12 बरस बाद फिर होली भेंट, जा मेरी गौरा जा तू शिव का कैलाश..
आखिरकार बीते एक पखवाडे से चल रही हिमालय की अधिष्ठात्री देवी मां नंदा की बड़ी जात यात्रा का होमकुंड में मां नंदा, चौसिंगा खाडु के कैलाश विदाई के साथ विधिवत समापन हो गया। होमकुंड में मां नंदा की पूजा अर्चना करके श्रद्धालुओं नें पौराणिक लोकगीतों और जागर गाकर हिमालय की अधिष्टात्री देवी माँ नंदा को कैलाश के लिये विदा किया।
मेरी मैत की धियाणी तेरू बाटू हेरदू रोली, जा मेरी गौरा जा तू शिव का कैलाश, जा मेरी गौरा तू, चौखम्भा उकाली.. जैसे गीतों के साथ अपनी ध्याण को विदा करते समय श्रद्धालुओं की आंखे अश्रुओं से छलछला गयी। इस दौरान श्रद्धालुओं नें अपने साथ लाये खाजा- चूडा, बिंदी, चूडी, ककड़ी, मुंगरी भी समौण के रूप में माँ नंदा को अर्पित किये। बड़ी जात रविवार को अपने अंतिम पडाव शीला समुद्र से होमकुंड पहुंची। मां नंदा, बंड भूमियाल के जयकारों से पूरा हिमालय गुंजयमान हो गया। 12 बरस बाद मां नंदा के ससुराल में मां नंदा के जयकारों से हिमालय का सन्नाटा भी टूट गया। नंदा की बड़ी जात की अगुवाई कर रहे चौसिंगा मेंढ़ा की पूजा अर्चना कर कैलाश की ओर रवाना किया गया। चौसिंगा मेंढ़ा की विदाई पर सभी श्रद्धालु बेहद भावुक हुये। होमकुंड में मां नंदा के कैलाश विदाई के साथ बड़ी जात में सम्मलित मां नंदा की डोलियां, निशाण और छंतोली ने वापसी की राह पकड़ दी। इसके साथ ही बड़ी जात में गए श्रद्धालु और नंदा भक्त भी वापस लौट आए।
साभार- संजय चौहान।