छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के भैयाथान ब्लॉक अंतर्गत समौली और डालाबहरा गांव की बसोर समुदाय की महिलाओं की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। कभी बच्चों का पेट पालने के लिए भीख मांगने को मजबूर इन महिलाओं के जीवन को नई दिशा देने के लिए कलेक्टर रेना जमील की पहल पर विशेष अभियान चलाया गया। जिला प्रशासन ने सबसे पहले शिविर लगाकर इन परिवारों के जरूरी दस्तावेज बनवाए और फिर इन्हें शासन की योजनाओं से जोड़ा।
'छत्तीसगढ़ महिला कोष' की महिला राहत योजना के तहत मिली 40-40 हजार रुपये की आर्थिक मदद से महिलाओं ने स्वावलंबन की राह पकड़ी है। दो महिलाओं ने अपने पारंपरिक बांस शिल्प के काम को आगे बढ़ाया, वहीं एक महिला ने किराना दुकान शुरू कर अपनी आजीविका का साधन तैयार किया। कल तक ताने सुनने वाली ये महिलाएं आज सम्मान, हुनर और मेहनत के दम पर अपने परिवार को सहारा दे रही हैं।
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