समस्तीपुर यूएन पेलेस मोहनपुर में जदयू महिला प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित जीविका के 20 साल बेमिसाल कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में जदयू के वरिष्ठ नेता बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने संबोधित करते हुए कहा कि बापू का सपना, नारी का सम्मान “परिवर्तन” की पहचान 2 अक्टूबर 2026 को जीविका के 20 साल पूरे होने पर नीतीश संवाद जीविका के 20 साल बेमिसाल है।महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में जो कार्य बिहार में युगपुरुष श्री नीतीश कुमार जी ने किया, स्वतंत्र भारत के इतिहास में उतना कार्य कहीं और नहीं हुआ। आज यह निर्विवाद सत्य है कि महिलाएं जदयू का सबसे मजबूत आधार हैं और श्री नीतीश कुमार आधी आबादी के सबसे बड़े पैरोकार हैं। श्री नीतीश कुमार ने अपने 20 वर्षों के कार्यकाल में महिलाओं को सम्मान और स्थान देने के लिए जिस प्रतिबद्धता के साथ काम किया है, उसका लोहा पूरी दुनिया मानती है।चाहे वो साइकिल योजना हो, पोशाक योजना हो, कन्या उत्थान योजना हो, पंचायती राज, नगर निकाय और प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति में 50% आरक्षण हो, सरकारी नौकरी और पुलिस में 35% आरक्षण हो, महिला उद्यमी योजना हो, महिला रोजगार योजना हो—महिलाओं के शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए उन्होंने हर काम किया।लेकिन 50% आरक्षण के बाद आधी आबादी को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनके द्वारा किया गया सबसे बड़ा काम निःसंदेह ‘जीविका’ है, जिसे आगे चलकर केन्द्र सरकार ने ‘आजीविका’ के रूप में पूरे देश के लिए अपनाया। 2 अक्टूबर 2006 को ‘जीविका’ की शुरुआत हुई और इस साल 2 अक्टूबर को उसके 20 साल पूरे हो रहे हैं। इन 20 वर्षों में ‘जीविका’ ने हमारे गांवों की सूरत और सीरत दोनों बदलने का काम किया। आज से 20 साल पहले के गांवों को याद करिए। महिलाएं कितनी बेबसी, लाचारी और अभाव में जीवन बसर करती थीं। वे पाई-पाई को मोहताज रहती थीं। हमारे नेता ने उन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सपना देखा और उसी सपने से ‘जीविका’ का जन्म हुआ। 2006 में ‘जीविका’ को विश्व बैंक की सहायता से एक छोटे प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया, जो देखते ही देखते सरकारी कार्यक्रम की जगह बिहार का सबसे बड़ा सामाजिक आंदोलन बन गया।हमारे नेता की दूरदर्शी सोच और उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति की बदौलत आज 13 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बिहार की एक करोड़ 88 लाख से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। जो महिलाएं हर कदम पर किसी न किसी का सहारा ढूंढती थीं, आज वो राज्य की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ‘जीविका’ केवल गांवों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि समय के साथ-साथ इसका और भी विस्तार हो रहा है। शहरी क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों की संख्या वर्तमान में 77 हजार से अधिक हो गई है और इन स्वयं सहायता समूहों के तहत 11 लाख 84 हजार जीविका दीदियां जुड़ी हैं। ‘जीविका’ के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक तौर पर सशक्त बनाने का प्रयास लगातार जारी है। रोजगार के कई क्षेत्रों में जुड़ने से महिलाओं की आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और वर्तमान समय में 50 लाख से अधिक लखपति दीदियां बन चुकी हैं।हमारे नेता आदरणीय श्री नीतीश कुमार जी का हमेशा से ये मानना रहा कि महिलाओं की पहुंच बैंकिंग सेवाओं तक अवश्य होनी चाहिए, जिससे वो अपनी बचत को बेहतर तरीके से संभाल सकें। इसी बात को ध्यान में रखते हुए जीविका दीदियों को बैंकिंग सेवा से जोड़ने एवं बैंकों तक उनकी पहुंच बढ़ाने के मकसद से 6 हजार 749 बैंक सखियों द्वारा ग्राहक सेवा केन्द्र खुलवाए गए हैं। महिलाओं को स्वरोजगार में मदद करने हेतु 11 लाख 10 हजार स्वयं सहायता समूह के बैंक खाते खोले गए हैं और उन्हें 75 हजार करोड़ रुपए का ऋण उपलब्ध कराया गया है।
समस्तीपुर विधायक अश्वमेघ देवी ने कहा कि जीविका दीदियों के हुनर को लगातार नए आयामों से जोड़ा जा रहा है। आज उनकी मदद से अस्पतालों, पुलिस प्रशिक्षण केन्द्रों एवं आवासीय विद्यालयों में 334 “जीविका दीदी की रसोई” संचालित की जा रही हैं। सिलाई कार्यक्रम के तहत 15 जिलों में 40 हजार से अधिक जीविका दीदियों को प्रशिक्षण देकर उनको रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही, जीविका समूहों द्वारा बिहार के 332 प्रखंडों में महिलाओं की सहायता, कानूनी जागरूकता और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए “दीदी अधिकार केन्द्र” का संचालन किया जा रहा है।आज गांव-गांव में जीविका दीदियां पशुधन गतिविधियों में भी शामिल हैं। वर्तमान में 15 लाख 79 हजार समूह सदस्य पशुपालन आधारित आजीविका से जुड़े हैं, जिनमें 8 हजार 700 पशु सखियां शामिल हैं। अररिया की सीमांचल बकरी उत्पादक कंपनी से 19 हजार 956 परिवार जुड़े हैं, जबकि कोसी प्रमंडल की कौशिकी दुग्ध उत्पादक कंपनी के 889 दुग्ध संग्रहण केन्द्रों से 38 हजार 561 पशुपालक जुड़े हैं। इन केन्द्रों से औसतन लगभग 72 हजार लीटर दूध संग्रहित किया जा रहा है।
हसनपुर विधायक राजकुमार राय ने कहा कि गैर कृषि-क्षेत्र की बात करें तो ‘जीविका’ के तहत 792 उत्पादक समूह एवं 5 उत्पादक कंपनियां गठित की गई हैं। 4 लाख 98 हजार से अधिक परिवार उद्यमिता विकास एवं रोजगार सृजन से जुड़े हैं। राज्य में 11 हजार 855 से अधिक महिलाएं मधुमक्खी पालन से जुड़ी हैं, जिनके माध्यम से 4 हजार 340 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन कर जीविका दीदियों ने बड़ी सफलता हासिल की है। आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के तहत जरूरतमंद परिवारों को व्यावसायिक वाहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा स्वास्थ्य एवं पोषण को ध्यान में रखते हुए राज्य में 45 स्वास्थ्य सहायता केन्द्र स्थापित किए गए हैं। बक्सर जिले में सेनेटरी नैपकिन निर्माण उद्यम इसका उदाहरण है।
वारिस नगर विधायक डॉ मांजरीक मृणाल ने कहा कि जीविका के माध्यम से जुड़ी महिलाओं के स्वरोजगार के लिए हमारे नेता श्री नीतीश कुमार जी ने क्रांतिकारी निर्णय लेते हुए “महिला रोजगार योजना” की शुरुआत की। बिहार देश का पहला राज्य है, जहाँ ऐसी योजना की शुरुआत हुई। इस योजना के तहत राज्य के प्रत्येक परिवार की एक महिला को स्वरोजगार हेतु 2 लाख 10 हजार रुपए देने का प्रावधान किया गया। अब तक एक करोड़ 81 लाख महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपए की राशि प्रथम किस्त के तौर पर हस्तांतरित कर दी गई है, वहीं 61 हजार से अधिक लाभुकों के खाते में 20 हजार रुपए की दूसरी किस्त भी सफलतापूर्वक भेजी गई है।
पूर्व विधायक अशोक कुमार मुन्ना ने कहा कि विकासपुरुष श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में जीविका दीदियों ने सिर्फ घर चलाना नहीं सीखा, बल्कि व्यवस्था चलाना भी सीखा। जिन महिलाओं को कभी घर की चौखट लांघने की इजाजत नहीं थी, आज वे विभिन्न भूमिकाओं में रहते हुए गांवों की अर्थव्यवस्था को चला रही हैं। जब बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई तो जीविका दीदियों ने नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए घर-घर जाकर जागरूकता फैलाने का काम किया। “जल-जीवन-हरियाली” अभियान के तहत पर्यावरण को बचाने के लिए इन दीदियों ने लाखों पौधे भी लगाए।
कार्यक्रम प्रभारी रीना चौधरी ने कहा कि जीविका’ के 20 वर्षों का यह सफर इस बात का प्रमाण है कि यदि सही नेतृत्व और सही नीति हो, तो समाज का सबसे कमजोर तबका भी इतिहास रच सकता है। श्री नीतीश कुमार जी ने महिलाओं के हाथ में सिर्फ पैसा ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें निर्णय लेने का अधिकार भी दिया। उनकी स्पष्ट सोच रही कि ग्रामीण परिवारों की आय में स्थायी वृद्धि हो, आजीविका के स्रोतों में विविधता आए और महिलाएं परिवार के आर्थिक निर्णयों में अग्रणी भूमिका निभाएं।जीविका की सबसे बड़ी ताकत इसकी सामुदायिक संरचना है। हमारी ग्रामीण महिलाएं स्वयं अपने समूहों का संचालन कर रही हैं, बचत और ऋण की गतिविधियों को आगे बढ़ा रही हैं, आजीविका के नए अवसर तलाश रही हैं और अपने गांव-समाज के विकास में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं। यह परिवर्तन केवल आर्थिक नहीं है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी आधार बन रहा है।हमारे नेता ने “जीविका” के माध्यम से जब इतना बड़ा इतिहास रच दिया तो हमारा भी फर्ज बनता है कि हम अपने नेता का आभार जताएं और जीविका की उपलब्धियों को घर-घर पहुंचाएं। इसी उद्देश्य से हमलोग ये कार्यक्रम कर रहे हैं, जिसे नाम दिया गया है—“नीतीश संवाद : जीविका के 20 साल बेमिसाल”। यह महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ‘आधी आबादी’ का उत्सव और सम्मान है। निःसंदेह हर बिहारवासी के लिए ये गौरव का क्षण है।इस कार्यक्रम का अध्यक्षता जद यू महिला प्रकोष्ठ के जिला बिरिया देवी ने किया। संचालन जदयू जिला सचिव मनीषा कुमारी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन जदयू जिलाध्यक्ष डॉ दुर्गेश राय ने किया।
अनस रिजवान
जिला प्रवक्ता जद यू समस्तीपुर।