#सफलता_की_कहानी
उन्नत गेहूँ किस्म DBW 303 (करण वैष्णवी) ने बदली किसान की तस्वीर: बढ़ी उत्पादकता, गुणवत्ता और आय
आधुनिक कृषि तकनीकों, गुणवत्तायुक्त बीजों एवं वैज्ञानिक खेती पद्धतियों को अपनाकर किसान अपनी आय एवं उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। इसका उत्कृष्ट उदाहरण झाबुआ जिले के विकासखंड रामा अंतर्गत ग्राम रूपरेल के प्रगतिशील कृषक श्री रूपला देवल, पिता श्री नाना देवल ने प्रस्तुत किया है। कृषि विभाग के मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहयोग से उन्होंने गेहूँ की उन्नत किस्म DBW 303 (करण वैष्णवी) का सफल प्रदर्शन कर न केवल अपनी उत्पादकता बढ़ाई, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक मॉडल स्थापित किया है।
श्री रूपला देवल एक मध्यम श्रेणी के कृषक हैं, जिनके पास कुल 3.8 हेक्टेयर कृषि भूमि उपलब्ध है। वे वर्षों से पारंपरिक कृषि पद्धतियों के साथ खेती करते रहे हैं, लेकिन बदलते समय के साथ उन्होंने वैज्ञानिक खेती को अपनाने का निर्णय लिया। कृषि विभाग द्वारा उन्नत बीजों एवं आधुनिक कृषि तकनीकों के संबंध में दिए गए प्रशिक्षण एवं परामर्श से प्रेरित होकर उन्होंने वर्ष 2025-26 में अपने खेत के 0.4 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूँ की उन्नत किस्म DBW 303 (करण वैष्णवी) का प्रदर्शन किया।
पारंपरिक खेती से आधुनिक खेती की ओर बढ़ाया कदम
वर्ष 2024-25 में श्री रूपला देवल द्वारा गेहूँ की प्रचलित किस्म JW 3382 की खेती की गई थी। इस दौरान उन्होंने प्रति एकड़ 40 किलोग्राम बीज का उपयोग किया तथा 20 सेंटीमीटर पंक्ति से पंक्ति एवं 5 से 7 सेंटीमीटर पौधे से पौधे की दूरी के साथ बुवाई की। इस किस्म से उन्हें लगभग 19 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त हुआ, जिसमें से लगभग 15 क्विंटल प्रति एकड़ गेहूँ का विक्रय किया गया।
हालांकि उत्पादन संतोषजनक था, लेकिन अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता एवं अधिक लाभ प्राप्त करने की इच्छा ने उन्हें उन्नत किस्मों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में उन्होंने वर्ष 2025-26 में DBW 303 (करण वैष्णवी) किस्म का चयन किया।
वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर प्राप्त की सफलता
श्री रूपला देवल ने केवल उन्नत बीज का ही उपयोग नहीं किया, बल्कि संपूर्ण खेती प्रक्रिया को वैज्ञानिक पद्धति से अपनाया। उन्होंने बीजोपचार कर बीज जनित रोगों से सुरक्षा सुनिश्चित की, संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाया, समय पर बुवाई की तथा खरपतवार नियंत्रण एवं सिंचाई प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया। आवश्यकता आधारित सिंचाई एवं कृषि विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए कृषि प्रबंधन उपायों के कारण फसल की वृद्धि एवं विकास बेहतर हुआ।
उन्होंने प्रति एकड़ 40 किलोग्राम बीज दर, 20 सेंटीमीटर पंक्ति दूरी तथा 5 से 7 सेंटीमीटर पौध दूरी का पालन करते हुए वैज्ञानिक विधि से फसल उत्पादन किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई।
उत्पादन और आय में हुई महत्वपूर्ण वृद्धि
उन्नत किस्म DBW 303 (करण वैष्णवी) के उपयोग से श्री रूपला देवल के गेहूँ उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। जहां पूर्व में उन्हें 19 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त होता था, वहीं नई किस्म से उत्पादन बढ़कर 21 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच गया। इसी प्रकार विक्रय योग्य उत्पादन भी 15 क्विंटल प्रति एकड़ से बढ़कर 17 क्विंटल प्रति एकड़ हो गया।
उत्पादन वृद्धि के साथ-साथ उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इस उन्नत तकनीक एवं किस्म के उपयोग से उन्हें लगभग ₹27,000 का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ तथा लागत-लाभ अनुपात 1:1.5 दर्ज किया गया, जो इस तकनीक की आर्थिक उपयोगिता को प्रमाणित करता है।
DBW 303 (करण वैष्णवी) की प्रमुख विशेषताएं
DBW 303 (करण वैष्णवी) गेहूँ की एक उन्नत एवं उच्च उत्पादकता वाली किस्म है, जो किसानों के लिए कई दृष्टियों से लाभकारी सिद्ध हो रही है। इस किस्म की प्रमुख विशेषताएं जिसमें उच्च उत्पादन क्षमता वाली उन्नत किस्म, लगभग 12.1 प्रतिशत प्रोटीन युक्त गुणवत्तापूर्ण गेहूँ उत्पादन, पीला, भूरा एवं काला रतुआ रोगों के प्रति प्रतिरोधी, करनाल बंट रोग के प्रति प्रतिरोधक क्षमता, बेहतर दाना गुणवत्ता एवं बाजार में अधिक स्वीकार्यता, विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता हैं।
अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणास्रोत
श्री रूपला देवल की सफलता ने ग्राम रूपरेल एवं आसपास के क्षेत्रों के किसानों का ध्यान आकर्षित किया है। उनकी खेती पद्धति, उन्नत बीजों का चयन एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों के सफल उपयोग से प्रेरित होकर अनेक किसान अब उन्नत गेहूँ किस्मों को अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं। कृषि विभाग भी उनके खेत को प्रदर्शन एवं प्रेरणा स्थल के रूप में उपयोग कर अन्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्रदान कर रहा है।
सफलता का संदेश
श्री रूपला देवल की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि किसान गुणवत्तायुक्त बीज, वैज्ञानिक कृषि तकनीक, संतुलित पोषण प्रबंधन एवं आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाएं, तो कम क्षेत्र में भी अधिक उत्पादन एवं बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है। आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रभावी उपयोग न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है, बल्कि कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
आज श्री रूपला देवल की यह उपलब्धि जिले के किसानों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है और यह संदेश दे रही है कि वैज्ञानिक खेती ही समृद्ध किसान का आधार है।
Jansampark Madhya Pradesh CM Madhya Pradesh Indore Commissioner Department of Agriculture, Madhya Pradesh #jhabua #JansamparkMP #SuccessStory
4 views | Jhabua, Madhya Pradesh | Jun 30, 2026