#बिसाऊ_की_विरासत_फिर_मंच_पर_संतों_के_सानिध्य_में_श्रीराम_की_लीला से भक्तिमय हुई शाम!
श्रीराम जन्म से ताड़का वध तक सजी रामकथा की जीवंत झांकी, उद्घाटन के साथ बिसाऊ में शुरू हुआ आस्था, भक्ति और परंपरा का ऐतिहासिक सफर
बिसाऊ। (अशोक सोनी) पीढ़ियों से चली आ रही आस्था, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की गाथा और मूक अभिनय की अद्भुत परंपरा... रविवार शाम बिसाऊ की ऐतिहासिक मूकरामलीला के शुभारंभ के साथ एक बार फिर जीवंत हो उठी। संतों के सानिध्य और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में रामलीला का आगाज हुआ तो वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रीराम के जन्म से लेकर ताड़का वध तक के प्रसंगों ने दर्शकों को रामकथा के भावनात्मक और वीरतापूर्ण संसार से जोड़ दिया।
रामलीला प्रबंध समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र मिश्रा ने बताया कि पंडित सुनील शास्त्री के आचार्यत्व में तपस्वी आश्रम के संत बाबा बर्फानी तथा गणेश नाथ आश्रम, गोगामेड़ी टीला के संत रविनाथ के सानिध्य में कार्यक्रम आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि समाजसेवी गोविंद राम वर्मा ने फीता काटकर मूकरामलीला का विधिवत उद्घाटन किया।
अतिथियों का किया सम्मान
शुभारंभ अवसर पर समिति अध्यक्ष राजेन्द्र मिश्रा, मंत्री गोपीकिशन पारीक और पूर्व मंत्री श्यामसुंदर भानीपुरा, कौषाध्यक्ष प्रीतम दाधीच ने अतिथियों का माला पहनाकर, शॉल ओढ़ाकर और श्रीफल भेंट कर स्वागत-सत्कार किया। संतों के सानिध्य में हुए इस आयोजन ने बिसाऊ की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराओं के प्रति लोगों की आस्था को फिर सामने रखा।
श्रीराम जन्म से ताड़का वध तक सजी रामकथा
उद्घाटन के बाद भगवान श्रीराम के जन्म के प्रसंग से लीला का मंचन शुरू हुआ। इसके बाद ताड़का वध का दृश्य प्रस्तुत किया गया। पहले ही दिन रामकथा के इन प्रसंगों ने भक्ति, उत्साह और वीरता का ऐसा संगम प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों को भावनात्मक रूप से कथा से जोड़ दिया। बिसाऊ की मूकरामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों से जुड़ी लोकआस्था और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है। हर वर्ष इसके मंचन के साथ भगवान श्रीराम के आदर्शों, धर्म और मर्यादा का संदेश लोगों तक पहुंचता है। संतों के आशीर्वाद के बीच शुरू हुई यह रामलीला एक बार फिर बिसाऊ की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊर्जा देने के लिए तैयार है।
इस अवसर पर कपिलेश शर्मा, भवानीशकंर महनसरीया, श्रीकिशन स्वामी, देवकीनन्दन नोवाल, बसंत चेजारा, अशोक माटोलिया, जगदीश प्रसाद कसेरा, श्रीकिशन पारीक, राजेश शर्मा महनसर, ओमप्रकाश दाधीच, पवन मिश्रा, कमल मिश्रा सहित गणमान्यजन एवं सैकडो़ लीला प्रेमी मोजूद रहे।
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