धनाना के खेल क्रांति के जनक स्व. कुलजीत उर्फ सिप्पा की जयंती पर रक्तदान और सांस्कृतिक कार्यक्रम, युवाओं को मिली प्रेरणा
स्व. कुलजीत सिंह सिप्पा ने अपनी लग्न से धनाना को हैंडबॉल नर्सरी के रूप में किया स्थापित : नफे सिंह घणघस
भिवानी, 16 अगस्त : ग्रामीण भारत में खेल संस्कृति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले और सैंकड़ों युवाओं का भविष्य संवारने वाले धनाना हैंडबाल जनक स्व. कुलजीत उर्फ सिप्पा के जन्मदिवस के अवसर पर धनाना स्थित जाटु खाप चौरासी के ऐतिहासिक चबूतरे पर एक भव्य रक्तदान शिविर एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य सामाजिक प्रबुद्धजनों और खाप प्रतिनिधियों ने शिरकत की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में घणघस खाप हरियाणा के प्रधान काला शेखपुरा मौजूद रहे। साथ ही नरेश मांढी, कमल प्रधान और एईटीओ पवन घणघस विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय घणघस खाप के प्रधान प्रेम कुमार ने की।
घणघस खाप के राष्ट्रीय प्रवक्ता नफे सिंह घणघस ने बताया कि स्व. कुलजीत उर्फ सिप्पा का ग्रामीण खेल जगत में योगदान अतुलनीय रहा है। उन्होंने अपने जीवनकाल में केवल खेल को बढ़ावा ही नहीं दिया, बल्कि युवाओं को सही दिशा दिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर भी बनाया। सिप्पा के मार्गदर्शन और कठोर प्रशिक्षण की बदौलत करीब 250 युवाओं ने खेल कोटे व अपनी प्रतिभा के दम पर सरकारी नौकरियां हासिल कीं। वर्तमान में करीब 200 से 250 खिलाड़ी हैंडबाल में राष्ट्रीय स्तर पर गांव और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। भारतीय सेना की शायद ही कोई ऐसी हैंडबाल टीम हो, जिसमें गांव धनाना का खिलाड़ी शामिल न हो।
कार्यक्रम के दौरान घणघस खाप के राष्ट्रीय प्रवक्ता नफे सिंह घणघस ने स्वर्गीय कुलजीत सिप्पा के योगदान को याद करते हुए कहा कि स्व. कुलजीत उर्फ सिप्पा केवल एक कोच या खिलाड़ी नहीं थे, वे हमारे समाज के सच्चे राष्ट्र निर्माता थे। उन्होंने अपनी लगन से धनाना को हैंडबाल की नर्सरी के रूप में स्थापित किया। आज यदि सैकड़ों परिवार सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं और हमारे युवा देश की रक्षा व खेल मैदानों में तिरंगा लहरा रहे हैं, तो इसका श्रेय सिप्पा की सोच को जाता है। उनकी जयंती पर आयोजित यह रक्तदान शिविर उनके समाज सेवा के संकल्प को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है। युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर नशामुक्त समाज और खेल के प्रति समर्पित होना चाहिए।