देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव-2026 में HNBGU का शानदार प्रदर्शन, लोकगीत में प्रथम और लोकनृत्य में द्वितीय स्थान
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया। विश्वविद्यालय की टीम ने लोकगीत प्रतियोगिता में प्रथम स्थान तथा लोकनृत्य प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव-2026 का आयोजन 19 एवं 20 सितंबर 2026 को बदरीनाथ धाम के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा एवं माणा क्षेत्र में किया गया। भारतीय सेना एवं जिला प्रशासन, चमोली द्वारा ऑपरेशन सद्भावना के अंतर्गत आयोजित इस महोत्सव की थीम “हमारी विरासत, हमारा भविष्य” (Culture is Our Heritage, Our Future) रही। महोत्सव का उद्देश्य क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और स्थानीय कला को संरक्षण एवं व्यापक मंच प्रदान करना रहा।
महोत्सव में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने उत्तराखंड की लोकसंस्कृति पर आधारित लोकगीत एवं लोकनृत्य की प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं। उनकी प्रस्तुतियों को निर्णायक मंडल ने सराहा और लोकगीत में विश्वविद्यालय की टीम को प्रथम स्थान प्रदान किया गया। इसके लिए टीम को ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) की पुरस्कार राशि प्राप्त हुई। वहीं लोकनृत्य प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय की टीम ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया तथा ₹75,000 (पचहत्तर हजार रुपये) की पुरस्कार राशि अर्जित की।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्तराखंड की लोकधुनों, लोकनृत्य परंपराओं, सांस्कृतिक स्मृतियों और लोकजीवन को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। बदरीनाथ धाम और माणा की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में आयोजित इस महोत्सव में विश्वविद्यालय की प्रस्तुतियों ने देवभूमि की सांस्कृतिक विविधता और युवा प्रतिभाओं की रचनात्मक ऊर्जा को प्रभावी ढंग से सामने रखा।
विश्वविद्यालय परिवार ने इस उपलब्धि पर सभी प्रतिभागी छात्र-छात्राओं, समन्वयक, टीम मैनेजर एवं सहयोगी शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी लोक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ उसके संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रेरित करते हैं।
देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव-2026 में लोकगीत में प्रथम और लोकनृत्य में द्वितीय स्थान प्राप्त कर HNBGU के छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय के साथ-साथ उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति को भी गौरवान्वित किया।
विश्वविद्यालय की टीम के समन्वयक डॉ. संजय पांडे, डॉ. गांधी चौहान, नंदा सती टीम के साथ मौजूद रहे।