"सिमरिया से यहां तक आने में उतनी थकावट और कष्ट नहीं हुआ, जितना इस उखड़ी हुई सड़क के कुछ किलोमीटर के टुकड़े ने दे दिया। पैरों में छालों के साथ नुकीले पत्थर चुभ रहे थे। यह स्थिति देवघर के प्रसिद्ध सुइया पहाड़ की कठिन चढ़ाई से भी ज्यादा कष्टदायी महसूस हो रही है।"
संवाददाता मुकेश कुमारबीहट
अशोक साहनी, कांवरिया
अंतिम सोमवारी को होगा जलाभिषेक तमाम शारीरिक कष्टों और प्रशासनिक उपेक्षा के बावजूद कांवरियों की आस्था नहीं डगमगाई। 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयकारों के साथ नवयुवक कमरिया संघ का यह जत्था अपने गंतव्य की ओर अग्रसर है। संघ का लक्ष्य अंतिम सोमवारी के अवसर पर रोसड़ा स्थित गंडकीनाथ धाम (गोलाघाट) पहुंचकर बाबा भोलेनाथ का पूर्ण विधि-विधान के साथ जलाभिषेक करना है।
स्थानीय श्रद्धालुओं और कांवरियों ने मांग की है कि इस बदहाल मार्ग की अविलंब सुध ली जाए ताकि आगे गुजरने वाले अन्य शिवभक्तों को इस तरह के नारकीय कष्ट का सामना न करना पड़े।पथरीली राहों पर डिगा नहीं 'बोल बम' का हौसलाः सिमरिया से जल भरकर रोसड़ा लौट रहे कांवरियों को उखड़ी सड़क ने रुलाया, देवघर के सुइया पहाड़ सी लगी राह
चौथी सोमवारी को लेकर बाबा गंडकी नाथ धाम (गोलाघाट, रोसड़ा) के नवयुवक कमरिया संघ का जत्था सिमरिया गंगा घाट से पवित्र गंगाजल लेकर पैदल रोसड़ा के लिए रवाना हुआ। सिमरिया से चकिया, बीहट और जीरोमाइल के रास्ते अनुशासित ढंग से आगे बढ़ रहे कांवरियों को पिपरा पटेल चौक पर पहुंचते ही भारी कुप्रबंधन का सामना करना पड़ा।
पिपरा देवसपटेल चौक से पकौल चौक तक सड़क बदहाल पटेल चौक से लेकर पकौल चौक तक संवेदक (ठेकेदार) द्वारा सड़क को उखाड़कर जस की तस स्थिति में छोड़ दिया गया है। पूरी सड़क पर बड़े-बड़े नुकीले कंकड़-पत्थर फैले हुए हैं। नंगे पांव चल रहे कांवरियों के पैरों में ये कंकड़ चुभते रहे, जिससे उनका पैदल चलना दूभर हो गया