नेपाल में गंडक नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में फ्लैश फ्लड की स्थिति उत्पन्न होने तथा परिणामस्वरूप गंडक नदी के जलप्रवाह में संभावित वृद्धि को ध्यान में रखते हुए सरकार के निर्देश के आलोक में मुजफ्फरपुर जिला में भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। ज़िलाधिकारी, मुजफ्फरपुर एवं वरीय पुलिस अधीक्षक, मुजफ्फरपुर द्वारा स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है। दोनों अधिकारियों ने आज भी विभिन्न विभागों के वरीय पदाधिकारियों के साथ पारू प्रखंड में गंडक नदी के किनारे अनेक स्थानों पर निरीक्षण किया तथा बाढ़ की स्थिति में तैयारियों की समीक्षा की। ज़िलाधिकारी ने माननीय विधायक श्री राजू कुमार सिंह से भी विस्तृत चर्चा की तथा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिया। ज़िलाधिकारी एवं वरीय पुलिस अधीक्षक ने स्थानीय निवासियों से भी संवाद स्थापित किया एवं उनका सुझाव लिया। अधिकारियों को स्थिति पर लगातार नजर रखने; नदी के जलस्तर, तटबंधों, निचले इलाकों, पुल-पुलियों एवं अन्य संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने तथा स्थानीय निवासियों से सतत संपर्क स्थापित रखने का निर्देश दिया गया।
जिलाधिकारी ने कहा कि *अभी स्थिति सामान्य है फिर भी हमलोग अलर्ट* हैं। गंडक नदी का जलस्तर डेंजर लेवल से लगभग डेढ़ मीटर नीचे है। आज गुरुवार को पूर्वाह्न 6 बजे रेवा घाट पर गंडक नदी में जल-स्तर 53.30 मीटर था जो खतरे के निशान 54.41 मीटर से 1.11 मीटर कम है। हमलोग जिला प्रशासन, पश्चिम चंपारण, जल संसाधन विभाग सहित सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ भी सतत समन्वय बनाए हुए हैं। अभी गंडक के जल प्रवाह की स्थिति पूरी तरह से सामान्य है। नेपाल के तिब्बत प्रभाग में, जहाँ ग्लयेशिर के फटने से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई थी, वह मुख्य बिंदु वाल्मीकिनगर बराज से लगभग 250 किलोमीटर से अधिक दूरी पर है। नेपाल के भोटेकोसी, त्रिशूली एवं नारायणी नदी होते हुए गंडक तक आते-आते जल प्रवाह की गति कम हुई है। गंडक नदी का जल स्तर भी सामान्य से कम था, जिससे इस घटना के बाद गंडक में जो अतिरिक्त डिस्चार्ज आया, उससे भयावह स्थिति नहीं बनी। वाल्मीकिनगर इलाके में 26 अगस्त, 2026 की रात 11 बजे गंडक नदी का जलस्तर 1.5 लाख क्यूसेक के उच्चतम स्तर पर रहा, जिसके बाद जलस्तर में लगातार कमी दर्ज की गई। जलश्राव के बाद भी मुजफ्फरपुर में गंडक के जलस्तर में प्रभाव अभी तक लगभग नगण्य देखा गया है। वर्तमान में किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव परिलक्षित नहीं हुआ है। प्रशासन द्वारा स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
जिलाधिकारी ने कहा कि आपदा की स्थिति में सामान्य जन-जीवन प्रभावित न हो यह सुनिश्चित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार सभी तैयारी की गई है। लोग एकदम पैनिक न हों लेकिन सजग एवं सतर्क रहें। सुरक्षित स्थानों पर रहें। बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों और बुज़ुर्ग व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखें।
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*जिलाधिकारी ने लोगों से आह्वान करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार के अफ़वाह पर ध्यान न दें। अपुष्ट, अप्रामाणिक एवं भ्रामक सूचनाओं को प्रसारित न करें। प्रशासन द्वारा दी जा रही सूचनाओं पर ही ध्यान दें तथा बाढ़ की स्थिति में बचाव हेतु सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी का अनुपालन करें।*
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ज़िलाधिकारी ने कहा कि तटबंधों की निगरानी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीम की तैनाती, सामुदायिक रसोई केन्द्रों का संचालन, सूखा राशन का वितरण, स्वास्थ्य जाँच तथा दवाओं की उपलब्धता, कुट्टी-भूसा पशु चारा का वितरण एवं पशु चिकित्सा की उपलब्धता, स्वच्छ पेयजल, शौचालय की सुविधा सहित आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण से राहत एवं बचाव कार्य संबंधी सभी तैयारियाँ पूरी की गयी है। अनुमंडल पदाधिकारी एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को लगातार क्षेत्र भ्रमण करने; बच्चों, महिलाओं, किसानों, बुजुर्गों सहित आम जनता से नियमित संवाद स्थापित करने एवं फीडबैक लेने तथा स्थिति के अनुसार तुरंत रिस्पॉन्ड करने का निदेश दिया गया है।
जिलाधिकारी ने कहा कि बाढ़ प्रभावितों के जान-माल की सुरक्षा एवं ससमय राहत पहुँचाना प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की आवश्यकता पड़ने पर आम लोगों द्वारा नियंत्रण कक्ष में संपर्क स्थापित किया जा सकता है:
(1) जिला आपातकालीन संचालन केन्द्र, मुजफ्फरपुर : 0621-2212007
(2) राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र, आपदा प्रबंधन विभाग, बिहार सरकार, पटना: हेल्पलाइन नंबर: 0612-2294204/205, आपातकालीन सहायता नंबर: 1070
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