सृजन के रंग-क़ासिम के संग" समारोह में 'मैं हूं कोरोना इक्कीसवीं सदी का' पुस्तक लोकार्पित हुई।
बीकानेर 31 अगस्त, 2026
नगर के बहुआयामी रचनाकार, शायर, कहानीकार व अनुवादक क़ासिम बीकानेरी के बहुआयामी सृजन पर केंद्रित दो दिवसीय समारोह "सृजन के रंग-क़ासिम के संग" के दूसरे दिन प्रज्ञालय संस्थान व अदब सराय बीकानेर की तरफ से स्थानीय महाराजा नरेंद्र सिंह ऑडिटोरियम नागरी भण्डार में क़ासिम बीकानेरी द्वारा टोंक के उर्दू लेखक समालोचक डॉ. अज़ीज़ुल्लाह शीरानी की व्यंग्यात्मक उर्दू ललित निबंध पुस्तक का हिंदी अनुवाद 'मैं हूं कोरोना इक्कीसवीं सदी का' का लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया।
प्रज्ञालय संस्थान के राजेश रंगा ने बताया कि लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता नगर के वरिष्ठ कवि समालोचक मालचंद तिवाड़ी ने की। तिवारी ने अध्यक्ष उद्बोधन देते हुए कहा कि कासिम बीकानेरी एक बेजोड़ हिंदी अनुवादक है जिन्होंने डॉ. शीरानी की उर्दू पुस्तक का बेहतरीन अनुवाद करके हिंदी साहित्य जगत में अपनी एक अलग एवं मज़बूत उपस्थिति दर्ज करवाई है।
समारोह में नगर के वरिष्ठ कवि कथाकार कमल रंगा का सानिध्य रहा। इस अवसर पर रंगा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि क़ासिम बीकानेरी एक प्रयोगवादी रचनाकार है, वे साहित्य की अनेकोंनेक विधाओं में समान ख़ूबी के साथ सृजनरत हैं। लोकार्पित पुस्तक के अनुवाद के ज़रिए उन्होंने दो भाषाओं के जरिए पुल बनाने का महत्वपूर्ण परिचय किया है।
समारोह के मुख्य अतिथि मधु आचार्य ने कहा कि शायरी के अलावा अनुवाद के क्षेत्र में भी क़ासिम बीकानेरी ने उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने उर्दू साहित्य की कोरोना पर केंद्रित पुस्तक का हिंदी अनुवाद करके हिंदी पाठकों को एक ख़ूबसूरत तोहफ़ा दिया है,जिसका हिंदी साहित्य जगत में भरपूर स्वागत किया जाएगा।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. उमाकांत गुप्त ने क़ासिम बीकानेरी द्वारा किए गए अनुवाद कार्य की प्रशंसा करते हुए इस कार्य को महत्वपूर्ण कार्य बताया और कहा कि इससे हिंदी साहित्य जगत समृद्ध हुआ है। श्री डूंगरगढ़ से पधारे डॉक्टर मदन सैनी ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर अपना उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए कहा कि अनुवाद का कार्य बहुत मुश्किल कार्य है जिसे क़ासिम ने अपनी मेहनत से सहजता एवं सफलता के साथ पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया है। इसके लिए उन्हें जितनी बधाई दी जाए वह कम होगी।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के तौर पर कवि कथाकार प्रमोद कुमार शर्मा ने लोकार्पित पुस्तक पर विस्तार से अपनी टिप्पणी प्रस्तुत करते हुए इसे एक बेहतरीन अनुवाद बताते हुए कहा कि क़ासिम बीकानेरी द्वारा हिंदी के टकसाली शब्दों का प्रयोग करते हुए इस कृति को पठनीय बना दिया है, जिससे हिंदी साहित्य जगत में इस पुस्तक का भरपूर स्वागत किया जाएगा।
इस मौके पर लोकार्पित करती के मूल लेखक डॉक्टर अजीज अल्लाह शीरानी ने क़ासिम बीकानेरी की ता'रीफ़ करते हुए कहा कि उन्होंने मूल उर्दू कृति से भी बेहतरीन अनुवाद करके इस कृति के रूप में हिंदी साहित्य जगत को एक बेहतरीन नज़राना पेश किया है। इस अवसर पर क़ासिम बीकानेरी ने अपने अनुवाद से संबंधित संस्मरण साझा करते हुए मूल कृति की वो ख़ूबियां बयान की जिनकी वजह से उन्होंने इस पुस्तक का अनुवाद करने का इरादा किया।
आरंभ में सभी आगंतुकों का स्वागत वरिष्ठ शायर वली मोहम्मद ग़ौरी ने किया। समारोह की शुरुआत हाफ़िज़ सैयद ज़िया मोहम्मद बीकानेरी ने कुरआन शरीफ़ की तिलावत करके की। पुस्तक पर पत्र वाचन अनीसुद्दीन सिद्दीक़ी ने किया। समारोह का सफल संचालन ज्योति प्रकाश रंगा ने किया। आभार इसरार हसन क़ादरी ने ज्ञापित किया। इस अवसर पर नगर के साहित्य कला समाज सेवा एवं अनेक क्षेत्रों के प्रबुद्धजन बड़ी संख्या में मौजूद थे ।जिन्होंने क़ासिम बीकानेरी द्वारा अनूदित पुस्तक के लिए उन्हें बधाई प्रेषित की।
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