सरकार की दमनकारी नीतियों के विरोध में राजस्थान का ऐतिहासिक चक्का जाम सफल, भीलवाड़ा ट्रांसपोर्ट नगर पूर्णतः बंद
भीलवाड़ा:राजकुमार गोयल, 13 जुलाई
राजस्थान ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति के आह्वान पर सरकार की ट्रांसपोर्ट विरोधी एवं दमनकारी नीतियों के विरोध में आज भीलवाड़ा सहित पूरे राजस्थान में ऐतिहासिक चक्का जाम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। भीलवाड़ा ट्रांसपोर्ट नगर पूर्ण रूप से बंद रहा। पूरे दिन किसी भी प्रकार की माल बुकिंग, डिलीवरी अथवा परिवहन गतिविधि नहीं हुई। बाहर से आने वाले वाहनों को भी संघर्ष समिति की अनुमति के बाद ही खाली कराया गया।
प्रेस वार्ता में अध्यक्ष विश्वबंधु सिंह राठौड़ ने बताया कि आज के बंद से केवल भीलवाड़ा में लगभग ₹3.5 करोड़ के कारोबार का नुकसान हुआ। वहीं ट्रांसपोर्ट नगर से प्रतिदिन अपनी आजीविका कमाने वाले लगभग 1000 से 2000 टेंपो चालक, हम्माल, लेबर एवं अन्य श्रमिक आज काम नहीं मिलने के कारण प्रभावित हुए। उन्होंने बताया कि भीलवाड़ा जिले में लगभग 2500 से 3000 मालवाहक वाहन खड़े रहे, जबकि केवल ट्रांसपोर्ट नगर में ही 800 से 1000 वाहन पूरे दिन बंद रहे। किसी भी वाहन में न तो माल की बुकिंग हुई और न ही माल की डिलीवरी की गई।
सचिव अरिहंत जैन कहा कि आज आयोजित संघर्ष समिति की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि राज्य सरकार ट्रांसपोर्टरों की जायज़ मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर वार्ता नहीं करती है, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं प्रभावी बनाया जाएगा। इसके तहत खनन क्षेत्रों, औद्योगिक इकाइयों, फैक्ट्रियों एवं अन्य लोडिंग प्वाइंट्स पर संघर्ष समिति के प्रतिनिधि पहुंचकर व्यापारियों एवं उद्योगपतियों से सहयोग का आग्रह करेंगे तथा किसी भी वाहन में माल नहीं भरने की अपील करेंगे।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि संघर्ष समिति के अंतर्गत 8 गश्ती दल गठित किए गए हैं, जो कल से पूरे शहर एवं आसपास के क्षेत्रों में उन स्थानों का निरीक्षण करेंगे जहाँ लोडिंग-अनलोडिंग का कार्य हो रहा है। ये दल व्यापारियों एवं वाहन मालिकों से आंदोलन के समर्थन में सहयोग का आग्रह करेंगे। यदि कोई आंदोलन की अवहेलना करता है तो संघर्ष समिति उसके विरुद्ध संगठनात्मक कार्रवाई करते हुए आर्थिक दंड भी लगाएगी।
कोषाध्यक्ष राहुल कटारिया ने कहा कि उपलब्ध फोटो, वीडियो एवं जिला इकाइयों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर पूरे राजस्थान में चक्का जाम का पहला दिन अत्यंत सफल रहा। आज़ादी के बाद यह पहला अवसर है जब राजस्थान का ट्रांसपोर्टर अपने अधिकारों, सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई के लिए स्वयं सड़कों पर उतरा है। उन्होंने कहा कि "संगठन में ही शक्ति है" का संदेश आज भीलवाड़ा से पूरे राजस्थान में बुलंद हुआ है।
उन्होंने सभी व्यापारियों, उद्योगपतियों, ट्रांसपोर्टरों, वाहन मालिकों, श्रमिकों एवं आमजन का आंदोलन को मिले अभूतपूर्व समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से पुनः आग्रह किया कि ट्रांसपोर्टरों की जायज़ मांगों पर तत्काल सकारात्मक वार्ता कर उनका समाधान किया जाए। अन्यथा आने वाले दिनों में आंदोलन को और अधिक व्यापक, निर्णायक एवं प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा।