जिले में काफी वर्षों के बाद इस वर्ष अल्पवर्षा के कारण जलाशयों में अपेक्षाकृत कम जलभराव की स्थिति को देखते हुए पेयजल, सिंचाई एवं फसल प्रबंधन को लेकर जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक कलेक्ट्रेट कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक में जल उपलब्धता की स्थिति की समीक्षा करते हुए आगामी समय में पेयजल एवं सिंचाई व्यवस्था तथा किसानों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री दुर्गादास उईके, विधायक बैतूल हेमंत खंडेलवाल, समस्त विधायक तथा कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे, सीईओ जिला पंचायत गणेश जायसवाल सहित जल संसाधन, कृषि, जल निगम एवं एमपीईबी विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में जलाशयों में उपलब्ध पानी की स्थिति की समीक्षा के बाद तय किया गया कि उपलब्ध जल का उपयोग निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। जिन जलाशयों में 50 प्रतिशत से कम जलभराव है, उनमें उपलब्ध पानी पेयजल एवं निस्तारी के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। वहीं 50 से 80 प्रतिशत जलभराव वाले जलाशयों से सिंचाई के लिए किसानों को एक पलेवा एवं एक पानी दिया जाएगा। 90 प्रतिशत से अधिक जलभराव वाले जलाशयों से सिंचाई के लिए दो पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि दिसंबर माह के बाद जलाशयों में उपलब्ध पानी को मुख्य रूप से पेयजल की आवश्यकता के लिए सुरक्षित रखा जाएगा।
केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उईके ने कहा कि अल्पवर्षा की स्थिति को देखते हुए पेयजल, सिंचाई एवं फसल प्रबंधन के लिए पुख्ता कार्ययोजना के साथ कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि उपलब्ध जल का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करते हुए किसानों और आमजन की आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाए। उन्होंने किसानों को कम पानी में होने वाली फसलों की ओर प्रेरित करने तथा इसके लिए गांव स्तर पर जागरूकता गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए।
पीएचई विभाग की समीक्षा के दौरान जिले में संभावित पेयजल संकट वाले क्षेत्रों एवं ग्रामों को चिन्हित कर विधानसभा-वार जानकारी तैयार करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को जल स्रोतों की स्थिति पर लगातार नजर रखने तथा आवश्यकता के अनुसार वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जल निगम के अधिकारियों को मेंढा एवं वर्धा परियोजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। वहीं घोघरी एवं गढ़ा परियोजनाओं को दिसंबर माह तक प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।