✅ कचरे से खाद तक- #शाहपुर में स्वच्छता के साथ संसाधनों का भी हो रहा सदुपयोग
✅ घरों से निकलने वाले कचरे से तैयार हो रहा जैविक खाद
घरों से निकलने वाला कचरा अक्सर अनुपयोगी समझकर फेंक दिया जाता है, लेकिन सही प्रबंधन और वैज्ञानिक प्रक्रिया से यही कचरा उपयोगी संसाधन बन सकता है। नगर परिषद शाहपुर में कचरे से जैविक खाद तैयार करने की प्रक्रिया इसका अच्छा उदाहरण पेश कर रहा है। यहां घरों, दुकानों, होटलों और सब्जी मंडी से एकत्रित कचरे का पृथक्करण कर जैविक अपशिष्ट से खाद तैयार की जा रही है। इस प्रक्रिया से जहां स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिलती है, वहीं कचरे का उपयोगी रूपांतरण भी सुनिश्चित होता है।
✅ सुबह से शुरू होती है स्वच्छता की जिम्मेदारी
नगर परिषद शाहपुर में प्रतिदिन सुबह सफाई कार्य की शुरुआत होती है। परिषद के प्रांगण में 60 सफाई मित्र और 10 वाहन चालक एकत्रित होते हैं। निर्धारित रूट चार्ट के अनुसार 9 कचरा संग्रहण वाहन 15 वार्डों में सफाई व्यवस्था के लिए रवाना होते हैं। ये वाहन घरों, दुकानों, होटलों और सब्जी मंडी से कचरा एकत्रित करते हैं। इस व्यवस्था में नागरिकों की सहभागिता भी महत्वपूर्ण रहती है। गीले कचरे को हरे डिब्बे में और सूखे कचरे को नीले डिब्बे में अलग-अलग रखने से कचरे के बेहतर प्रबंधन में सहायता मिलती है।
✅ कचरे का पृथक्करण एवं रीसाइक्लिंग
विभिन्न वार्डों से एकत्रित कचरे को ट्रेचिंग ग्राउंड तक पहुंचाया जाता है। यहां निर्धारित प्लेटफॉर्म और शेड में कचरा उतारने के बाद सावधानी एवं सुरक्षा उपकरणों के साथ सफाई मित्र दस्ताने एवं मास्क पहनकर उसका पृथक्करण करते हैं। इस दौरान प्लास्टिक, कागज, गत्ता, धातु, कांच और कपड़े जैसी सामग्री अलग-अलग की जाती है। रीसाइक्लिंग योग्य सूखे कचरे को गठानों के रूप में तैयार कर #रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाता है। वहीं, फल-सब्जियों के छिलके, फूल, चायपत्ती तथा घरों एवं सार्वजनिक स्थलों से निकलने वाला बचा हुआ भोजन जैसे जैविक कचरे को अलग रखा जाता है।
✅ लगभग 45 दिनों में तैयार होती है जैविक खाद
#जैविक कचरे को कम्पोस्ट शेड में निर्धारित स्थान पर विंडरो में रखा जाता है। खाद बनाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए इसमें सूक्ष्मजीव कल्चर के रूप में छाछ एवं गुड़ के पानी का छिड़काव किया जाता है। इसके साथ ही कचरे की नियमित पलटाई की जाती है तथा नमी और तापमान पर निगरानी रखी जाती है। इस प्रक्रिया के माध्यम से लगभग 45 दिनों में जैविक खाद तैयार हो जाता है। तैयार खाद को छलनी मशीन से छाना जाता है, जिससे बारीक और उपयोग के लिए तैयार खाद अलग हो जाती है। बचा हुआ मोटा अंश पुनः प्रक्रिया में शामिल कर दिया जाता है।
✅ खाद से किसानों और #बागवानी को लाभ
खाद तैयार होने के बाद उसकी तौल एवं पैकिंग की जाती है। पैकेट पर ‘जैविक खाद- नगर परिषद शाहपुर’ का लेबल लगाया जाता है। इसके बाद यह खाद किसानों, उद्यानों, नर्सरियों और नागरिकों को 4 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराई जाती है। एक बैग में 50 किलोग्राम खाद होती है, जिसकी कीमत 200 रुपये निर्धारित है। प्राप्त राशि का उपयोग नगर परिषद द्वारा नगर के विकास कार्यों एवं क्षेत्र के नागरिकांे की मूलभूत सुविधाओं में विस्तार के लिये किया जाता है।
नगर परिषद शाहपुर का यह प्रयास दर्शाता है कि उचित कचरा प्रबंधन से अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है। कचरे का पृथक्करण, पुनर्चक्रण योग्य सामग्री का उपयोग और जैविक खाद का निर्माण #स्वच्छता के साथ संसाधनों के सदुपयोग की दिशा में अच्छी पहल हैं। नागरिकों की सहभागिता एवं प्रशासन के सहयोग से नगरीय विकास में बदलाव आ रहे है।
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1 views | Burhanpur, Madhya Pradesh | Oct 16, 2026