दिनकर की राष्ट्रीय चेतना आज भी प्रासंगिक, जातिवाद के विरुद्ध मजबूत प्रतिपक्ष है उनका साहित्य
118वीं जयंती पर बुद्धिजीवियों ने कहा—जनता ने दिनकर को बनाया राष्ट्रकवि, आज भी सबसे अधिक पढ़े और उद्धृत किए जाने वाले साहित्यकारों में शामिल
सीतामढ़ी, 23 सितंबर 2026। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 118वीं जयंती के अवसर पर बुधवार को शंकर चौक, डुमरा स्थित अटल नगर में आयोजित समारोह में शहर के बुद्धिजीवियों ने दिनकर के साहित्य और उनके राष्ट्रीय चिंतन पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय चिंताओं की जिस स्पष्ट समझ का परिचय दिनकर के चिंतन और साहित्य में मिलता है, वही उन्हें सर्वकालिक साहित्यिक प्रतिष्ठा प्रदान करती है।
वक्ताओं ने कहा कि दिनकर आज भी अपनी रचनाओं के माध्यम से उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने अपने समय में थे। जनता ने उन्हें राष्ट्रकवि के रूप में स्वीकार किया और वे आज भी लोगों के सर्वाधिक प्रिय कवियों एवं साहित्यकारों में शुमार हैं। दिनकर न केवल सर्वाधिक पढ़े जाने वाले साहित्यकारों में हैं, बल्कि उनके विचार और पंक्तियां व्यापक रूप से उद्धृत भी की जाती हैं।
समारोह में यह विचार भी प्रमुखता से सामने आया कि यदि साहित्य राजनीति को सही दिशा दिखाने वाली मशाल है, तो भारतीय संदर्भ में उस मशाल का एक बड़ा हिस्सा दिनकर साहित्य से प्रकाशित होता है। उनके साहित्य में राष्ट्र, समाज, संस्कृति और आम जनजीवन से जुड़े सवालों की गहरी अभिव्यक्ति दिखाई देती है।
जातिवाद के विरुद्ध राष्ट्रीय चेतना का स्वर
वक्ताओं ने कहा कि दिनकर का साहित्य जातिवाद का केवल निषेध ही नहीं करता, बल्कि जातिवाद से पैदा होने वाली विडंबनाओं के खिलाफ एक सशक्त वैचारिक प्रतिपक्ष भी प्रस्तुत करता है। उनका साहित्य सामाजिक विभाजन से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता और व्यापक मानवीय दृष्टि का स्वर सामने रखता है।
वक्ताओं ने कहा कि दिनकर को किसी जातीय घेरे में सीमित करने के बजाय उनके व्यापक साहित्यिक और राष्ट्रीय योगदान के संदर्भ में देखना अधिक उपयुक्त है। उनकी रचनाएं समाज को संकीर्णताओं से ऊपर उठकर राष्ट्र और मानवता के व्यापक सरोकारों से जोड़ती हैं।
कार्यक्रम संयोजक एवं अधिवक्ता श्रीनिवास मिश्रा ने विज्ञप्ति जारी कर समारोह की जानकारी दी। समारोह की अध्यक्षता विद्वान राजनीतिक समाजकर्मी केदार शर्मा ने की, जबकि संचालन श्रीनिवास मिश्रा ने किया।
समाज सेवा के क्षेत्र में योगदान देने वालों का सम्मान
समारोह के दौरान विशिष्ट सामाजिक कार्यों के लिए कई लोगों को विधायक बैद्यनाथ प्रसाद के हाथों सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में रामसखा चौधरी, राघव ठाकुर, विमल कुमार परिमल, बी.के. मिश्रा, बिट्टू विश्वास झा, राजेश चौधरी, सुरेश वर्मा, प्रो. विनय कुमार चौधरी, रीतेश कुमार सिंह, डॉ. अमित कुमार सिंह, डॉ. स्मिता, राजन कुमार सिंह, कुमार शिरोमणि, अनिल कुमार सिंह, सुनील कुमार चौधरी और राजेश कुमार सिंह सहित अन्य शामिल रहे।
समारोह में दिनेश चंद्र द्विवेदी, उपेंद्र चौधरी, डॉ. शशिरंजन कुमार, अमरेंद्र पांडेय, विजय कुमार मिश्र, सीमा कुमारी, राहुल कुमार, रामकृष्ण नारायण, प्रवीण कुमार शाही, चंद्रभूषण कुमार, विजयेंद्र आर्य, सीताराम सिंह, दयाशंकर मुन्ना, हरेन्द्र सिंह, अवधेश प्रसाद सिंह छोटन, मुकेश कुमार मिश्रा, दिलीप कुमार शाही, अरुण कुमार ठाकुर, ज्ञान प्रकाश ज्ञानू, राहुल मिश्रा, विनोद कुमार चौधरी, अनिमेष कुमार, ललन पांडेय, विनोद बिहारी मंडल, चंदन कुमार सिंह समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
समारोह में दिनकर के साहित्य, उनके राष्ट्रीय चिंतन और सामाजिक सरोकारों को वर्तमान समय में और अधिक प्रासंगिक बताते हुए उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।