करोड़ों खर्च किए, लेकिन एक कलवर्ट नहीं लगाया… अब सड़क तबाही के कगार पर!
बखोल–टापरी–पोहल सड़क की यह तस्वीर सिर्फ सड़क की बदहाली नहीं, बल्कि विभागीय लापरवाही की पूरी कहानी बयां कर रही है।करोड़ों रुपये खर्च करके सड़क बनाई गई, लेकिन जिस नाले में पानी की निकासी के लिए समय रहते कलवर्ट/पुलिया लगनी चाहिए थी, वहां आज तक उचित व्यवस्था नहीं की गई।नतीजा सामने है—पानी ने सड़क को काटना शुरू कर दिया है और अब इसका सीधा खतरा शिमला–रोहड़ू नेशनल हाईवे पर भी मंडरा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल विभाग से है—
जब करोड़ों रुपये सड़क पर खर्च किए जा रहे थे, तब JE, SDO और XEN कहां थे? क्या किसी अधिकारी ने निर्माण के दौरान मौके पर जाकर यह देखा कि बरसात का पानी किस रास्ते से निकलेगा? अगर समय रहते इस नाले में एक उचित कलवर्ट लगा दिया जाता, तो आज सरकार के करोड़ों रुपये के नुकसान और सड़क की इस दुर्दशा से बचा जा सकता था। यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं है—जहां लापरवाही से नुकसान को रोका जा सकता था, वहां जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
अब सवाल यह है कि इस नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
जनता के पैसे से सड़क बनाना ही काफी नहीं है—उसकी गुणवत्ता, जल निकासी और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी विभाग की है।
👉 विभाग मौके पर आए, स्थिति का जायजा ले और जनता को बताए कि आखिर इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है?
सरकारी पैसा जनता का है… इसे लापरवाही के नाले में बहने नहीं दिया जा सकता।
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