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भाई इसको लाइसेंस किसने दिया और क्यों दिया,कुछ समझे ? #rajdhani_khabar #udaipur #viralvideos #udaipurpolice

Badgaon, Udaipur | Jun 25, 2026

MORE NEWS

राज्यपाल श्री बागड़े ने किया विश्व धरोहर कुम्भलगढ़ दुर्ग का अवलोकन

धरोहर संरक्षण एवं पर्यटन सुविधाओं के विस्तार पर दिया बल

राजसमंद, 25 जून। महामहिम राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े ने गुरुवार दोपहर विश्व प्रसिद्ध कुम्भलगढ़ दुर्ग स्थित महाराणा प्रताप की जन्मस्थली पहुंचे। इस दौरान उन्होंने दुर्ग के विभिन्न भागों का पैदल ही अवलोकन करते हुए ऐतिहासिक धरोहर की भव्यता एवं स्थापत्य कला को निकट से देखा।

भ्रमण के दौरान कुम्भलगढ़ विधायक श्री सुरेन्द्र सिंह राठौड़, जिला कलक्टर श्री अरुण कुमार हसीजा, जिला पुलिस अधीक्षक श्री हेमंत कालाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि-अधिकारी उपस्थित रहे। महामहिम राज्यपाल ने दुर्ग की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की तथा इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

हेरिटेज सोसायटी के सचिव श्री कुबेर सिंह सोलंकी ने महामहिम राज्यपाल को कुम्भलगढ़ दुर्ग के इतिहास, स्थापत्य विशेषताओं, मेवाड़ के विभिन्न शासकों के योगदान तथा दुर्ग से जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने दुर्ग की विश्वस्तरीय पहचान, इसकी विशाल प्राचीर तथा पर्यटन की दृष्टि से इसके महत्व पर भी प्रकाश डाला।

महामहिम राज्यपाल श्री बागड़े ने कुम्भलगढ़ दुर्ग को अमूल्य धरोहर बताते हुए इसके संरक्षण एवं संवर्धन को प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक विरासत का संरक्षण हमारी सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करता है तथा भावी पीढ़ियों को अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित कराता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को दुर्ग पर आने वाले देशी एवं विदेशी पर्यटकों के लिए सुविधाओं के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के संबंध में आवश्यक निर्देश भी दिए।

राज्यपाल श्री बागड़े ने किया विश्व धरोहर कुम्भलगढ़ दुर्ग का अवलोकन धरोहर संरक्षण एवं पर्यटन सुविधाओं के विस्तार पर दिया बल राजसमंद, 25 जून। महामहिम राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े ने गुरुवार दोपहर विश्व प्रसिद्ध कुम्भलगढ़ दुर्ग स्थित महाराणा प्रताप की जन्मस्थली पहुंचे। इस दौरान उन्होंने दुर्ग के विभिन्न भागों का पैदल ही अवलोकन करते हुए ऐतिहासिक धरोहर की भव्यता एवं स्थापत्य कला को निकट से देखा। भ्रमण के दौरान कुम्भलगढ़ विधायक श्री सुरेन्द्र सिंह राठौड़, जिला कलक्टर श्री अरुण कुमार हसीजा, जिला पुलिस अधीक्षक श्री हेमंत कालाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि-अधिकारी उपस्थित रहे। महामहिम राज्यपाल ने दुर्ग की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की तथा इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। हेरिटेज सोसायटी के सचिव श्री कुबेर सिंह सोलंकी ने महामहिम राज्यपाल को कुम्भलगढ़ दुर्ग के इतिहास, स्थापत्य विशेषताओं, मेवाड़ के विभिन्न शासकों के योगदान तथा दुर्ग से जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने दुर्ग की विश्वस्तरीय पहचान, इसकी विशाल प्राचीर तथा पर्यटन की दृष्टि से इसके महत्व पर भी प्रकाश डाला। महामहिम राज्यपाल श्री बागड़े ने कुम्भलगढ़ दुर्ग को अमूल्य धरोहर बताते हुए इसके संरक्षण एवं संवर्धन को प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक विरासत का संरक्षण हमारी सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करता है तथा भावी पीढ़ियों को अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित कराता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को दुर्ग पर आने वाले देशी एवं विदेशी पर्यटकों के लिए सुविधाओं के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के संबंध में आवश्यक निर्देश भी दिए।

Badgaon, Udaipur | Jun 25, 2026

हिंदुस्तान जिंक में भारत के पहले 250 मीट्रिक टन क्षमता का इलेक्ट्रिक क्रेन की शुरूआत

देबारी, राजस्थान में हाइब्रिड क्रेन की तैनाती से उत्सर्जन में कमी और ग्रीन इंडस्ट्री की ओर बड़ा कदम

कंपनी का नेट-जीरो लक्ष्य 2050 या उससे पहले हासिल करने का संकल्प मजबूत

 

उदयपुर, 25 जून 2026। विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक उत्पादक कंपनी और शीर्ष सिल्वर उत्पादकों में से एक हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड राजस्थान के देबारी स्थित जिंक स्मेल्टर में भारत के पहले 250 मीट्रिक टन क्षमता की इलेक्ट्रिक क्रेन की शुरूआत की है। यह हाइब्रिड मशीन डीजल और बिजली दोनों पर चल सकती है और कंपनी के कम कार्बन ऑपरेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह पहल कंपनी के ग्रीन रोडमैप का हिस्सा है, जिसके तहत वह अपने ऑपरेशन्स में क्लीन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दे रही है। पिछले तीन वर्षों में कंपनी ने कई ग्रीन मोबिलिटी समाधान अपनाए हैं। इनमें भारत की पहली अंडरग्राउंड बैटरी इलेक्ट्रिक, इलेक्ट्रिक एवं एलएनजी लॉजिस्टिक्स फ्लीट शामिल हैं। ग्रीनलाइन मोबिलिटी के साथ मिलकर कंपनी ने राजस्थान का सबसे बड़ा ईवी बल्कर फ्लीट तैयार किया है, जिसमें 40 इलेक्ट्रिक बल्कर शामिल हैं। इसके अलावा, कर्मचारियों के लिए 41 ग्रीन बसों के प्रोजेक्ट के तहत 2 इलेक्ट्रिक बसें भी शुरू की गई हैं। इससे पहले, कंपनी ने रामपुरा आगुचा खदान में 4 इलेक्ट्रिक लोडर भी शुरू किए थे।

इस उपलब्धि पर हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि, “हमारे लिए सस्टेनेबिलिटी बहुत महत्वपूर्ण है। भारत का पहला 250 मीट्रिक टन इलेक्ट्रिक क्रेन शुरू करना इस दिशा में एक बड़ा कदम है। हम स्वच्छ तकनीक अपनाकर इंडस्ट्री को ग्रीन और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

यह क्रेन साइट पर उत्सर्जन कम करने में मदद करेगा। अनुमान है कि यह हर साल लगभग 250.8 टन कार्बन उत्सर्जन कम करेगा, क्योंकि यह पहले हर साल करीब 93,600 लीटर डीजल खपत करने वाले डीजल क्रेन की जगह लेगा।

सैनी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर, दीपक गर्ग ने कहा कि, “हिंदुस्तान जिंक ने हमेशा सस्टेनेबल माइनिंग में नेतृत्व दिखाया है। हमें इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनकर गर्व है। यह क्रेन ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और उत्सर्जन कम करने में मदद करेगा।”

2022-23 में हिंदुस्तान जिंक भारत की पहली कंपनी बनी जिसने सिंदेसर खुर्द खदान में अंडरग्राउंड बैटरी चलित इलेक्ट्रिक वाहन शुरू किए। वर्तमान में कंपनी के पास 250 से अधिक एजएनजी ट्रक हैं, जो खदान से स्मेल्टर तक सामग्री ले जाते हैं।

कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2050 या उससे पहले नेट जीरो लक्ष्य हासिल करना है। इसके लिए वह रिन्यूएबल एनर्जी का उपयोग बढ़ा रही है, जो अब लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। कंपनी 2020 के स्तर के मुकाबले स्कोप  1 और 2 उत्सर्जन में 50 प्रतिशत और स्कोप 3 में 25 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखती है।

हिंदुस्तान जिंक ने एशिया का पहला लो-कार्बन जिंक इकोजे़न ब्रांड भी लॉन्च किया है। कंपनी को एसएण्डपी ग्लोबल कार्पोरेट सस्टेनेबिलिटी ऐसेसमेंट 2025 में लगातार तीसरी बार विश्व की सबसे सस्टेनेबल मेटल और माइनिंग कंपनी का दर्जा मिला है।

हिंदुस्तान जिंक में भारत के पहले 250 मीट्रिक टन क्षमता का इलेक्ट्रिक क्रेन की शुरूआत देबारी, राजस्थान में हाइब्रिड क्रेन की तैनाती से उत्सर्जन में कमी और ग्रीन इंडस्ट्री की ओर बड़ा कदम कंपनी का नेट-जीरो लक्ष्य 2050 या उससे पहले हासिल करने का संकल्प मजबूत उदयपुर, 25 जून 2026। विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक उत्पादक कंपनी और शीर्ष सिल्वर उत्पादकों में से एक हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड राजस्थान के देबारी स्थित जिंक स्मेल्टर में भारत के पहले 250 मीट्रिक टन क्षमता की इलेक्ट्रिक क्रेन की शुरूआत की है। यह हाइब्रिड मशीन डीजल और बिजली दोनों पर चल सकती है और कंपनी के कम कार्बन ऑपरेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल कंपनी के ग्रीन रोडमैप का हिस्सा है, जिसके तहत वह अपने ऑपरेशन्स में क्लीन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दे रही है। पिछले तीन वर्षों में कंपनी ने कई ग्रीन मोबिलिटी समाधान अपनाए हैं। इनमें भारत की पहली अंडरग्राउंड बैटरी इलेक्ट्रिक, इलेक्ट्रिक एवं एलएनजी लॉजिस्टिक्स फ्लीट शामिल हैं। ग्रीनलाइन मोबिलिटी के साथ मिलकर कंपनी ने राजस्थान का सबसे बड़ा ईवी बल्कर फ्लीट तैयार किया है, जिसमें 40 इलेक्ट्रिक बल्कर शामिल हैं। इसके अलावा, कर्मचारियों के लिए 41 ग्रीन बसों के प्रोजेक्ट के तहत 2 इलेक्ट्रिक बसें भी शुरू की गई हैं। इससे पहले, कंपनी ने रामपुरा आगुचा खदान में 4 इलेक्ट्रिक लोडर भी शुरू किए थे। इस उपलब्धि पर हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि, “हमारे लिए सस्टेनेबिलिटी बहुत महत्वपूर्ण है। भारत का पहला 250 मीट्रिक टन इलेक्ट्रिक क्रेन शुरू करना इस दिशा में एक बड़ा कदम है। हम स्वच्छ तकनीक अपनाकर इंडस्ट्री को ग्रीन और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” यह क्रेन साइट पर उत्सर्जन कम करने में मदद करेगा। अनुमान है कि यह हर साल लगभग 250.8 टन कार्बन उत्सर्जन कम करेगा, क्योंकि यह पहले हर साल करीब 93,600 लीटर डीजल खपत करने वाले डीजल क्रेन की जगह लेगा। सैनी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर, दीपक गर्ग ने कहा कि, “हिंदुस्तान जिंक ने हमेशा सस्टेनेबल माइनिंग में नेतृत्व दिखाया है। हमें इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनकर गर्व है। यह क्रेन ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और उत्सर्जन कम करने में मदद करेगा।” 2022-23 में हिंदुस्तान जिंक भारत की पहली कंपनी बनी जिसने सिंदेसर खुर्द खदान में अंडरग्राउंड बैटरी चलित इलेक्ट्रिक वाहन शुरू किए। वर्तमान में कंपनी के पास 250 से अधिक एजएनजी ट्रक हैं, जो खदान से स्मेल्टर तक सामग्री ले जाते हैं। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2050 या उससे पहले नेट जीरो लक्ष्य हासिल करना है। इसके लिए वह रिन्यूएबल एनर्जी का उपयोग बढ़ा रही है, जो अब लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। कंपनी 2020 के स्तर के मुकाबले स्कोप 1 और 2 उत्सर्जन में 50 प्रतिशत और स्कोप 3 में 25 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखती है। हिंदुस्तान जिंक ने एशिया का पहला लो-कार्बन जिंक इकोजे़न ब्रांड भी लॉन्च किया है। कंपनी को एसएण्डपी ग्लोबल कार्पोरेट सस्टेनेबिलिटी ऐसेसमेंट 2025 में लगातार तीसरी बार विश्व की सबसे सस्टेनेबल मेटल और माइनिंग कंपनी का दर्जा मिला है।

Badgaon, Udaipur | Jun 25, 2026

मानसून सत्र के मद्देनजर एसडीआरएफ की 8 टीमें विभिन्न जिलों के लिए रवाना

उदयपुर, 25 जून। आगामी मानसून सत्र को देखते हुए संभावित प्राकृतिक आपदाओं एवं आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राज्य आपदा प्रतिसाद बल (SDRF) ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
इसी क्रम में गुरुवार प्रातः 11 बजे कंपनी कमांडर महेंद्र सिंह के नेतृत्व में एसडीआरएफ की 8 विशेष टीमों को संभाग के विभिन्न जिलों के लिए रवाना किया गया। कंपनी कमांडर ने हरी झंडी दिखाकर टीमों को उनके निर्धारित क्षेत्रों के लिए रवाना किया।
ये टीमें प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, सलूंबर, चित्तौड़गढ़, कोटड़ा, राजसमंद एवं डूंगरपुर सहित संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात रहेंगी। मानसून के दौरान बाढ़, जलभराव, नदी-नालों में तेज बहाव तथा अन्य आपदा संबंधी परिस्थितियों में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करना इन टीमों का मुख्य उद्देश्य रहेगा।
एसडीआरएफ अधिकारियों ने बताया कि मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी टीमों को आवश्यक आधुनिक उपकरणों एवं संसाधनों से लैस किया गया है, ताकि आमजन को शीघ्र राहत पहुंचाई जा सके।

मानसून सत्र के मद्देनजर एसडीआरएफ की 8 टीमें विभिन्न जिलों के लिए रवाना उदयपुर, 25 जून। आगामी मानसून सत्र को देखते हुए संभावित प्राकृतिक आपदाओं एवं आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राज्य आपदा प्रतिसाद बल (SDRF) ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में गुरुवार प्रातः 11 बजे कंपनी कमांडर महेंद्र सिंह के नेतृत्व में एसडीआरएफ की 8 विशेष टीमों को संभाग के विभिन्न जिलों के लिए रवाना किया गया। कंपनी कमांडर ने हरी झंडी दिखाकर टीमों को उनके निर्धारित क्षेत्रों के लिए रवाना किया। ये टीमें प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, सलूंबर, चित्तौड़गढ़, कोटड़ा, राजसमंद एवं डूंगरपुर सहित संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात रहेंगी। मानसून के दौरान बाढ़, जलभराव, नदी-नालों में तेज बहाव तथा अन्य आपदा संबंधी परिस्थितियों में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करना इन टीमों का मुख्य उद्देश्य रहेगा। एसडीआरएफ अधिकारियों ने बताया कि मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी टीमों को आवश्यक आधुनिक उपकरणों एवं संसाधनों से लैस किया गया है, ताकि आमजन को शीघ्र राहत पहुंचाई जा सके।

Badgaon, Udaipur | Jun 25, 2026