#छतरपुर कलेक्टर के प्रतिवेदन पर संभागायुक्त ने #DPO महिला बाल विकास छतरपुर को किया 2 घंटे में निलंबित...
#छतरपुर। छतरपुर जिले की कमान संभालते ही नवागत कलेक्टर मृणाल मीणा ने प्रशासनिक ढील और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का कड़ा और स्पष्ट संदेश दे दिया है। पदभार ग्रहण करने के महज कुछ ही घंटों के भीतर कलेक्टर के कड़े प्रतिवेदन पर बड़ी कार्रवाई करते हुए रिश्वतखोरी के आरोपों से घिरे महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी दिनेश कुमार दीक्षित को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
#यह त्वरित कार्रवाई इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि छतरपुर में अब प्रशासनिक भ्रष्टाचार और मनमानी पर सख्त अंकुश रहेगा।
#दो घंटे में हुआ निलंबन का फैसला
मिली जानकारी के अनुसार, नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान पैसों के अवैध लेन-देन और रिश्वत मांगने से जुड़ा एक वीडियो एवं समाचार मीडिया में प्रसारित हुआ था। मामला संज्ञान में आते ही नवागत कलेक्टर श्री मृणाल मीणा ने बिना किसी देरी के जांच कर संभागायुक्त को विस्तृत प्रतिवेदन प्रेषित किया। कलेक्टर की संस्तुति और त्वरित पहल पर सागर संभागायुक्त श्री अनिल सुचारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए मात्र दो घंटे के भीतर निलंबन आदेश जारी कर दिए।
#आचरण नियमों के उल्लंघन पर गिरी गाज
जारी निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रसारित वीडियो और समाचार के आधार पर प्रथम दृष्टया नियुक्ति प्रक्रिया में वित्तीय अनियमितता और लेन-देन की बात प्रमाणित होती है। यह कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 का गंभीर उल्लंघन है।
#मुख्यालय सागर अटैच, नियमानुसार होगी जांच
मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत की गई इस कार्रवाई के बाद निलंबित अधिकारी श्री दिनेश कुमार दीक्षित का निलंबन अवधि के दौरान मुख्यालय संयुक्त संचालक, महिला एवं बाल विकास विभाग, सागर संभाग (सागर) निर्धारित किया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा, वहीं विभागीय स्तर पर मामले की अग्रिम वैधानिक कार्रवाई जारी रहेगी।
#कलेक्टर मृणाल मीणा के इस त्वरित और सख्त एक्शन से पूरे जिले के प्रशासनिक हलके और अधीनस्थ कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
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