा-निर्देश हिमाचल प्रदेश सरकार के वित्त (विनियमन) विभाग ने 11 जून, 2026 को आउटसोर्स सेवाओं (Outsourcing of Services) के संबंध में संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत 13 अक्टूबर, 2022 के उस आदेश को निरस्त कर दिया गया है, जिसमें आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं को अगले आदेश तक जारी रखने की अनुमति दी गई थी। मुख्य बिंदु 1. 2022 का आदेश रद्द 13 अक्टूबर, 2022 का आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। अब आउटसोर्स सेवाओं के लिए नए दिशा-निर्देश लागू होंगे। 2. आउटसोर्सिंग स्थायी व्यवस्था नहीं सरकार ने स्पष्ट किया है कि आउटसोर्सिंग केवल अस्थायी (Temporary), आवश्यकता आधारित (Need-based) और अंतरिम (Stop-gap) व्यवस्था है। इसे सरकारी रोजगार का स्थायी या प्राथमिक माध्यम नहीं माना जाएगा। L 3. नियमित भर्ती को प्राथमिकता जिन पदों के लिए नियमित भर्ती एवं पदोन्नति नियम (R&P Rules) लागू हैं, उन रिक्तियों को नियमित भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से भरा जाएगा। विभागों को नियमित भर्ती प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं। 4. स्वीकृत पदों से अधिक आउटसोर्स नियुक्तियों पर रोक कई विभागों में स्वीकृत पदों से अधिक अथवा पहले से नियमित कर्मचारियों द्वारा भरे गए पदों पर आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति पर सरकार ने चिंता व्यक्त की है। ऐसी व्यवस्थाओं को विभागीय आवश्यकता के अनुसार तर्कसंगत (Rationalise) किया जाएगा। 5. नई आउटसोर्स भर्ती पर वित्त विभाग की अनुमति अनिवार्य किसी भी नई आउटसोर्स सेवा को नियुक्त करने, तैनात करने या जारी रखने के लिए वित्त विभाग की पूर्व लिखित अनुमति आवश्यक होगी। बिना अनुमति की गई नियुक्तियों को अनधिकृत (Unauthorized) माना जाएगा और उन पर कार्रवाई की जा सकती है। 6. वर्तमान आउटसोर्स कर्मचारी वर्तमान में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी अस्थायी और आवश्यकता आधारित व्यवस्था के तहत कार्य करते रह सकते हैं। यह व्यवस्था नियमित भर्ती पूरी होने तक और समय-समय पर विभागीय समीक्षा के अधीन होगी। 7. केवल विशेष परिस्थितियों में आउटसोर्सिंग आउटसोर्सिंग का उपयोग केवल अस्थायी, गैर-मुख्य (Non-core), मौसमी (Seasonal) अथवा विशेष तकनीकी सेवाओं के लिए किया जाएगा। 8. उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अनुपालन उच्च शिक्षा निदेशालय ने यह पत्र सभी सरकारी डिग्री कॉलेजों एवं संस्कृत महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों को भेजकर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। निष्कर्ष सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आउटसोर्सिंग सरकारी सेवाओं में स्थायी रोजगार का विकल्प नहीं है। भविष्य में नियमित पदों पर नियमित भर्ती को प्राथमिकता दी जाएगी तथा आउटसोर्सिंग केवल सीमित एवं आवश्यक परिस्थितियों में ही की जा सकेगी। नई आउटसोर्स नियुक्तियों के लिए वित्त विभाग की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी और वर्तमान आउटसोर्स सेवाओं की भी समय-समय पर समीक्षा की जाएगी।

Shimla Urban, Shimla | Jul 18, 2026

शिमला पुलिस का नशा तस्करों पर बड़ा प्रहार: यूपी, राजस्थान, पंजाब और चंडीगढ़ तक फैले अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़, दो मामलों में 5 सप्लायर गिरफ्तार शिमला पुलिस द्वारा नशा तस्करों के विरुद्ध चलाया जा रहा अभियान लगातार जारी है। पुलिस केवल मादक पदार्थों की बरामदगी तक सीमित न रहकर प्रत्येक मामले में बैकवर्ड लिंकज की जांच कर पूरे ड्रग सप्लाई नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में कार्य कर रही है। इसी क्रम में दो केस में पुलिस को बड़ी सफलता मिली: दिनांक 15.03.2026 को पुलिस थाना रोहड़ू की टीम ने गश्त के दौरान एक व्यक्ति को संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर रोका। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से 9 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामद हुआ। इस संबंध में थाना रोहड़ू में अभियोग संख्या 26/26 दर्ज कर सार्थक सूद (29 वर्ष), निवासी रोहड़ू, जिला शिमला को गिरफ्तार किया गया। मामले की वैज्ञानिक एवं तकनीकी जांच के दौरान मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), व्हाट्सएप चैट, बैंक खातों तथा UPI लेन-देन का विस्तृत विश्लेषण किया गया। जांच के दौरान अंतर्राज्यीय ड्रग सप्लाई नेटवर्क का खुलासा हुआ, जिसके आधार पर पुलिस टीम ने उत्तर प्रदेश में कार्रवाई कर अमित गुप्ता को गिरफ्तार किया। पूछताछ, डिजिटल साक्ष्यों एवं वित्तीय जांच से यह भी सामने आया कि वह वासु उर्फ हर्ष सिंघानिया, निवासी जिला चूरू (राजस्थान) के साथ मिलकर संगठित तरीके से चिट्टा तस्करी का नेटवर्क संचालित कर रहा था। लगातार बैकवर्ड लिंकज पर कार्यवाही करते हुए पुलिस ने 15 जुलाई 2026 को वासु उर्फ हर्ष सिंघानिया को चंडीगढ़ से गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक जांच एवं वित्तीय विश्लेषण में महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। जांच में पाया गया कि 15 मार्च 2026 को बरामद 9 ग्राम चिट्टा की आपूर्ति के बदले वासु उर्फ हर्ष सिंघानिया के बैंक खाते में ₹18,000 प्राप्त हुए थे। इसके अतिरिक्त वित्तीय लेन-देन के विश्लेषण से यह भी सामने आया कि सह-आरोपी अमित गुप्ता द्वारा वासु के खाते में लगभग ₹3.50 लाख स्थानांतरित किए गए। वहीं पिछले छह माह के दौरान वासु के बैंक खाते में ₹14 लाख से अधिक की राशि प्राप्त हुई, जबकि उसके पास आय का कोई वैध एवं ज्ञात स्रोत नहीं पाया गया। उपरोक्त डिजिटल एवं वित्तीय साक्ष्य स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि वासु उर्फ हर्ष सिंघानिया एवं अमित गुप्ता संगठित रूप से मादक पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क संचालित कर अवैध रूप से भारी आर्थिक लाभ अर्जित कर रहे थे। पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों, संपत्तियों एवं वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है तथा अवैध रूप से अर्जित संपत्ति के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जा रही है। अब तक इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस कार्रवाई के साथ पुलिस ने एक बड़े अंतर्राज्यीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान एवं चंडीगढ़ तक फैला हुआ था। दिनांक 03.07.2026 को पुलिस थाना कोटखाई की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर हुल्ली क्षेत्र में नाकाबंदी के दौरान एक वाहन की तलाशी ली। तलाशी के दौरान लगभग 64 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामद हुआ। इस संबंध में पुलिस थाना कोटखाई में अभियोग संख्या 60/2026 अधीन धारा 21 एवं 29 एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत मामला दर्ज कर रक्षित चौहान, राहुल शर्मा एवं लवली शर्मा को गिरफ्तार किया गया। मामले की वैज्ञानिक एवं तकनीकी जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), डिजिटल साक्ष्यों तथा अन्य उपलब्ध तथ्यों का गहन विश्लेषण किया गया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि बरामद चिट्टा आरोपी राहुल शर्मा द्वारा अमित महेव से खरीदा गया था, जो मोहाली (पंजाब) में रहकर मादक पदार्थों की आपूर्ति कर रहा था। बैकवर्ड लिंकज पर लगातार कार्रवाई करते हुए पुलिस थाना कोटखाई की विशेष टीम 17 जुलाई 2026 को आरोपी की तलाश में पंजाब रवाना हुई। आरोपी अमित महेव काफी समय से पुलिस गिरफ्त से बचने के लिए फरार चल रहा था। गिरफ्तारी से बचने के उद्देश्य से उसने अपना मोबाइल फोन बंद कर रखा था तथा लगातार अपने ठिकाने बदलकर पुलिस को गुमराह करने का प्रयास कर रहा था। इसके बावजूद शिमला पुलिस ने लगातार अथक प्रयासों, तकनीकी निगरानी, डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण तथा मानव आसूचना के प्रभावी समन्वय से आरोपी का सटीक ठिकाना स्थापित किया और 18 जुलाई 2026 को उसे मोहाली (पंजाब) से गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की। शिमला पुलिस का लक्ष्य केवल नशे की खेप पकड़ना नहीं, बल्कि संगठित अंतर्राज्यीय ड्रग सिंडिकेट को पूरी तरह ध्वस्त करना तथा नशा तस्करी से अर्जित अवैध आर्थिक तंत्र पर प्रभावी प्रहार करना है। वर्ष 2026 में अब तक बैकवर्ड लिंकेज के आधार पर 58 मुख सरगना गिरफ्तार किए जा चुके हैं तथा 48 प्रमुख अंतर-राजीय नेटवर्क ध्वस्त किए जा चुके हैं। यह अभियान भविष्य में भी इसी दृढ़ता एवं निरंतरता के साथ जारी रहेगा। - Shimla Urban News