सकारात्मक सोच ही बनती है सुखद जीवन का आधार : साध्वी सरस्वती भारती जी
जगाधरी, हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया, जिसके दौरान परम पूजनीय दिव्य गुरु आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री सरस्वती भारती जी ने मानव जीवन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सूत्रों को उजागर करते हुए कहा कि मनुष्य जैसा सोचता है, धीरे-धीरे उसका व्यक्तित्व और जीवन भी वैसा ही आकार लेने लगता है। सकारात्मक सोच मनुष्य के भीतर आशा, साहस और आत्मविश्वास जगाती है, जबकि नकारात्मक सोच उसकी क्षमताओं को सीमित कर उसे निराशा और तनाव की ओर ले जाती है। साध्वी जी ने समझाया कि जीवन में परिस्थितियाँ कैसी भी हों, उनका सामना करने का हमारा दृष्टिकोण ही हमारी वास्तविक शक्ति बनता है। कठिनाइयाँ प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में आती हैं किन्तु कोई व्यक्ति उन्हीं कठिनाइयों को अपनी असफलता का कारण मान लेता है, तो कोई उनसे सीख लेकर आगे बढ़ने का मार्ग खोज लेता है। यही सोच का अंतर है। उन्होंने कहा कि नकारात्मक सोच का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि मनुष्य अपनी आंतरिक शक्ति को भूलकर परिस्थितियों और दूसरों के व्यवहार से प्रभावित होने लगता है। क्रोध, ईर्ष्या, भय, द्वेष और निराशा जैसे विचार मन की शांति को भंग करते हैं तथा व्यक्ति के संबंधों में भी कटुता उत्पन्न करते हैं। नकारात्मक सोच से प्रभावित होने के कारण ही मनुष्य अपने जीवन में आने वाले दुखों का दोष किसी व्यक्ति अथवा परिस्थिति को देता रहता है और ऐसी अवस्था में मनुष्य अपनी स्वयं की ग़लतियाँ देखने की बजाय दूसरो में दोष ढूँढता है। साध्वी जी ने आगे बताया कि मनुष्य की सोच के निर्माण में उसकी संगति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जैसी संगति में व्यक्ति रहता है, धीरे-धीरे उसकी सोच, विचारधारा और व्यवहार भी उसी के अनुरूप ढलने लगते हैं। नकारात्मक संगति व्यक्ति के भीतर निराशा, द्वेष और नकारात्मकता को बढ़ावा देती है, जबकि सकारात्मक एवं सज्जन व्यक्तियों की संगति जीवन में आशा, सद्भाव और सकारात्मक दृष्टिकोण का संचार करती है। इसलिए सत्संग का विशेष महत्व है, क्योंकि सत्संग मनुष्य को सही और गलत के बीच अंतर समझने की दृष्टि प्रदान करता है। सत्संग के माध्यम से व्यक्ति अपने विचारों को शुद्ध कर जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करता है। अतः जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए उत्तम संगति और सत्संग को अपनाना अत्यंत आवश्यक है।कार्यक्रम के अंत में विश्व शांति की प्रार्थना हेतु सामूहिक ध्यान-साधना में सभी उपस्थित भक्तजनों ने श्रद्धापूर्वक योगदान दिया। भजन संकीर्तन एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
Ambala, Ambala | Oct 28, 2026