समाजसेवी सुरेश सैनी, बोले—मुख्यमंत्री नायब सैनी अच्छे इंसान, सीएम कार्यालय से फोन के बावजूद प्रशासन ने नहीं सुनी फरियाद; राष्ट्रीय कदम से बातचीत में छलक आया दर्द...
यमुनानगर। (राष्ट्रीय कदम) ब्यूरो: शहर में छोटी सी चाय की दुकान चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले समाजसेवी सुरेश सैनी आज अपनी ही समस्याओं को लेकर सिस्टम के सामने इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। कभी जनता के काम के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने वाले सुरेश सैनी अब अपने परिवार से जुड़े मामलों में न्याय की तलाश में जगह-जगह भटक रहे हैं।
राष्ट्रीय कदम टीम से बातचीत के दौरान सुरेश सैनी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी उनके लिए बेहद संवेदनशील और अच्छे इंसान हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री आवास पर मेरी बात सुनी सम्मान दिया। उनका कहना है कि कई मामलों में मुख्यमंत्री कार्यालय से संबंधित अधिकारियों को फोन भी करवाया, लेकिन इसके बावजूद उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
सुरेश सैनी ने बताया कि उनकी बेटी के साथ कथित तौर पर कुछ शरारती लोगों ने लड़का समझकर सरेआम मारपीट की। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद उन्हें अब तक उचित सुनवाई और इंसाफ नहीं मिला। इसी तरह उनके बेटे को किसी वाहन द्वारा टक्कर मारे जाने का मामला भी उन्होंने बताया, जिसमें उनके अनुसार कार्रवाई नहीं हो सकी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके घर में दो बार चोरी की घटनाएं हुईं। सुरेश सैनी का दावा है कि उन्होंने प्रशासन को कथित चोरों के नाम तक बताए, लेकिन इसके बावजूद मामले में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
“आखिर गरीब आदमी जाए तो जाए कहां?”
बातचीत के दौरान सुरेश सैनी की आवाज में सिस्टम के प्रति नाराजगी के साथ-साथ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से न्याय मिलने की उम्मीद भी साफ दिखाई दी। राष्ट्रीय कदम से बातचीत करते-करते वह भावुक हो गए और कहा कि वह एक बार फिर मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी से मिलकर अपनी समस्याएं उनके सामने रखेंगे।
सुरेश सैनी का कहना है कि उन्हें मुख्यमंत्री से उम्मीद है कि यदि उनकी शिकायतें सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचेंगी तो संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा और उनके परिवार को न्याय मिल सकेगा।
अब सवाल यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से संज्ञान लिए जाने के बावजूद अगर एक आम परिवार अपनी फरियाद लेकर दर-दर भटक रहा है, तो आखिर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई में अड़चन कहां है? सुरेश सैनी की कहानी सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि उस आम आदमी के दर्द को भी सामने रखती है जो सिस्टम से न्याय की उम्मीद लेकर अधिकारियों के दरवाजे खटखटाता रही है