*प्राचीन मुल्तान ज्योत उत्सव में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया भाग*
-सन्निहित सरोवर तक बैंड-बाजों और झांकियों के साथ निकली भव्य शोभायात्रा, भजन-कीर्तन में झूमे श्रद्धालु*
*भाजयुमो जिलाध्यक्ष साहिल सुधा रहे मुख्यातिथि*
*शहर के गणमान्य लोगों ने की शिरकत मिलकर मुल्तान ज्योत को किया प्रवाहित*
*51 कंजकों का किया पूजन*
डॉ. राजेश वधवा/कुरुक्षेत्र खबरनामा
कुरुक्षेत्र, 17 अगस्त। प्राचीन मुल्तान सभा की ओर से सन्निहित सरोवर के तट पर रविवार को ‘प्राचीन मुल्तान ज्योत (सेसा) उत्सव’ श्रद्धा और उल्लास के साथ आयोजित किया गया। धार्मिक आस्था और वर्षों पुरानी परंपरा से जुड़े इस आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। बैंड-बाजों, आकर्षक झांकियों और धार्मिक गीतों के बीच निकली शोभायात्रा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
प्राचीन मुल्तान सभा के प्रधान प्रदीप झांब ने बताया कि यह कार्यक्रम प्रत्येक वर्ष पवित्र सावन मास में प्राचीन परंपरा के अनुसार आयोजित किया जाता है। इस वर्ष 16 अगस्त को आयोजित उत्सव की शुरुआत चक्रवर्ती मोहल्ला स्थित धर्मशाला में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद दोपहर करीब 3 बजे अंबेडकर चौक से बैंड-बाजों और झांकियों के साथ भव्य शोभायात्रा सन्निहित सरोवर के लिए रवाना हुई। रास्तेभर श्रद्धालु धार्मिक गीतों पर नाचते-गाते और जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े।
सन्निहित सरोवर पहुंचने पर शाम करीब 4 बजे श्री कृष्ण कृपा सेवा समिति की ओर से भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। करीब दो घंटे तक चले कार्यक्रम में श्रद्धालु भजनों पर झूमते हुए प्रभु भक्ति में लीन नजर आए। देर शाम सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर धार्मिक विधि-विधान के साथ मुल्तान ज्योत को सन्निहित सरोवर में प्रवाहित किया। इसके बाद 51 कंजकों का पूजन किया गया और श्रद्धालुओं को हलवा-छोले का प्रसाद वितरित किया गया।
कार्यक्रम में भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष साहिल सुधा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और श्रद्धालुओं को मुल्तान ज्योत उत्सव की शुभकामनाएं दीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में अशोक खंडूजा और पावन नरूला उपस्थित रहे।
प्रधान प्रदीप झांब ने कहा कि मुल्तान ज्योत उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को अपनी प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का माध्यम भी है। सभा द्वारा वर्षों से इस परंपरा को श्रद्धापूर्वक आगे बढ़ाया जा रहा है।
कार्यक्रम में महासचिव धर्मेंद्र सचदेवा, डॉ. एसी नागपाल, डॉ. सुरेंद्र मेहता, डॉ. अंशुल ग्रोवर, डॉ. देश ललित, डॉ. विवेक ललित, संदीप मदान, राजन चावला, फतेहचंद गांधी, मुल्खराज अरोड़ा, अमीर चंद, कृष्ण लाल पुंडरी, मास्टर ओमप्रकाश, पार्षद सुधीर चुघ,
टोनी मदान, मोहन लाल अरोड़ा, पंकज खन्ना, महेंद्र मेहता, यशपाल नारंग, सुरेश धवन, प्रेम मदान, एडवोकेट संजीव धवन, राजू झांब, देवेंद्र चावला, जितेंद्र अरोड़ा, महेश तनेजा, डॉ. श्यामलाल आहूजा, कृष्ण धवन, खेम चंद वाधवा, विनीत बजाज, कृष्ण लाल मेहता, सुरेंद्र काठपाल, पंडित अंकित शर्मा, नंदलाल धवन, ओम प्रकाश अरोड़ा, सुभाष सुखीजा, कृष्ण सचदेवा, रविंद्र सेठी, जगदीश सचदेवा, सुनील राजपाल, प्रेम ग्रोवर, वेद प्रकाश धवन, विनोद सहगल, कृष्ण धमीजा, अशोक सचदेवा, ओपी आहूजा, विकास चुघ, सुरेश मल्होत्रा, कुणाल झांब, पंकज अरोड़ा, नरेश सोनी, गुलशन ग्रोवर, जोगिंदर झांब, राजीव चुघ, बिट्टू नय्यर, श्याम सुंदर जुनेजा, ममता आहूजा, पूजा सरदाना, कमलेश, संतोष और इंदु बाला सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
23 अगस्त को हरिद्वार रवाना होगी मुल्तान ज्योत
प्रदीप झांब ने बताया कि रविवार, 23 अगस्त को मुल्तान ज्योत चक्रवर्ती मोहल्ला स्थित धर्मशाला से हरिद्वार के लिए रवाना होगी। दो बसों में सवार होकर श्रद्धालु हरिद्वार जाएंगे। पूर्व मंत्री सुभाष सुधा बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। उन्होंने बताया कि पिछले करीब 12 वर्षों से सभा द्वारा नि:शुल्क बसों के माध्यम से मुल्तान समाज के श्रद्धालुओं को हरिद्वार ले जाया जा रहा है।
हरिद्वार पहुंचने के बाद शाम 5 बजे भीमगोड़ा स्थित जयराम आश्रम विद्यापीठ से शोभायात्रा निकाली जाएगी और सभी की सुख-समृद्धि की कामना के साथ मां गंगा में ज्योत प्रवाहित की जाएगी।
अविभाजित भारत के मुल्तान से जुड़ा है ज्योत का इतिहास
प्रदीप झांब के अनुसार सावन के महीने में आयोजित होने वाली मुल्तान ज्योत का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह परंपरा भगवान शिव के प्रति आस्था से जुड़ी है। इसकी शुरुआत अविभाजित भारत के मुल्तान जिले, जो अब पाकिस्तान में है, के रहने वाले लाला रूप चंद्र मुल्तानी ने अपने साथियों के साथ की थी।
बताया जाता है कि उस समय मुल्तान क्षेत्र में नदियों की बाढ़ और तूफानों से होने वाले जान-माल के नुकसान से मुक्ति की कामना को लेकर लाला रूप चंद्र मुल्तानी अपने साथियों के साथ पैदल हरिद्वार पहुंचे थे और मां गंगा में ज्योत प्रवाहित की थी। तभी से यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती चली आ रही है और आज भी मुल्तान समाज इसे पूरी श्रद्धा के साथ निभा रहा है।