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गोबर से वर्मी कम्पोस्ट तथा गोमूत्र से फिनाइल, जैविक उत्पाद एवं अन्य उपयोगी सामग्री तैयार कर उनके विपणन के माध्यम से आय के नए स्रोत विकसित किए जाये- राज्यमंत्री श्री पटेल == मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार गौमाता के भरण-पोषण के लिए प्रति गाय 1200 रुपये प्रतिमाह उपलब्ध करा रही है- राज्यमंत्री श्री लोधी == गोबर व गोमूत्र आधारित उत्पादों के निर्माण और विपणन से बढ़ेगी आय, == शासन पर निर्भरता कम करने की अपील == गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर, तेंदूखेड़ा स्थित दयोदय गौशाला में जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित == गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को तेंदूखेड़ा स्थित दयोदय गौशाला में जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में जिले की विभिन्न गौशालाओं के संचालकों ने भाग लेकर अपने सुझाव एवं अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल तथा संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्मेंद्र सिंह लोधी मुख्य रूप में उपस्थित रहे। राज्यमंत्री श्री लोधी ने कहा कि प्रदेश सरकार गौसंरक्षण और गोसेवा के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार गौमाता के भरण-पोषण के लिए प्रति गाय 1200 रुपये प्रतिमाह उपलब्ध करा रही है तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को भी सहायता प्रदान की जा रही है। राज्यमंत्री श्री पटेल ने कहा दमोह जिले में संचालित 56 गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने गौशाला संचालकों से गोबर से वर्मी कम्पोस्ट तथा गोमूत्र से फिनाइल, जैविक उत्पाद एवं अन्य उपयोगी सामग्री तैयार कर उनके विपणन के माध्यम से आय के नए स्रोत विकसित करने का आह्वान किया। आनंदधाम के पीठाधीश्वर रंजीतानंद स्वामी ने कहा गौमाता सदैव पूजनीय रही हैं, लेकिन स्वार्थवश उन्हें सड़कों पर छोड़ देना गंभीर भूल है। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से गौ संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। स्वामी अखलेंद्रनाथ ने कहा यदि प्रत्येक परिवार एक गौमाता का पालन करने का संकल्प ले, तो निराश्रित गौवंश की समस्या स्वतः काफी हद तक समाप्त हो सकती है

Damoh, Madhya Pradesh | Jul 10, 2026

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सड़क सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन गंभीर

कलेक्टर श्री प्रताप नारायण यादव ने सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिले के दुर्घटना संभावित स्थलों पर आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने, अतिक्रमण हटाने तथा सड़क दुर्घटना से संबंधित शासकीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लोगों का जीवन अमूल्य है और उसकी सुरक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है।

सड़क सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन गंभीर कलेक्टर श्री प्रताप नारायण यादव ने सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिले के दुर्घटना संभावित स्थलों पर आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने, अतिक्रमण हटाने तथा सड़क दुर्घटना से संबंधित शासकीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लोगों का जीवन अमूल्य है और उसकी सुरक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है।

Damoh, Madhya Pradesh | Jul 10, 2026

निश्चित ही उप-स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण से ग्राम वासियों सहित अन्य ग्रामों के नागरिक जनों को स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होगा- राज्यमंत्री श्री लोधी
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65 लाख रुपये की लागत से नवनिर्मित उप-स्वास्थ्य केन्द्र का राज्यमंत्री श्री लोधी ने किया लोकार्पण
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            जबेरा विधानसभा अंतर्गत ग्राम बिलतरा में 65 लाख रुपये की लागत से नवनिर्मित उप-स्वास्थ्य केन्द्र का प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग राज्यमंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने लोकार्पण किया।

            राज्यमंत्री लोधी ने कहा निश्चित ही इसके निर्माण से ग्राम वासियों सहित अन्य ग्रामों के नागरिक जनों को स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होगा। इस ग्राम में शासकीय भूमि ना होने के कारण निर्माण कार्य लगभग 2 वर्षों से रूका हुआ था। ग्राम के रजक परिवार के द्वारा रोड़ से लगी हुई भूमि को दान दिया, जिसके कारण निर्माण कार्य हो सका। मैं ऐसे परिवार का साधुवाद ज्ञापित करता हूं जिन्होंने समाज के हित के लिए कार्य किया है।

निश्चित ही उप-स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण से ग्राम वासियों सहित अन्य ग्रामों के नागरिक जनों को स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होगा- राज्यमंत्री श्री लोधी == 65 लाख रुपये की लागत से नवनिर्मित उप-स्वास्थ्य केन्द्र का राज्यमंत्री श्री लोधी ने किया लोकार्पण == जबेरा विधानसभा अंतर्गत ग्राम बिलतरा में 65 लाख रुपये की लागत से नवनिर्मित उप-स्वास्थ्य केन्द्र का प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग राज्यमंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने लोकार्पण किया। राज्यमंत्री लोधी ने कहा निश्चित ही इसके निर्माण से ग्राम वासियों सहित अन्य ग्रामों के नागरिक जनों को स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होगा। इस ग्राम में शासकीय भूमि ना होने के कारण निर्माण कार्य लगभग 2 वर्षों से रूका हुआ था। ग्राम के रजक परिवार के द्वारा रोड़ से लगी हुई भूमि को दान दिया, जिसके कारण निर्माण कार्य हो सका। मैं ऐसे परिवार का साधुवाद ज्ञापित करता हूं जिन्होंने समाज के हित के लिए कार्य किया है।

Damoh, Madhya Pradesh | Jul 10, 2026

घायल बाघिन को उपचार के लिए जबलपुर भेजा गया, विशेषज्ञों की निगरानी में होगा विस्तृत परीक्षण
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मोहली परिक्षेत्र में श्रमिक पर हमले के बाद लगातार निगरानी, पैरों में सूजन और पेट खाली मिलने पर लिया गया निर्णय
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            वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के मोहली परिक्षेत्र में 5 जुलाई 2026 को एक श्रमिक पर बाघ के हमले की घटना के बाद वन विभाग द्वारा लगातार निगरानी और खोज अभियान चलाया गया। श्रमिक एवं गश्त पर मौजूद महिला वनरक्षक के अनुसार हमलावर बाघ के पंजे छोटे थे, जिसके आधार पर क्षेत्र में सर्चिंग की गई।

            7 जुलाई को वन विभाग को लगभग 15 से 18 माह आयु की एक बाघिन मिली, जिसके हमले में शामिल होने की संभावना जताई गई। इसके बाद हाथियों की सहायता से लगातार गश्त कर बाघिन के व्यवहार का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान महावतों एवं अधिकारियों ने पाया कि बाघिन कई दिनों से भूखी प्रतीत हो रही है तथा उसके पिछले पैरों में चोट या अन्य समस्या के कारण उसकी चाल सामान्य नहीं थी।

            वनमण्डलाधिकारी ने बताया स्थिति से मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक, मध्यप्रदेश को अवगत कराया गया। उनके निर्देश पर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के वन्यजीव विशेषज्ञ एवं चिकित्सक डॉ. गुरुदत्त शर्मा तथा सेंटर फॉर वाइल्ड लाइफ हेल्थ एंड फॉरेंसिक, जबलपुर की विशेषज्ञ टीम को परीक्षण के लिए बुलाया गया। उन्होने बताया 9 जुलाई की सुबह हाथियों की सहायता से पुनः सर्चिंग कर बाघिन का पता लगाया गया। विशेषज्ञ दल ने सुरक्षित तरीके से उसे निश्चेतक कर स्वास्थ्य परीक्षण किया, जिसमें उसका पेट लगभग खाली तथा पैरों में सूजन पाई गई।

            वन विभाग ने बाघिन के विस्तृत चिकित्सकीय परीक्षण एवं समुचित उपचार के लिए उसे सेंटर फॉर वाइल्ड लाइफ हेल्थ एंड फॉरेंसिक, जबलपुर भेज दिया है। वहां विशेषज्ञों की निगरानी में उसका उपचार एवं स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।

घायल बाघिन को उपचार के लिए जबलपुर भेजा गया, विशेषज्ञों की निगरानी में होगा विस्तृत परीक्षण === मोहली परिक्षेत्र में श्रमिक पर हमले के बाद लगातार निगरानी, पैरों में सूजन और पेट खाली मिलने पर लिया गया निर्णय === वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के मोहली परिक्षेत्र में 5 जुलाई 2026 को एक श्रमिक पर बाघ के हमले की घटना के बाद वन विभाग द्वारा लगातार निगरानी और खोज अभियान चलाया गया। श्रमिक एवं गश्त पर मौजूद महिला वनरक्षक के अनुसार हमलावर बाघ के पंजे छोटे थे, जिसके आधार पर क्षेत्र में सर्चिंग की गई। 7 जुलाई को वन विभाग को लगभग 15 से 18 माह आयु की एक बाघिन मिली, जिसके हमले में शामिल होने की संभावना जताई गई। इसके बाद हाथियों की सहायता से लगातार गश्त कर बाघिन के व्यवहार का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान महावतों एवं अधिकारियों ने पाया कि बाघिन कई दिनों से भूखी प्रतीत हो रही है तथा उसके पिछले पैरों में चोट या अन्य समस्या के कारण उसकी चाल सामान्य नहीं थी। वनमण्डलाधिकारी ने बताया स्थिति से मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक, मध्यप्रदेश को अवगत कराया गया। उनके निर्देश पर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के वन्यजीव विशेषज्ञ एवं चिकित्सक डॉ. गुरुदत्त शर्मा तथा सेंटर फॉर वाइल्ड लाइफ हेल्थ एंड फॉरेंसिक, जबलपुर की विशेषज्ञ टीम को परीक्षण के लिए बुलाया गया। उन्होने बताया 9 जुलाई की सुबह हाथियों की सहायता से पुनः सर्चिंग कर बाघिन का पता लगाया गया। विशेषज्ञ दल ने सुरक्षित तरीके से उसे निश्चेतक कर स्वास्थ्य परीक्षण किया, जिसमें उसका पेट लगभग खाली तथा पैरों में सूजन पाई गई। वन विभाग ने बाघिन के विस्तृत चिकित्सकीय परीक्षण एवं समुचित उपचार के लिए उसे सेंटर फॉर वाइल्ड लाइफ हेल्थ एंड फॉरेंसिक, जबलपुर भेज दिया है। वहां विशेषज्ञों की निगरानी में उसका उपचार एवं स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।

Damoh, Madhya Pradesh | Jul 10, 2026

श्रमिक पर हमले के बाद घायल बाघिन का रेस्क्यू, उपचार के लिए जबलपुर भेजा गया

सागर। वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व (वीडीटीआर) के मोहली परिक्षेत्र में एक श्रमिक पर हमले की घटना के बाद वन विभाग ने घायल बाघिन का रेस्क्यू कर उसे उपचार के लिए जबलपुर स्थित सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ हेल्थ एंड फॉरेंसिक (सीडब्ल्यूएचएफ) भेज दिया है। बाघिन की उम्र करीब 15 से 18 माह बताई गई है।

वन विभाग के अनुसार 5 जुलाई को गश्त के दौरान एक श्रमिक पर बाघ ने हमला कर उसे घायल कर दिया था। मौके पर मौजूद महिला वनरक्षक ने बताया था कि हमलावर बाघ के पंजे छोटे थे। इसके बाद वन विभाग ने क्षेत्र में सर्च अभियान शुरू किया।

7 जुलाई को सर्चिंग के दौरान करीब 15 से 18 माह की एक बाघिन मिली। आशंका जताई गई कि संभवतः इसी बाघिन ने श्रमिक पर हमला किया था। इसके बाद हाथियों की मदद से लगातार उसकी निगरानी की गई।

8 जुलाई को महावतों और वन अधिकारियों ने देखा कि बाघिन कई दिनों से भूखी थी और उसके पिछले पैरों में चोट के कारण चलने में परेशानी हो रही थी। इसकी जानकारी मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक को दी गई। उनके निर्देश पर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के वन्यजीव विशेषज्ञ एवं पशु चिकित्सक डॉ. गुरुदत्त शर्मा तथा जबलपुर स्थित सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ हेल्थ एंड फॉरेंसिक की विशेषज्ञ टीम को बुलाया गया।

विशेषज्ञ दल ने हाथियों की सहायता से बाघिन का दोबारा पता लगाकर उसे सुरक्षित निश्चेतक किया। प्राथमिक परीक्षण में उसका पेट लगभग खाली मिला तथा पिछले पैरों में सूजन पाई गई। चिकित्सकों की सलाह पर विस्तृत जांच और उपचार के लिए बाघिन को जबलपुर भेज दिया गया।

वन विभाग ने बताया कि बाघिन की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। साथ ही क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है और ग्रामीणों से जंगल में अकेले नहीं जाने की अपील की गई है।

श्रमिक पर हमले के बाद घायल बाघिन का रेस्क्यू, उपचार के लिए जबलपुर भेजा गया सागर। वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व (वीडीटीआर) के मोहली परिक्षेत्र में एक श्रमिक पर हमले की घटना के बाद वन विभाग ने घायल बाघिन का रेस्क्यू कर उसे उपचार के लिए जबलपुर स्थित सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ हेल्थ एंड फॉरेंसिक (सीडब्ल्यूएचएफ) भेज दिया है। बाघिन की उम्र करीब 15 से 18 माह बताई गई है। वन विभाग के अनुसार 5 जुलाई को गश्त के दौरान एक श्रमिक पर बाघ ने हमला कर उसे घायल कर दिया था। मौके पर मौजूद महिला वनरक्षक ने बताया था कि हमलावर बाघ के पंजे छोटे थे। इसके बाद वन विभाग ने क्षेत्र में सर्च अभियान शुरू किया। 7 जुलाई को सर्चिंग के दौरान करीब 15 से 18 माह की एक बाघिन मिली। आशंका जताई गई कि संभवतः इसी बाघिन ने श्रमिक पर हमला किया था। इसके बाद हाथियों की मदद से लगातार उसकी निगरानी की गई। 8 जुलाई को महावतों और वन अधिकारियों ने देखा कि बाघिन कई दिनों से भूखी थी और उसके पिछले पैरों में चोट के कारण चलने में परेशानी हो रही थी। इसकी जानकारी मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक को दी गई। उनके निर्देश पर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के वन्यजीव विशेषज्ञ एवं पशु चिकित्सक डॉ. गुरुदत्त शर्मा तथा जबलपुर स्थित सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ हेल्थ एंड फॉरेंसिक की विशेषज्ञ टीम को बुलाया गया। विशेषज्ञ दल ने हाथियों की सहायता से बाघिन का दोबारा पता लगाकर उसे सुरक्षित निश्चेतक किया। प्राथमिक परीक्षण में उसका पेट लगभग खाली मिला तथा पिछले पैरों में सूजन पाई गई। चिकित्सकों की सलाह पर विस्तृत जांच और उपचार के लिए बाघिन को जबलपुर भेज दिया गया। वन विभाग ने बताया कि बाघिन की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। साथ ही क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है और ग्रामीणों से जंगल में अकेले नहीं जाने की अपील की गई है।

Damoh, Damoh | Jul 10, 2026