42 बीघा सरकारी भूमि में कथित हेराफेरी का मामला, राजस्व विभाग पर उठे सवाल
ग्राम प्रधान ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, ग्रामीणों ने डीएम से लगाई न्याय की गुहार
एडीएम विनय पांडेय ने जांच के दिए निर्देश, दोषियों पर कार्रवाई की चेतावनी
रिपोर्ट नागेंद्र पांडये
फतेहपुर जिले की बिंदकी तहसील में सरकारी भूमि के कथित अनियमित आवंटन और राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अभयपुर और थानपुर राजस्व गांवों से जुड़े इस प्रकरण में ग्रामीणों और ग्राम प्रधान ने एक राजस्व लेखपाल पर सरकारी भूमि को नियमों के विपरीत निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की शिकायत जिला प्रशासन तक पहुंचने के बाद जांच के आदेश दिए गए हैं।
फतेहपुर जिले के बिंदकी तहसील क्षेत्र में सरकारी भूमि से जुड़े एक कथित बड़े घोटाले ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि सरकारी भूमि की सुरक्षा और अभिलेखों के संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने वाले एक राजस्व लेखपाल ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए करोड़ों रुपये मूल्य की लगभग 42 बीघा सरकारी भूमि में अनियमितताएं कीं।
अभयपुर में 20 बीघा भूमि के पट्टे पर उठे सवाल
अभयपुर ग्राम सभा के प्रधान रामदास निषाद ने आरोप लगाया है कि ग्राम सभा की नवीन परती श्रेणी की लगभग 20 बीघा भूमि का वर्ष 2023 में कथित रूप से नियमों के विपरीत पट्टा आवंटन किया गया। प्रधान का कहना है कि पट्टा प्रक्रिया के लिए न तो ग्राम सभा की खुली बैठक आयोजित की गई और न ही उन्हें इसकी जानकारी दी गई।
प्रधान के अनुसार, जब उन्हें कई महीनों बाद मामले की जानकारी हुई तो उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की। कार्रवाई न होने पर उन्होंने न्यायालय की शरण ली और पट्टा निरस्त करने की मांग की।
थानपुर में 22 बीघा भूमि के अभिलेखों में बदलाव का आरोप
मामले का दूसरा पहलू थानपुर गांव से जुड़ा है, जहां ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि लगभग 22 बीघा एहतमाली भूमि के राजस्व अभिलेखों में कथित रूप से बिना वैधानिक आदेश के बदलाव कर दिया गया। ग्रामीणों का दावा है कि भूमि को कुछ व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया, जिससे सरकारी भूमि की स्थिति पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर सामूहिक शिकायत दर्ज कराई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रशासन ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर जिलाधिकारी (राजस्व एवं वित्त) विनय पांडेय ने जांच के निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन का कहना है कि सभी अभिलेखों, आदेशों और प्रक्रिया की गहन जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों एवं व्यक्तियों के विरुद्ध विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों में आक्रोश, पारदर्शिता की मांग
दोनों गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी भूमि सार्वजनिक संपत्ति होती है और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी प्रशासन की होती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि कथित रूप से प्रभावित भूमि की स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि अनियमितताएं सिद्ध होती हैं तो भूमि को पुनः ग्राम सभा के खाते में दर्ज किया जाए।
फतेहपुर का यह मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता, राजस्व व्यवस्था और सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण से जुड़े व्यापक सवाल भी उठाता है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
"सरकारी भूमि पर जनता का अधिकार है। पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष जांच ही सुशासन की सबसे बड़ी पहचान है।"
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