*इंदौर में आकार लेगा प्रदेश का पहला सिंधु कला केंद्र*
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*मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भूमिपूजन समारोह में वर्चुअली किया संबोधित*
इंदौर, 16 सितम्बर 2026
सिंधु सभ्यता की गौरवशाली विरासत, संस्कृति, कला और परंपराओं को संरक्षित कर नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में इंदौर ने एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। “सिंधु सभ्यता से संस्कृति तक” की संकल्पना पर आधारित मध्यप्रदेश के प्रथम सिंधु कला केंद्र, इंदौर का भूमिपूजन समारोह सम्पन्न हुआ।
समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए और अपने संबोधन में सिंधु घाटी सभ्यता के इतिहास, उसकी उपलब्धियों और सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सिंधु घाटी सभ्यता विश्व की प्राचीनतम नगरीय सभ्यताओं में से एक थी। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसे नगरों में सुव्यवस्थित सड़कें, जल निकासी व्यवस्था, पक्की ईंटों से बने भवन, अनाज भंडारण और व्यापारिक गतिविधियां उस समय के उन्नत नगर नियोजन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंधु सभ्यता के लोग कृषि, पशुपालन, शिल्प, धातु-कर्म और व्यापार में दक्ष थे। उनकी मुहरों, मूर्तियों, आभूषणों, मृद्भांडों और स्थापत्य अवशेषों से तत्कालीन समाज की कला-संवेदना, धार्मिक मान्यताओं और जीवनशैली की जानकारी मिलती है। उन्होंने कहा कि सिंधु सभ्यता का प्रभाव भारतीय संस्कृति की अनेक परंपराओं में आज भी दिखाई देता है। हमारी प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत देश की पहचान का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे केंद्र हमारी विरासत को संरक्षित करने के साथ युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और इतिहास से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
*यह केवल भवन नहीं, संस्कृति और इतिहास का जीवंत प्रतीक होगा-दिलीप लखी*
कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी लखी ग्रुप के चेयरमैन श्री दिलीप लखी ने की। उन्होंने कहा कि सिंधु कला केंद्र की नींव रखी जा रही है, यह केवल एक इमारत नहीं, बल्कि हमारी हजारों वर्षों पुरानी संस्कृति, कला और इतिहास का जीवंत प्रतीक बनेगा। यह केंद्र में सिंधु सभ्यता से जुड़े महापुरुषों एवं गौरवशाली विरासत के सजीव चित्रण, प्रदर्शनियों और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से हमारी समृद्ध परंपरा को प्रस्तुत किया जाएगा। यहां सिंधु सभ्यता के नगर नियोजन, जल प्रबंधन, व्यापार, शिल्पकला, मुहरों, आभूषणों और दैनिक जीवन से संबंधित विषयों को आधुनिक तकनीक और दृश्य माध्यमों के जरिए प्रदर्शित करने का प्रयास किया जाएगा। यह प्रयास विशेष रूप से युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, इतिहास और गौरवशाली विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
ईस्वर जामनानी ने कहा कि इस केन्द्र को समाज की संस्कृति और इतिहास को सुरक्षित रखना केवल वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व भी है। सिंधु कला केंद्र इस दिशा में एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।
*श्री लालवानी ने रखी केंद्र की परिकल्पना-*
सांसद एवं सिंधु हेरिटेज ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री शंकर लालवानी ने बताया कि सिंधु कला केंद्र की परिकल्पना का मुख्य उद्देश्य सिंधु सभ्यता की समृद्ध विरासत, कला, संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों को एक स्थान पर संरक्षित एवं प्रदर्शित करना है। उन्होंने कहा कि सिंधु सभ्यता केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस केंद्र के माध्यम से समाज की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक स्वरूप में प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित हो सके।
श्री लालवानी ने कहा कि इंदौर में बनने वाला यह केंद्र सिंधु की कला, संस्कृति और विरासत का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यहां विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों, प्रदर्शनियों, कला एवं विरासत से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से सिंधु सभ्यता की समृद्ध परंपरा को व्यापक स्तर पर सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक भवन नहीं, बल्कि समाज की स्मृतियों, संस्कृति और गौरव को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प है। समाज के सहयोग और सहभागिता से यह केंद्र एक व्यापक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित होगा।
भूमिपूजन समारोह के साथ ही इंदौर में “सिंधु सभ्यता से संस्कृति तक” की गौरवशाली यात्रा को एक नया मंच मिला है। यह केंद्र भविष्य में इतिहास, कला, संस्कृति और सामाजिक विरासत के संरक्षण तथा संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
समारोह में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, राज्य सभा सांसद सुश्री कविता पाटीदार, विधायक श्रीमती मालिनी गौड़ सहित सिंधु हेरिटेज ट्रस्ट के ट्रस्टीगण गिरीश मतलानी, ईस्वर जमनानी, जय ककवानी, चन्द्र कुमार मखीजा, अंजू मखीजा, हरीश मीरचंदानी, अनिल संतवाणी, कंचन गिदवानी, अजय शिवानी, प्रकाश लालवानी, पदाधिकारी, समाजजन, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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